बिलासपुर में एआई आधारित मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम की होगी शुरुआत, मुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन
बिलासपुर जिला प्रशासन ने एआई सक्षम ‘सोटॉक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम’ की खरीद प्रक्रिया शुरू की है। प्रशासन के अनुसार यह प्रणाली मादक पदार्थों की मौके पर जांच कर कम समय में परिणाम उपलब्ध कराने में सक्षम होगी। इससे जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, सटीक और वैज्ञानिक आधार पर संचालित करने में मदद मिलेगी।
बिलासपुर
मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम की खरीद प्रक्रिया शुरू
बिलासपुर जिला प्रशासन ने उन्नत ‘सोटॉक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम’ की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि यह प्रणाली लगभग 19 लाख रुपये की लागत से जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफटी) के माध्यम से खरीदी जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के स्तर पर इसके उद्घाटन की संभावना है। प्रशासन के अनुसार यह पहल जिले में मादक पदार्थों की मौके पर जांच की क्षमता को मजबूत करेगी और जांच प्रक्रिया को अधिक तेज तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगी।
पांच मिनट में जांच परिणाम देने में सक्षम
प्रशासन के अनुसार यह पोर्टेबल प्रणाली लार के नमूने के आधार पर मादक पदार्थों की मौजूदगी की जांच कर लगभग पांच मिनट में परिणाम उपलब्ध करा सकती है। यह मेथामफेटामीन (चिट्टा), एम्फेटामाइन, बेंजोडायजेपाइन, कैनबिस (टीएचसी), कोकीन और अफीम सहित छह प्रमुख श्रेणियों के मादक पदार्थों की पहचान करने में सक्षम है। अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक से मौके पर प्रारंभिक जांच संभव होगी, जिससे संदिग्ध मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए समय की बचत होगी।
राज्य का पहला जिला बनेगा बिलासपुर
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि बिलासपुर इस तकनीक का उपयोग करने वाला हिमाचल प्रदेश का पहला जिला होगा। प्रारंभिक चरण में एक उपकरण स्थापित किया जाएगा और उसके उपयोग, सटीकता तथा कार्यप्रणाली के मूल्यांकन के आधार पर आगे अतिरिक्त उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से जिला स्तर पर जांच की क्षमता बढ़ेगी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को त्वरित तकनीकी सहायता मिलेगी।
एआई आधारित विश्लेषण से मिलेगी सहायता
इस प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित विश्लेषण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। जांच से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से मादक पदार्थों के उपयोग, संभावित संवेदनशील क्षेत्रों और तस्करी के तरीकों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रशासन के अनुसार इन आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रवृत्तियों की पहचान की जा सकेगी और संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की जाएगी। इससे तथ्यों पर आधारित योजना बनाने और कार्रवाई को अधिक लक्षित करने में सहायता मिलेगी।