मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बोले — राजस्व घाटा अनुदान हिमाचल का अधिकार, केंद्र से मिलकर उठाएं आवाज
शिमला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के अभिभाषण से हुई, लेकिन सदन में उस समय असामान्य स्थिति बन गई जब उन्होंने अभिभाषण में संवैधानिक संस्थाओं पर की गई टिप्पणियों को मर्यादा से परे बताते हुए इसे पूरा पढ़ने से इनकार कर दिया।
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इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्यपाल द्वारा अभिभाषण पूरा न पढ़ना कोई नई बात नहीं है और पहले भी ऐसी परिस्थितियां बनती रही हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान हिमाचल प्रदेश का अधिकार है। छोटा और पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां विकास कार्यों की लागत अधिक है, इसलिए यह सहायता राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रदेश हित में एकजुट हों और दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलकर राजस्व घाटा अनुदान जारी रखने की मांग को मजबूती से रखें।
विधानसभा सत्र के पहले ही दिन इस घटनाक्रम ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सदन के भीतर तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।
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