क्योंथल क्षेत्र में अलाव जलाकर पारंपरिक ढंग से मनाई दीपावली

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HNN/ शिमला

क्योंथल क्षेत्र में मक्की के टांडों का अलाव अर्थात दवालठा जलाकर लोगों ने दीपावली का त्योहार पारंपरिक ढंग से मनाया। पीरन गांव के वरिष्ठ नागरिक दया राम वर्मा, अतर सिंह ठाकुर, प्रीतम ठाकुर ने बताया कि क्षेत्र में दीपावली को पंचपर्व के रूप में मनाते हैं जिसमें दिवाली से दो दिन पूर्व धनतेरस को मूड़ी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग गेंहूं, काले चने और राजमाह की मूड़ी बनाते हैं जिसे अखरोट के साथ खाया जाता है।

इसी प्रकार छोटी दिवाली की रात्रि को लोग अपने घरों में अस्कलियां बनाते हैं जिसे घी, शक्कर, शहद व राब के साथ खाते हैं। इसी प्रकार दीपावली के दिन लोग विशेष तौर पर पटांडे और खीर बनाते हैं और रात्रि को अपने घरों व स्थानीय मंदिर में दीपमाला करने के उपरांत गांव में चैपाल में अलाव जलाते है जिसमें सभी जाति के लोग शामिल होकर नृत्य करते हैं। कहा कि इसके उपरांत देवालयों में घैना लगाकर जागरण किया जाता है।

इस दौरान देवताओं के सम्मान में लोग अपने घरों में भूमि पर बिस्तर लगाकर सोते हैं और स्त्रियां अपने बालों को नहीं धोती है। दौलत राम वर्मा ने बताया कि क्योंथल के समूचे क्षेत्र में दिवाली पर्व पर देव जुन्गा की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कहा कि दिवाली के अगले दिन पड़वा अर्थात गोवर्धन पूजा के अवसर पर लोग अपने पशुओं को माला पहनाकर उन्हें आटे की पेड़ियां देते हैं।

भैयादूज को लोग देवता के नाम पर जातर निकालने का विधान है ताकि क्षेत्र में किसी महामारी का प्रकोप न होकर सुख व समृद्धि का सूत्रपात हो। इस मौके पर पीरन में भैयादूज पर मेले का आयोजन भी किया जाता है जिसमें क्षेत्र के हजारों लोग भाग लेते हैं।