अमेरिका जाने के सपने की भयावह सच्चाई : टॉर्चर, ठगी और डिपोर्टेशन की दर्दनाक कहानी

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‘डंकी रूट’ के जाल में फंसा हिमाचल का युवक, 45 लाख गंवाने के बाद पहुंचा घर

अमेरिका में बेहतर जीवन और सुनहरे भविष्य की चाहत ने हिमाचल प्रदेश के गुमटी गांव के 19 वर्षीय युवक रितेश और उसके परिवार को एक ऐसे दर्दनाक सफर में धकेल दिया, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है। अवैध रूप से अमेरिका पहुंचाने के नाम पर एजेंटों ने उसके परिवार से 45 लाख रुपये ठग लिए। पैसे देने के बावजूद, रितेश को पहले कई देशों में घुमाया गया, प्रताड़ित किया गया और अंत में अमेरिका पहुंचने के बाद उसे हिरासत में लेकर वापस भारत डिपोर्ट कर दिया गया।

रविवार को अमेरिकी सैन्य विमान 112 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर अमृतसर के गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा। इनमें से एक रितेश भी था, जिसे एजेंटों ने ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका भेजा था। परिजनों ने जैसे ही उसे घर वापस सुरक्षित पाया, राहत की सांस ली। हालांकि, यह राहत उस आर्थिक और मानसिक आघात के आगे छोटी थी, जिससे उनका परिवार गुजरा।

‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका पहुंचाने का खतरनाक खेल

‘डंकी रूट’ मानव तस्करों द्वारा चलाया जाने वाला एक अवैध प्रवास मार्ग है, जिसके जरिए भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा और गुजरात के युवाओं को गैरकानूनी तरीके से अमेरिका भेजा जाता है। इस यात्रा में अप्रवासी कई देशों से होकर अमेरिका-मेक्सिको सीमा तक पहुंचते हैं। रास्ते में वे जंगलों, रेगिस्तानों और दुर्गम इलाकों से गुजरते हैं, जहां कई बार भूखा-प्यासा रखा जाता है, बंधक बनाकर पैसे ऐंठे जाते हैं और शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी जाती हैं।

रितेश के मामले में भी यही हुआ। एजेंट ने उसे मुंबई में एक दवा कंपनी में नौकरी दिलाने के नाम पर फंसाया और फिर अलग-अलग देशों में घुमाने के बाद अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर के रास्ते उसे अमेरिका पहुंचाया। वहां पहुंचते ही अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने उसे पकड़ लिया और हिरासत में डाल दिया।

परिवार पर टूटा आर्थिक संकट, 45 लाख रुपये गंवा दिए

रितेश के पिता शमशेर सिंह, जो सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, ने बताया कि उनके बेटे को अमेरिका पहुंचाने के नाम पर एजेंट ने 45 लाख रुपये ठग लिए। यह पूरी रकम नकद में दी गई, जो उन्होंने नारायणगढ़ में एजेंट द्वारा बताई गई जगह पर सौंपी। यह पैसे उन्होंने धीरे-धीरे किस्तों में दिए, क्योंकि हर बार एजेंट नया बहाना बनाकर पैसे मांगता रहा।

परिवार को जब तक यह समझ आया कि वे एक जाल में फंस चुके हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रितेश को एक के बाद एक अलग-अलग देशों में ले जाया गया, वहां उसे यातनाएं दी गईं और भूखा भी रखा गया। 25 जनवरी को वह अमेरिका में दाखिल हुआ, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने तुरंत उसे पकड़ लिया। कई दिनों की पूछताछ और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद उसे डिपोर्ट कर दिया गया।

एजेंट के खिलाफ होगी कार्रवाई, पुलिस में दर्ज कराएंगे शिकायत

रितेश के परिवार ने अब ठग एजेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है। पिता शमशेर सिंह ने कहा कि वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे ताकि अन्य परिवारों के बच्चे इस धोखाधड़ी के शिकार न हों।

अवैध प्रवास का यह खेल हजारों भारतीय युवाओं को प्रभावित कर रहा है। बेरोजगारी और बेहतर जीवन की चाहत में कई परिवार अपने जीवनभर की कमाई एजेंटों को सौंप देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें दर्दनाक अनुभव और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

‘डंकी रूट’ से अमेरिका पहुंचने के खतरों से रहें सतर्क

मानव तस्करी और अवैध प्रवासन का यह नेटवर्क लगातार फल-फूल रहा है, क्योंकि एजेंट युवा भारतीयों को झूठे सपने दिखाकर उन्हें इस खतरनाक रास्ते पर धकेल देते हैं। भारत और अमेरिका की सरकारें इस प्रवृत्ति पर सख्त कार्रवाई कर रही हैं, और कई एजेंटों को गिरफ्तार भी किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध तरीके से विदेश जाने की बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाकर सुरक्षित भविष्य बनाने की कोशिश करनी चाहिए। ‘डंकी रूट’ न सिर्फ अवैध है, बल्कि यह जिंदगी को खतरे में डालने वाला रास्ता भी है, जिसमें कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं।