1.68 करोड़ का किया था गबन, अलग-अलग धाराओं में हुई सजा
हिमाचल प्रदेश के नाहन में जिला कोषागार अधिकारी के रूप में तैनात रहे सतीश कुमार को 1.68 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि के गबन के मामले में अदालत ने दोषी ठहराते हुए पांच साल के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। सतीश कुमार पर आरोप था कि उन्होंने 2012 से 2018 के बीच ई-पेंशन प्रणाली में फर्जी प्रविष्टियां कर सरकारी धन का गबन किया।
सीनियर सेशन जज हंसराज की अदालत ने सतीश कुमार को पीसी एक्ट की धारा 13(2) के तहत दोषी ठहराया और 5 साल के साधारण कारावास के साथ 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही, उन्हें आईपीसी की धारा 409, 420, 467 और 468 के तहत भी अलग-अलग सजाएं दी गईं।
सजा का विवरण:
- धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात): 5 साल का साधारण कारावास और 5000 रुपये जुर्माना।
- धारा 420 (धोखाधड़ी): 3 साल का साधारण कारावास और 3000 रुपये जुर्माना।
- धारा 467 (जालसाजी): 4 साल का साधारण कारावास और 5000 रुपये जुर्माना।
- धारा 468 (धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी): 3 साल का साधारण कारावास और 3000 रुपये जुर्माना।
इन सभी सजाओं को साथ-साथ चलने का निर्देश दिया गया है।
अभियोजन की दलीलें और सजा का आधार:
अपर सरकारी अभियोजक चंपा सुरील ने अदालत में तर्क दिया कि सतीश कुमार ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर न केवल धनराशि का गबन किया, बल्कि ई-पेंशन प्रणाली की साख को भी ठेस पहुंचाई। अदालत ने आरोपी के अपराध की गंभीरता और इसके परिणामों को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाई।
यह मामला 2018 में गबन के आरोप सामने आने के बाद दर्ज किया गया था। जांच में पाया गया कि सतीश कुमार ने सरकारी धन की फर्जी प्रविष्टियों के माध्यम से हेराफेरी की थी। सजा सुनाए जाने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में कड़ी कार्रवाई होगी।

