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शीतोष्ण फलों को माईट से बचाने के लिए बागवानों को किया जागरूक

SAPNA THAKUR • 23 Dec 2022 • 1 Min Read

HNN/ लाहौल स्पीति

डॉ वाई.एस.परमार औद्यानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा की ओर से लाहुल-स्पीति के उदयपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा कृषि फसलों की माईट पर ऑल इंडिया नेटवर्क परियोजना के अन्तर्गत प्रायोजित जनजातीय उपयोजना के अन्तर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उदयपुर पंचायत के करीब 60 किसानों ने भाग लिया।

इस अवसर पर परियोजना प्रभारी व कीट वैज्ञानिक डॉ संगीता शर्मा ने शीतोष्ण फलों व पॉलीहाउस में लगने वाली माईट की पहचान, क्षति के लक्षण तथा रोकथाम के बारे में बागवानों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने बागवानों को बताया कि माईट एक सूक्ष्मदर्शी जीव है जिसके लगातार पत्तों से रस चूसने पर पत्तों का रंग फीका पड़ जाता है और फल कच्चे तथा छोटे आकार के रह जाते हैं। अगले वर्ष बीम कम बनते हैं और उत्पादन में भारी कमी आती है।

माईट के अण्डों को सर्दियों में फूटने से बचाने के लिए हॉर्टिकल्चर मिनरल तेलों का हरित कली अवस्था पर छिड़काव करना चाहिए। यदि माईट को जनसंख्या प्रति पत्ता 6.8 हो जाए तो माईटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। बागवानों को मित्र कीटों की पहचान के बारे में भी अवगत करवाया गया।