नाहन मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य 2 साल से बंद

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भवन को लेकर एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते है भाजपा-कांग्रेस नेता, जनता भुगत रही खामियाजा

HNN/ नाहन

जिला सिरमौर मुख्यालय नाहन में वर्ष 2016 में शुरू हुए प्रदेश के तीसरे मेडिकल कॉलेज पर आने वाले दिनों में खतरे के बादल मंडला रहे हैं। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद की टीम ने हाल ही में नाहन मेडिकल कॉलेज में अनिमतताओं को लेकर भारी जुर्माना लगाया था।

केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा परिषद के अनुसार ना तो आठ साल में डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज नाहन का भवन बन पाए, ना ही यहां पर चिकित्सकों तथा प्रोफेसर के पद पूरी तरह भरे गए। ना ही 8 वर्षों में मेडिकल कॉलेज में होने वाले 15 डिपार्टमेंट शुरू हो पाए। ना ही जो सुविधा जनता को मिलनी चाहिए थी, वह मिल पाए।

इस मेडिकल कॉलेज में भवन निर्माण को लेकर अक्सर कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करती रहती है। मगर 8 वर्ष में से कांग्रेस सरकार के 3 वर्ष तथा भाजपा के 5 वर्ष में किसी ने भी मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण को पूरा करने की प्रयास नहीं किया। मात्र एक दूसरे पर कांग्रेस बीजेपी ने राजनीति के लिए आरोप लगाए।

जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है, नाहन मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य 2 साल से बंद है। आलम यह है कि ओपीडी में बाहर लोगों को सांस लेने के लिए भी जगह नहीं मिल रही हैं। जब से मेडिकल कॉलेज बना है, पूरे जिला के मरीजों की भीड नाहन मेडिकल कॉलेज में लगातार बढ़ रही है। 2016 से पहले जब यह जिला एवं क्षेत्रीय अस्पताल था, तो यहां पर प्रतिदिन की ओपीडी 300 से 400 मरीज होते थे।

जो कि अब बढ़कर 1200 से 1300 मरीज प्रतिदिन हो गई है। सुविधाओं के नाम पर मेडिकल कॉलेज में कुछ खास नहीं मिला है। मगर लोगों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी-लंबी तारीखें दी जाती हैं। प्रत्येक चुनाव में कांग्रेस तथा भाजपा एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं। मगर 8 वर्ष में किसी ने भी मेडिकल कॉलेज के भवन के निर्माण को लेकर कोई भी प्रयास नहीं किया।

हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने मेडिकल कॉलेज को मुद्दा बनाया। मगर अब चुनाव के बाद दोनों ही शांत बैठ गए हैं। कोई भी मेडिकल कॉलेज भवन के निर्माण कार्य को शुरू करने के लिए प्रयास नहीं कर रहा है। जुलाई 2022 से बंद है निर्माण कार्य 262 करोड़ की लागत से बनने वाले मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण का कार्य जुलाई 2022 में बंद हो गया।

उस दौरान प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इसके बाद कांग्रेस की सरकार आई। मगर अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। निर्माण के नाम पर केवल प्रशासनिक ब्लॉक का 60 फीसदी कार्य ही हो पाया है। जबकि इससे 3 गुना अधिक मेडिकल ब्लॉक के निर्माण को लेकर अभी शुरूआत भी नहीं हो पाई है। एमआरआई और पैट स्कैन की सुविधा नहीं मेडिकल कॉलेज को खुले आठ वर्ष से ज्यादा समय हो गया है।

मगर यहां पर अभी तक एमआरआई, कार्डियोलॉजी लैब और कैंसर मरीजों के लिए पैट स्कैन सुविधा भी नहीं मिली है। मरीजों को आज भी पीजीआई चंडीगढ़ या फिर महंगों दामों पर निजी अस्पतालों में यह टेस्ट करवाने पड़ रहे है। भवन की सुविधा न होने से यहां पर टैस्ट मशीनें इंस्टॉल नहीं हो पा रही है। ऐसे में लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

संकरी ओपीडी में घुटता है दम मेडिकल कॉलेज की अधिकतर ओपीडी संकरी है। गायनी और आंखों की ओपीडी के दोनों ओर जगह कम होने से मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा मैडीसिन, ऑर्थाे, कैंसर, सर्जिकल ईएनटी ओपीडी दोनों ओर से बंद है। यहां पर हवा गुजरने के लिए केवल मात्र खिड़की है। गर्मियों के मौसम में सबसे अधिक परेशानी रहती है और दम घुटने लगता है।

उधर, शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण को प्रदेश सरकार जानबूझ कर लटका रही है। निर्माण को लेकर रि टैंडर हो चुकी हैं, लेकिन सरकार अभी तक इसकी फोरेस्ट क्लीयरेंस नहीं करवा पाई है। उधर नाहन विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय सोलंकी ने बताया कि चुनाव आचार संहिता से पहले रि टेंडर प्रक्रिया चली हुई थी, जो कि जल्द पूरी हो जाएगी। कुछ ही समय में मेडिकल कॉलेज भवन के निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।