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राज्यसभा में गूंजी रंगस–लठियानी मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की मांग, क्षेत्रीय विकास पर जोर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन | 11 फ़रवरी 2026 at 3:28 pm

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राज्यसभा में रंगस–लठियानी मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग उठाई गई। इस मार्ग को हमीरपुर और ऊना जिलों के लिए जीवन रेखा बताया गया।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

राज्यसभा में उठी राष्ट्रीय राजमार्ग की मांग

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हमीरपुर से संबंध रखने वाले प्रदेश के राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार ने आज संसद के उच्च सदन में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर और ऊना जिलों को जोड़ने वाले रंगस–लठियानी मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने सदन के माध्यम से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री का ध्यान इस महत्वपूर्ण मार्ग की ओर आकृष्ट करते हुए कहा कि यह सड़क क्षेत्र के लिए केवल संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि जीवन रेखा के समान है।

मार्ग का सामरिक और क्षेत्रीय महत्व

डॉ. सिकंदर कुमार ने जानकारी दी कि रंगस लठियानी मार्ग कांगू, धनेटा और बंगाणा होते हुए गुजरता है, जिसके अंतर्गत धनेटा से बंगाणा के बीच एक सुरंग के निर्माण का प्रस्ताव पहले से ही मौजूद है। लगभग 39 किलो मीटर लंबा यह मार्ग हमीरपुर और ऊना जिलों के सैकड़ों गांवों को सीधे तौर पर जोड़ता है और क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक एवं सामरिक महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह मार्ग सीमित संसाधनों के कारण अपेक्षित विकास से वंचित है।

राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से संभावित लाभ

यदि इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जाता है, तो न केवल सड़क की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र में आवागमन भी सुरक्षित, सुगम और तेज होगा। इससे स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। डॉ. सिकंदर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 503ए और राष्ट्रीय राजमार्ग 88 के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। इस कारण यह सड़क राज्य के आंतरिक संपर्क तंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

डीपीआर और सर्वेक्षणों का उल्लेख

उन्होंने सदन में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में भी इस क्षेत्र के लिए विभिन्न डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) और सर्वेक्षणों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग बनने की सभी तकनीकी और प्रशासनिक संभावनाओं को पूरा करता है।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

डॉ. सिकंदर कुमार ने अपने संबोधन में इस मार्ग के धार्मिक और आर्थिक महत्व को भी विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रंगस–लठियानी मार्ग के राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर सहित क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच और अधिक आसान हो जाएगी। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों की आजीविका के नए साधन विकसित होंगे। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा बालक नाथ मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन सड़क की सीमित क्षमता और खराब स्थिति के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

रोजगार और व्यापार को नई गति

राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा मिलने से इस क्षेत्र में पर्यटन आधारित ढांचे का विकास होगा, जिससे होटल, ढाबे, परिवहन और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आर्थिक दृष्टि से भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। डॉ. सिकंदर ने कहा कि इस सड़क के विकसित होने से स्थानीय किसानों, व्यापारियों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। इससे क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी और पिछड़े क्षेत्रों के विकास को बल मिलेगा।

सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में सहायक

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किए जाने के लिए निर्धारित मापदंडों, जैसे पिछड़ा क्षेत्र विकास, दो महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ना और यातायात की संभावनाएं, को पूरी तरह से पूरा करता है। प्राकृतिक आपदाओं और सुरक्षा आवश्यकताओं के समय त्वरित आवागमन में सहायक सिद्ध हो सकती है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में मजबूत सड़क नेटवर्क न केवल विकास बल्कि सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।

केंद्र सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील

डॉ. सिकंदर कुमार ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि क्षेत्रीय जनता की लंबे समय से चली आ रही इस जायज मांग को स्वीकार किया जाए और रंगस–लठियानी मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि इसके निर्माण एवं उन्नयन के लिए आवश्यक बजट का प्रावधान इसी वित्त वर्ष में किया जाए, ताकि वर्षों से इंतजार कर रही जनता को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल जन अपेक्षाओं के अनुरूप होगा, बल्कि प्रधानमंत्री के “सड़क से समृद्धि” के विजन को भी साकार करेगा। अब क्षेत्र की जनता को केंद्र सरकार के सकारात्मक निर्णय का इंतजार है, जिससे विकास की यह महत्वपूर्ण कड़ी जल्द ही नई पहचान प्राप्त कर सके।

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