अपराध दर, जनसंख्या और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर होगा पुलिस थानों का पुनर्गठन
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी 135 पुलिस थानों को छह श्रेणियों में वर्गीकृत करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य कानून व्यवस्था को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाना और जनता को बेहतर सुरक्षा सेवाएं प्रदान करना है।
इस वर्गीकरण में विभिन्न महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखा गया है, जिनमें –
- जनसंख्या घनत्व
- भौगोलिक क्षेत्र
- अपराध दर
- वीआईपी मूवमेंट
- यातायात प्रबंधन
- अंतरराज्यीय सीमाओं की निकटता
- पर्यटन स्थलों की सुरक्षा
शामिल हैं। इससे पुलिस व्यवस्था अधिक संगठित होगी और कानून व्यवस्था को लागू करने में अधिक प्रभावशीलता आएगी।
छह श्रेणियों में होंगे पुलिस थाने, अपराध के आधार पर किया गया वर्गीकरण
प्रदेश सरकार ने वार्षिक अपराध पंजीकरण की संख्या के आधार पर पुलिस थानों को ए प्लस से ई तक कुल छह श्रेणियों में बांटा है।
- ए प्लस श्रेणी – ऐसे पुलिस थाने, जहां 250 से अधिक वार्षिक अपराध दर्ज होते हैं। प्रदेश में इस श्रेणी के 15 पुलिस थाने चिन्हित किए गए हैं।
- ए श्रेणी – 5 पुलिस थानों को इस श्रेणी में रखा गया है।
- बी श्रेणी – 25 पुलिस थानों को शामिल किया गया है।
- सी श्रेणी – 47 पुलिस थाने इस श्रेणी में होंगे।
- डी श्रेणी – 28 पुलिस थानों को इस वर्ग में रखा गया है।
- ई श्रेणी – 15 पुलिस थानों को इस सूची में शामिल किया गया है।
प्रत्येक श्रेणी के पुलिस थानों में कर्मियों की संख्या होगी निर्धारित
राज्य सरकार ने हर श्रेणी के पुलिस थानों में कर्मियों की संख्या भी तय कर दी है, जिससे पुलिस बल की सही ढंग से तैनाती सुनिश्चित की जा सके।
- ए प्लस श्रेणी के पुलिस थानों में कम से कम 70 पुलिस कर्मी तैनात किए जाएंगे।
- ए श्रेणी में 65 पुलिसकर्मी होंगे।
- बी श्रेणी के पुलिस थानों में 48 कर्मी होंगे।
- सी श्रेणी में 37 पुलिसकर्मी रहेंगे।
- डी श्रेणी में 25 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।
- ई श्रेणी में 19 पुलिसकर्मी कार्यरत होंगे।
इसके अलावा, प्रत्येक थाने में जांच अधिकारियों की संख्या एफआईआर दर्ज होने की आवृत्ति के आधार पर तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने दिए तैनाती के निर्देश, पुलिस बल की कार्यक्षमता होगी मजबूत
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि नए वर्गीकरण के अनुसार पुलिस थानों में बल की तैनाती जल्द से जल्द की जाए। इस रणनीति के तहत अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और कानून व्यवस्था को और अधिक सख्ती से लागू किया जा सकेगा।
इस पहल से पुलिस की कार्यकुशलता में वृद्धि होगी, जिससे राज्य में जनता को अधिक सुरक्षित और प्रभावी पुलिस सेवाएं मिलेंगी।

