आयुर्वेद अपनाकर स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ें विद्यार्थी : राजेश ठाकुर
पनोग स्कूल में मनाया 11वां राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस, योग-प्राणायाम के साथ नशे और जंक फूड से दूर रहने का दिया संदेश
पनोग
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पनोग में आयुष विभाग की ओर से 11वां राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया गया। आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) पनोग के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आयुर्वेद, योग, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला आयुष अधिकारी डॉ. जसप्रीत कौर एवं उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप शर्मा के दिशा-निर्देशों तथा शिक्षा विभाग पनोग के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रभारी गोपाल पोजटा रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर तथा भगवान धन्वंतरि की आराधना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने ओम का उच्चारण किया। मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को आयुर्वेद दिवस के इतिहास और महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि आयुर्वेद स्वस्थ जीवन के लिए आहार, औषधि, जीवनशैली, योग और प्राकृतिक नियमों के पालन पर जोर देता है।
विद्यार्थियों को बताए आयुर्वेद के मूल सिद्धांत
आयुष्मान आरोग्य मंदिर पनोग के आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारी राजेश ठाकुर ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है। उन्होंने आयुर्वेद के मूल सिद्धांत “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनं च” के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली का महत्व समझाया।
राजेश ठाकुर ने वात, पित्त और कफ के संतुलन, उचित आहार और नियमित दिनचर्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर उठना, व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित व्यायाम एवं योग, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और मानसिक संयम स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने ऋतुचर्या की जानकारी देते हुए बताया कि मौसम के बदलाव के साथ शरीर में होने वाले परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए आहार-विहार में भी आवश्यक बदलाव करना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग के आठ अंगों—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, अनियमित नींद, पढ़ाई का तनाव और शारीरिक निष्क्रियता बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में योग और प्राणायाम एकाग्रता, अनुशासन और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
जंक फूड और नशे से दूर रहने का संदेश
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया। उन्हें स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थ, दालें, अनाज, हरी सब्जियां, फल, दूध एवं पर्याप्त पानी को आहार में शामिल करने की सलाह दी गई। साथ ही जंक फूड के अत्यधिक सेवन से होने वाले नुकसान बताते हुए तले हुए, अधिक नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने का संदेश दिया गया।
राजेश ठाकुर ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थ शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने साथियों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों ने किया योग और प्राणायाम
कार्यक्रम के अंत में आयुष विभाग के योग गाइड बलदेव धामटा ने एनएसएस विद्यार्थियों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम करवाए। विद्यार्थियों ने अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका और शीतली प्राणायाम के साथ पद्मासन, वज्रासन, गोमुखासन, शीर्षासन और मालासन का अभ्यास किया। इस दौरान विद्यार्थियों को योग एवं प्राणायाम की सही विधि तथा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार अभ्यास करने के महत्व की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर शिक्षिकाएं कौशल्या पोजटा, रीना शर्मा, इंदर पोजटा, काजल पोजटा, निर्मला पोजटा, आयुष विभाग से धर्म सिंह सहित विद्यालय के शिक्षकगण और एनएसएस विद्यार्थी मौजूद रहे।