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सिरमौर के गिरिपार में अब नहीं होगी शादियों में फिजूलखर्ची , परंपराओं में बदलाव कर लागू किए नए नियम

PRIYANKA THAKUR 30 Mar 2026 Edited 30 Mar 1 min read

Himachalnow / सिरमौर

सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में पारंपरिक विवाह प्रथाओं में बदलाव किया गया है। ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय के तहत 200 साल पुरानी नेवदा रस्म को बंद कर नई व्यवस्था लागू की है। इस निर्णय के साथ विवाह समारोहों में खर्च और अन्य पारंपरिक व्यवस्थाओं को सीमित करने के लिए नए नियम भी लागू किए गए हैं।

सिरमौर

नेवदा रस्म बंद करने का सामूहिक निर्णय
सिरमौर जिले की गवाली पंचायत के पशमी और घासन गांव में ग्रामीणों ने पारंपरिक नेवदा रस्म को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सामूहिक बैठक में लिया गया, जिसमें स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी रही। बैठक में विवाह संबंधी प्रथाओं में संशोधन को लेकर सहमति बनाई गई।

महासू मंदिर में निर्णय की पुष्टि
ग्रामीणों ने महासू मंदिर में एकत्रित होकर इस निर्णय को औपचारिक रूप दिया। निर्धारित नियमों के अनुसार यदि कोई परिवार इस व्यवस्था का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सामाजिक और आर्थिक स्तर पर निर्धारित कार्रवाई की जाएगी। निर्णय की जानकारी पूरे क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से साझा की गई है।

विवाह समारोह की अवधि और स्वरूप में बदलाव
पूर्व में गिरिपार क्षेत्र में विवाह समारोह कई दिनों तक आयोजित किए जाते थे, जबकि अब इन्हें सीमित कर एक दिन के आयोजन तक रखा गया है। नेवदा प्रणाली को समाप्त कर शगुन आधारित व्यवस्था लागू की गई है, जिससे प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

दहेज और अन्य प्रथाओं पर प्रावधान
नए नियमों के तहत विवाह में सीमित संख्या में वाहन और बरातियों की अनुमति निर्धारित की गई है। दहेज के लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है और आडंबर से जुड़ी अन्य परंपराओं को भी सीमित किया गया है। कुछ पारंपरिक व्यवस्थाओं में आंशिक परिवर्तन करते हुए आवश्यक प्रथाओं को यथावत रखा गया है।