Himachalnow / पांवटा साहिब
सिरमौर जिले में मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए मधुमक्खियों की बाड़ लगाने की योजना तैयार
हाथी संरक्षण की दिशा में नई शुरुआत
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस (21 मार्च) के मौके पर हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने हाथी संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। यह पहल सिरमौर जिले की दून घाटी में जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है। जैव विविधता की दृष्टि से यह स्थिति सराहनीय है, लेकिन स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
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मधुमक्खियों के छत्तों से बनाई जाएगी ‘सुरक्षा बाड़’
हाथियों को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने पारंपरिक और देसी उपायों को अपनाने का फैसला लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों को मधुमक्खियों से डर लगता है और मधुमक्खियों की भनभनाहट उन्हें मानव बस्तियों से दूर रखने में प्रभावी साबित हो सकती है। इसी सोच के तहत उत्तराखंड सीमा से सटे सिंबलवाड़ा रिजर्व सेंचुरी के प्रवेश द्वारों पर मधुमक्खियों के छत्तों की सुरक्षा बाड़ बनाने की योजना बनाई जा रही है।
स्थानीय समुदाय को प्रशिक्षण और जागरूकता
पांवटा साहिब के डीएफओ ऐश्वर्या राज की अध्यक्षता में बैहराल ब्लॉक में हाथी संरक्षण एवं प्रबंधन को लेकर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय को हाथियों से सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझने के तरीके बताए गए। मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ अशोक कुमार ने बताया कि मधुमक्खियों के डंक की आवाज से हाथी भाग जाते हैं, और इसका उपयोग हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए किया जा सकता है।
राजाजी नेशनल पार्क से हिमाचल तक हाथियों की बढ़ी आवाजाही
हाल के वर्षों में उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से जंगली हाथी यमुना नदी पार कर हिमाचल के सिरमौर जिले के सिंबलवाड़ा क्षेत्र तक पहुंचने लगे हैं। यहां ट्रेंच या सुरक्षा दीवारें न होने के कारण हाथी खेतों में घुस आते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होता है। बीते समय में ऐसी ही घटनाओं में एक महिला और एक भेड़पालक की मौत हो चुकी है।
हाथी संरक्षण में योगदान देने वाले किसानों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान हाथी संरक्षण में अहम भूमिका निभाने वाले पांच किसानों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्थानीय स्तर पर लोगों को इस मुहिम से जोड़ने का प्रयास है। वन विभाग ने यह भी घोषणा की कि हाथी संरक्षण के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा जिसमें स्थानीय लोग, अधिकारी और संबंधित हितधारक शामिल होंगे।
हाथी संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय
इस पहल के माध्यम से वन विभाग ने न केवल हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया है, बल्कि स्थानीय समुदाय को भी सक्रिय भागीदार बनाया है। यह सामुदायिक भागीदारी मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।
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