स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं बन रही आर्थिक रूप से मजबूत

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राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

ऊना : ऊना जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन (NRLM) के तहत महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। इन समूहों की महिलाएं आचार, सेपू, मसाला बड़ियां, पापड़, हल्दी, शहद, काली गेहूं का दलिया, आटा, चटनी, प्राकृतिक मक्की का आटा जैसे उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। ये उत्पाद स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिकी में महत्वपूर्ण सुधार हो रहा है।

स्थानीय से लेकर बाहरी राज्यों तक उत्पादों की मांग

स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पाद स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बाहरी राज्यों में भी बेचे जाते हैं। ये उत्पाद गांव स्तर पर हिमईरा शॉप, जिला और राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों एवं मेलों में भी प्रदर्शित किए जाते हैं। इससे महिलाओं को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ आर्थिक स्वतंत्रता भी प्राप्त हो रही है।

राधे कृष्णा समूह की सफलता की कहानी

ग्राम पंचायत टकारला के राधे कृष्णा समूह की सदस्य नीलम देवी बताती हैं कि 2011 में 10 महिलाओं ने इस समूह की स्थापना की। शुरुआत में, वे अपनी बचत को बैंक में जमा करती थीं। लेकिन समूह के विस्तार के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 5 लाख रुपये का लोन और 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड प्राप्त किया।

नीलम देवी ने बताया कि समूह ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से पंजीकरण भी करवाया, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित हो और विक्रय में आसानी हो। समूह के उत्पाद दिल्ली, गुड़गांव, चंडीगढ़ और देहरादून जैसे बड़े शहरों में बेचे जाते हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस मुनाफे से नीलम देवी ने अपने पति के लिए दुकान खोली और अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च भी इस आय से पूरा कर रही हैं

समूह की सचिव का अनुभव

राधे कृष्णा समूह की सचिव जीवन लता बताती हैं कि समूह ने 20 रुपये की बचत राशि से काम शुरू किया था। बाद में बैंक लोन और रिवॉल्विंग फंड की सहायता से महिलाओं ने गाय-भैंस खरीदकर दूध, दही, पनीर और घी का व्यवसाय शुरू किया।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनियों में उनके उत्पादों से लगभग 2 लाख रुपये की आय हुई। इसके अलावा, प्रदेश के सारस मेलों में भी समूह को लगभग डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की कमाई हुई। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और अब समूह मोमोज और सिड्डू बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

प्रशिक्षण और सरकारी समर्थन

नीलम देवी बताती हैं कि समूह की महिलाओं को मशोबरा में विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता को और बेहतर बना सकें। जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूहों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए हैं

इसके अलावा, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2024 में राधे कृष्णा समूह को “लखपति दीदी” प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया है।

समाज के लिए प्रेरणा

नीलम देवी ने अन्य महिलाओं से स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह केवल महिला सशक्तिकरण ही नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देने का एक अवसर है।

प्रशासन का प्रयास

उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि जिला प्रशासन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। प्रशासन द्वारा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है

2788 स्वयं सहायता समूहों को 9.85 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता

परियोजना अधिकारी, डीआरडीए ऊना केएल वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिशा-निर्देशानुसार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। वर्तमान में ऊना जिले में 2788 स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं, जिन्हें अब तक 9.85 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।