सोलन में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से “वार्तालाप” कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें आपदा प्रबंधन, पोषण, बागवानी और महिला सशक्तिकरण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
सोलन
डीसी का संदेश: सनसनी से बचें
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि मीडिया आपदा के दौरान सनसनी से बचे और लोगों में विश्वास बनाए। उन्होंने मीडिया की परिपक्व भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि मीडिया सरकार को जवाबदेह बनाने और अनसुनी आवाजों को प्रशासन तक पहुंचाने में अहम है।
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एडीसी ने साझा किए प्रशासनिक अनुभव
एडीसी राहुल जैन ने बताया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू होने के बाद हिमाचल में आपदाओं से नुकसान में कमी आई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने 2000 टास्क फोर्स स्वयंसेवकों, 200 आपदा मित्रों और 520 राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया है। मीडिया की सकारात्मक भूमिका से दीर्घकालिक आपदा जोखिम कम किए जा सकते हैं।
बागवानी विभाग का योगदान
उप निदेशक डॉ. शिफाली ठाकुर ने कहा कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन से सोलन में सेब पर निर्भरता कम कर विविध फसलों को प्रोत्साहन मिला है। पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और संरक्षित खेती से किसानों की आय और पोषण सुरक्षा दोनों बढ़ी हैं।
महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य अभियान
शूलिनी यूनिवर्सिटी की प्रो. डॉ. निशा कपूर ने ‘स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार’ अभियान को महिला और बच्चों के लिए ऐतिहासिक बताया। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के पदम देव शर्मा ने पोषण अभियान की चर्चा की और कहा कि यह कुपोषण, एनीमिया और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याओं से निपटने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
साझा उद्देश्य और मीडिया की भूमिका
पीआईबी के सहायक निदेशक ने कार्यशाला का उद्देश्य बताया और कहा कि मीडिया जनकल्याण योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इस मौके पर अहमद खान ने मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों और शूलिनी विश्वविद्यालय के छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की।
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