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शहद को भौगोलिक सूचकांक के आधार पर निर्धारण करने में मदद करें

PARUL | 27 सितंबर 2024 at 5:31 pm

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कुलपति डा.नवीन कुमार मधुमक्खियों की बीमारियों पर ध्यान केंद्रित करें विशेषज्ञ

HNN/काँगड़ा

चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में शुक्रवार 27 सितंबर को अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की मधुमक्खियां और परागण पर वार्षिक समूह की तीन दिवसीय बैठक का शुभारंभ कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने कहा कि मधुमक्खियों की कृषि में बहुत उपयाेिगता है। मधुमक्खियों से तैयार होने वाला शहद हमारी दिनचर्या से जुड़ा है। कई ऐसे ऐतिहासिक प्रमाण है जो यह दर्शाते है कि प्राचीन काल से शहद दवाईयों में उपयोग किया जाता रहा है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय उन किसानों की मदद करेंगा जो उनके साथ जुड़ कर वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खियों का पालन कर रहे है।

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उनके उत्पाद को अपने केंद्रों में स्थान उपलब्ध करवाते हुए उनकी बाजार की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विशेषज्ञों को निर्देश दिए कि वह क्षेत्र विशेष के आधार पर मधुमक्खी पालकों से संपर्क कर उनके शहद की गुणवत्ता को देखें ताकि उसका भौगोलिक सूचकांक के आधार पर निर्धारण किया जा सकें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के (फसल विज्ञान) उप महानिदेशक डा. टी.आर.शर्मा ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विश्व में भारत शहद का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और निर्यात में चैथे स्थान पर है। देश के विभिन्न भागों से जो विशेषज्ञ यहां पर एकत्र हुए है वह मधुमक्खियों की बीमारियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उसका समाधान निकालें।

कृषि क्षेत्र में मधुमक्खियां अपना बहुमूल्य योगदान प्रदान करती है। उन्होंने मधुमक्खी पालकों से भी आग्रह किया कि वह विशेषज्ञों के साथ मिलकर अपनी समस्याओं को साझा करें।आईसीएआर की (पौध संरक्षण एवं जैव सुरक्षा) सहायक महानिदेशक डा. पूनम जसरोटिया ने बतौर विशिष्ट अतिथि ने कृषि में मधुमक्खियों के योगदान पर चर्चा करते हुए उनका मानव जीवन के लिए विभिन्न उपयोग को विस्तार से बताया।परियोजना समन्वयक डा. सचिन सुरोशे ने देश के 25 केंद्रों में मधुमक्खियों पर चलाई जा रहीं परियोजना को लेकर विस्तार से जानकारी प्रदान की।डा. संजय कुमार ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि बैठक में देश के 25 केंद्रों से करीबन 35 वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों , प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों और शोधार्थियों समेत सौ प्रतिभागियों भाग ले रहे हैं।

इस दौरान मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य अतिथियों ने मधुमक्खियों पर उपयोगी जानकारी प्रदान करने वाली बारह पुस्तिकाओं का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के प्रगतिशील मधु पालको लाल चंद, निजय कुमार, दौलत राम और सतीश कुमार को सम्मानित किया गया।आयोजन सचिव डा. सुरेंद्र शर्मा ने कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।उद्घाटन समारोह में प्रसार शिक्षा निदेशक डा. विनोद शर्मा, डा. आर.सी.मिश्रा, डा. अताउर रहमान, डा. प्रदीप कुमार छुनेजा, संविधिक अधिकारी, विभागाध्यक्षों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।

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