श्री रेणुका जी वेटलैंड में पर्यावरण सुरक्षा का जिम्मा देखेगी इको विकास समिति

सेंचुरी के आवरण में सुधार के साथ-साथ लोकल प्रोड्यूस बनेंगे सदस्यों की इनकम का बड़ा जरिया

वेटलैंड व रामसर साइट के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त श्री रेणुका जी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा अब इको डेवलपमेंट कमेटी के हाथों में होगा।

हिमाचल प्रदेश वाइल्ड लाइफ के द्वारा इस सेंचुरी के लिए इको डेवलपमेंट कमिटी के गठन की कवायद को शुरू कर दिया गया है। इस कमेटी में स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ स्थानीय स्टेकहोल्डर जैसे की रेणुका जी विकास बोर्ड रिवेन्यू डिपार्मेंट सहित अन्य विभाग भी शामिल होंगे।

एचपी कोऑपरेटिव सोसाइटी के तहत इसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर दिया गया है । जल्द ही यह कमेटी फंक्शनिंग में भी आ जाएगी। पर्यावरण सुरक्षा समिति के गठन के बाद इस पूरे क्षेत्र की साफ सफाई, चिड़ियाघर की इनकम और स्थानीय ग्रामीणो के लोकल प्रोड्यूस इनकम का बड़ा साधन बने यह व्यवस्था भी देखी जाएगी।

चूंकि यह रामसर साइट है लिहाजा पर्यावरण की सुरक्षा की प्रमुखता के साथ वन्य जीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। बताना जरूरी है कि इस वेटलैंड क्षेत्र में सतयुग कालीन झील भी है जिसका धार्मिक पर्यटन के नजरिए से महत्व तो है ही साथ ही झील के सेडिमेंट्स के आधार पर वैज्ञानिक हिमालय क्षेत्र के मौसम और पर्यावरण पर भी रिसर्च करते हैं। ऐसे में इको डेवलपमेंट कमेटी के माध्यम से यहां की संपदाओं का उचित दोहन भी हो पाएगा।

बड़ी बात तो यह भी है कि यहां के सुरक्षित वातावरण को देखते हुए जहां लेपर्ड एंक्लोजर को एक्सटेंड किया जा रहा है वही मार्च अप्रैल तक टाइगर बाड़े का निर्माण कार्य पूरा कर वन्य प्राणी प्रेमियों को बाघ के दीदार भी होंगे।

वाइल्ड लाइफ फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिव्या शर्मा ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि एक डेवलपमेंट कमेटी का रजिस्ट्रेशन ओंनगोइंग है जल्द ही रजिस्ट्रेशन भी मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि टाइगर एंक्लोजर के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी से परमिशन मिल चुकी है। मार्च अप्रैल तक इन क्लोजर का कार्य भी पूर्ण कर दिया जाएगा।