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हाब्बन में स्कूली बच्चे रेन शल्टर में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर

PRIYANKA THAKUR | 1 नवंबर 2021 at 2:02 pm

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स्कूल के नए भवन का दो साल से शिमला में नक्शा नहीं हुआ पास

HNN / राजगढ़ 

कालांतर मे बच्चे गुरूकुल में पेड़ के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण किया करते थे परंतु अब आधुनिकता के युग  में विद्यार्थी रेन शल्टर में बैठकर पढ़ाई करते हैं। जी हां यह वाक्या है राजगढ़ ब्लॉक के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हाब्बन का।  जहां बीते पांच वर्षों में अपना भवन न होने के कारण बच्चे रेन शल्टर में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है। क्षेत्र के जन प्रतिनिधि व शिक्षा विभाग कुंभकर्णी नींद में सोए हैं। बेहतरीन एवं गुणात्मक शिक्षा प्रदान के सरकार के खोखले दावों की जीवंत तस्वीर इस स्कूल में देखने को मिल रही है।

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सबसे अहम बात यह है कि स्कूल के प्रस्तावित नए भवन का संशोधित नक्शा व प्राक्कलन बीते दो वर्षों से लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय शिमला में पड़ा है जिसकी स्वीकृति आज तक नहीं मिल पाई। बता दें कि वर्ष 2017 के दौरान वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हाब्बन के पुराने  भवन में बरसात से भारी भू-स्खलन होने के कारण गाद भर गई थी और स्कूल भवन को काफी नुक्सान हो गया था। वर्ष 2003 में निर्मित यह भवन बच्चों के बैठने के लिए असुरक्षित हो गया था।  

बच्चों के भविष्य को देखते हुए लोगों द्वारा स्थानीय स्तर पर खाली पड़े मकानों में बैठने की व्यवस्था की गई थी जोकि नाकाफी थी।  जिसके चलते शिक्षकों को मजबूरन वर्षा शालिका में बच्चों को बिठाना पड़ रहा है। स्वतंत्रता सैनानी कल्याण समिति के अध्यक्ष  जय प्रकाश चौहान और पूर्व जिप सदस्य शकुंतला प्रकाश, देशराज शर्मा ने बताया कि  पिछले चार वर्षों से लगातार स्कूल की दुर्दशा बारे पूर्व व वर्तमान सरकार के साथ  काफी पत्राचार किया जा रहा था जिसके फलस्वरूप सरकार द्वारा 1.40 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई।

परंतु लोक निर्माण विभाग के लेटलतीफी होने के कारण इस भवन का निर्माण आज तक नहीं हो सका है। जय प्रकाश चौहान का कहना है कि लोक निर्माण विभाग मंडल कार्यालय राजगढ़ द्वारा स्कूल के नक्शे में कुछ संशोधन करके अनुमोदन के लिए शिमला भेजा गया था जोकि दो वर्ष बीत जाने पर भी स्वीकृत नहीं हुआ है और बच्चे रेन शल्टर में पढ़ाई करने को मजबूर है।

इनका कहना है कि बीते दो वर्षों से कोरोना महामारी के चलते स्कूल बंद रहे जिसके चलते बच्चों को रेन शल्टर मेें बैठने से राहत मिली। इनका आरोप है कि बीते पांच वर्षों में असुरक्षित भवन को गिराने की प्रक्रिया भी विभाग ने पूरी नहीं की। सहायक अभियंता लोक निर्माण उप मंडल हाब्बन रजनीश बंसल ने बताया कि संशोधित नक्शा शिमला मुख्यालय भेजा गया है और स्वीकृति मिलने पर स्कूल भवन का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। जिसके लिए सरकार द्वारा 1.40 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।

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