Himachalnow / नाहन
फोरलेन निर्माण कार्य सबसे पहले पैकेज-3 के तहत शुरू होगा, जिसकी टेंटेटिव डीपीआर 402 करोड़ रुपये में तैयार की गई है। हालांकि, यह डीपीआर अभी फाइनल नहीं हुई है और इसमें कुछ बदलाव (एडिशन और डिलीशन) किए जा सकते हैं, जिससे अनुमानित लागत में वृद्धि या कमी हो सकती है। पैकेज-3 के अंतर्गत यह फोरलेन धौलाकुआं से बाता पुल तक बनाया जाएगा, जिसकी लंबाई 13.477 किलोमीटर होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस हिस्से में भूमि अधिग्रहण और अवैध कब्जे हटाने का काम शुरू करेगा। डीपीआर को अंतिम मंजूरी मिलते ही फोरलेन का निर्माण कार्य आरंभ किया जाएगा। इसके बाद पैकेज-1 और पैकेज-2 के तहत अन्य हिस्सों का निर्माण होगा।
– नितीश शर्मा, एसडीओ, नेशनल हाईवे नाहन।
सिरमौर जिले को जल्द ही अपने पहले फोरलेन की सौगात मिलने वाली है। कालाअंब से बाता पुल तक बनने वाले 50 किलोमीटर लंबे फोरलेन का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा। इस परियोजना में सबसे पहले धौलाकुआं से बाता पुल तक के 13.477 किलोमीटर लंबे पैकेज-3 पर काम शुरू होगा। इस खंड के लिए 402 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की गई है, जिसमें 262 करोड़ रुपए निर्माण कार्य और 285 करोड़ रुपए यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसे कार्यों के लिए प्रस्तावित हैं।
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देहरादून-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे से जुड़ेगा फोरलेन
देहरादून-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-07 सिरमौर जिले के पांवटा साहिब, नाहन और कालाअंब से होकर गुजरता है। इस हाईवे की कुल लंबाई 58 किलोमीटर है, जिसमें यमुना पुल से बाता पुल तक का हिस्सा पहले ही फोरलेन में बदल दिया गया है। अब बाता पुल से कालाअंब तक फोरलेन निर्माण होना बाकी है। सिरमौर में इस 50 किलोमीटर के हिस्से के पूरा होने के बाद यह हाईवे हरियाणा और उत्तराखंड से बेहतर तरीके से जुड़ेगा।
तीन चरणों में होगा निर्माण
कालाअंब से बाता पुल फोरलेन को तीन पैकेज में विभाजित किया गया है। पहला पैकेज कालाअंब से खजुरना पुल (18.300 किमी), दूसरा खजुरना से धौलाकुआं (18.400 किमी), और तीसरा धौलाकुआं से बाता पुल (13.477 किमी) तक होगा। हाल ही में पैकेज-3 को 2024-25 के लिए एनुअल वर्किंग प्लान में मंजूरी मिली है, और निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा।
पैकेज-3 को प्राथमिकता क्यों मिली?
पैकेज-3 को सबसे पहले मंजूरी मिलने का कारण यह है कि धौलाकुआं से बाता पुल तक के हिस्से में 70-80 प्रतिशत भूमि पहले से ही उपलब्ध है। केवल 20-30 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण करना होगा। इसके अलावा, यह क्षेत्र समतल है, जिससे निर्माण कार्य अपेक्षाकृत आसान और तेज़ होगा। इसके विपरीत, कालाअंब से खजुरना और खजुरना से धौलाकुआं तक का हिस्सा पहाड़ी है और यहां भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता अधिक है।
फोरलेन की विशेषताएं और लाभ
यह फोरलेन औसतन 30 से 40 मीटर चौड़ा होगा, जबकि कुछ स्थानों पर इसकी चौड़ाई 120 फीट तक होगी। पहाड़ी क्षेत्रों में वाहनों की गति 40-60 किमी प्रति घंटा होगी, जबकि मैदानी इलाकों में यह 80-100 किमी प्रति घंटा तक रहेगी। यह फोरलेन उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़ और शिमला के लिए बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। साथ ही, यात्रा का समय कम होगा और वाहनों के संचालन में आसानी होगी, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।
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