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श्री नर्मदेश्वर महादेव शिव मंदिर अंबेहडा रामकिशन में शिव महापुराण कथा का हुआ समापन

By PARUL Published: 24 Apr 2024, 9:05 PM | Updated: 24 Apr 2024, 9:05 PM 1 min read

HNN/ऊना/ वीरेंद्र बन्याल

उप तहसील जोल के अंतर्गत आने वाले गांव अम्बेहडा रामकिशन में स्थित श्री नर्मदेश्वर महादेव शिव मंदिर में महालक्ष्मी इंडस्ट्री अम्बेहडा के उद्योगपति, समाजसेवी एवं कथा आयोजक योगराज जोगी एवं उनकी अर्धांगिनी सुषमा शर्मा के संकल्प से नौ दिवसीय श्री शिव पुराण कथा का समापन हुआ।

समापन दिवस पर व्यासपीठ पर विराजमान स्वामी जितेंद्र मोहन जी महाराज ने कहा कि दान से बढ़ती है हाथों की शोभा, पैरों की शोभा तीर्थो की यात्रा है। शोभा ब्रह्म ज्ञान तथा मुख्य हृदय की शोभा भगवान का नाम लेने से है। उन्होंने कहा कि दुखों की जड़ है। मोह, मनुष्य मोह रूपी रात्रि में सो रहा है। समस्त दुखों की जड़ मोह है। मोह के कारण ही मनुष्य दुखी होता है।

संसार में सब कुछ छूट जाएगा। स्थाई कुछ भी नहीं है, फिर भी मोह के कारण कोई भी उसे छोड़ने को तैयार नहीं है, जो हमारा है भी नहीं हम उसे भी अपना मान कर बैठे हैं। शिव पुराण में कथा आती है कि नारद जी को भी मोहभंग हो गया और भगवान ने उनका मोह दूर करने के लिए बंदर का रूप दे दिया। तब नारद जी का मोह दूर हुआ।

विश्व मोहनी ने भगवान नारायण का वर्णन किया। कथावाचक ने कहा कि परमात्मा के चरणों में असीम शांति मिलती है। परंतु दुर्भाग्यवश हम मार्ग से भटक कर संसार में उलझ जाते हैं।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दर्जनों भक्तों ने अर्धनारीश्वर स्वरूप 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना सहित पूजन विधि विधान के साथ किया गया।

स्वामी जितेंद्र मोहन जी महाराज ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में भावनाएं होना जरूरी है। सगुण, साकार सूर्य ,चंद्रमा, जल, पृथ्वी, वायु यह शिव पुराण का स्वरूप है। उन्होंने कहा कि अपने चारों ओर सदैव वातावरण शुद्ध रखें। जहां स्वच्छता और शांति होती है। वहां देवताओं का वास होता है। जल, वायु, पेड़ एक चेतन से लेकर जड़ चेतन में आकर एक दूसरे के सहायक बनते हैं।

जहां अध्यामिकता बढ़ जाती है और कर्म को भूल जाते हैं। वहां शिव और भक्ति दोनों नहीं होते। कथावाचक जितेंद्र मोहन जी महाराज ने शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव की मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर सकते हैं। शिव की भक्ति से सुख, समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि इस अलौकिक शिव पुराण की कथा सुनना अर्थात पाप से वियुक्त होना है। आयोजित शिव महापुराण में कथा को सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में भक्त मौजूद रहे और कथा स्थल में उपस्थित एवं दूर दराज से आए हुए भक्तजनों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।