Category: Monthly Fast

  • Chaitra Month Vrat Tyohar: रंग पंचमी से लेकर हनुमान जयंती तक, चैत्र महीने में हैं ये प्रमुख व्रत-त्योहार, देखें लिस्ट

    Chaitra Month Vrat Tyohar: रंग पंचमी से लेकर हनुमान जयंती तक, चैत्र महीने में हैं ये प्रमुख व्रत-त्योहार, देखें लिस्ट

    Chaitra Month Vrat Tyohar: चैत्र के महीने में रंग पंचमी, नवरात्रि और हनुमान जयंती जैसे कई प्रमुख त्योहार आएंगे। यहां देखें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की लिस्ट।

    Chaitra Month Vrat Tyohar: चैत्र हिंदू पंचांग का प्रथम माह है। हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इसलिए चैत्र को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र महीना माना जाता है। इस माह में रंग पंचमी, नवरात्रि और हनुमान जयंती जैसे प्रमुख त्योहार भी आते हैं। साथ ही इस महीने में रखे जाने वाले एकादशी व्रत का भी अपना अलग महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि सृष्टि के रचियता ब्रह्मा जी ने इसी माह में सृष्टि की रचना की थी। इस महीने व्रत रखने और ईश्वर का ध्यान करने से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं चैत्र के महीने में आने वाले सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों के बारे में। 

    चैत्र माह 2025

    चैत्र माह की शुरुआत कृष्ण प्रतिपदा तिथि यानि 15 मार्च से होगी। वहीं इस महीने का समापन चैत्र पूर्णिमा के दिन 12 अप्रैल को होगा। इसी महीने में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का पावन पर्व नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होगा। 

    चैत्र माह 2025 व्रत त्योहार

    • चैत्र माह प्रारंभ– 15 मार्च 2025
    • भ्रातृ द्वितीया- 16 मार्च 2025 
    • भालचद्र संकष्टी चतुर्थी- 17 मार्च 2025 
    • रंग पंचमी- 19 मार्च 2025
    • शीतला सप्तमी- 21 मार्च 2025
    • शीतला अष्टमी, कालाष्टमी- 22 मार्च 2025 
    • पापमोचिनी एकादशी- 25 मार्च 2025  
    • प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि- 27 मार्च 2025
    • सूर्य ग्रहण, अमावस्या- 29 मार्च 2025
    • गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष प्रारंभ- 30 मार्च 2025
    • रामनवमी- 06 अप्रैल 2025 
    • कामदा एकादशी- 08 अप्रैल 2025
    • चैत्र पूर्णिमा, हनुमान जयंती- 12 अप्रैल 2025

    हिंदू नववर्ष

    चैत्र महीने में 30 मार्च से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी। इस साल हिंदू नववर्ष 2028 शुरू होगा। इसी दिन से माता के नौ रूपों की पूजा भी की जाती है। इस बार हिंदू नए साल की शुरुआत रविवार के दिन से हो रही है, इसलिए साल के राजा सूर्य होंगे। सूर्य के नववर्ष का राजा होने से राजनीतिक क्षेत्र में उथल-पुथल हो सकती है। वहीं किसानों के लिए भी समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। 

  • Magh Purnima 2025: आज माघी पूर्णिमा के दिन बस करें इस एक चालीसा का पाठ, नारायण स्वयं बनाएंगे सभी बिगड़े काम

    Magh Purnima 2025: आज माघी पूर्णिमा के दिन बस करें इस एक चालीसा का पाठ, नारायण स्वयं बनाएंगे सभी बिगड़े काम

    माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। माना गया है कि इस दिन नारायण जल में वास करते हैं।

    Magh Purnima Puja: माघ पूर्णिमा का सुबह से ही स्नान चल रहा है, लाखों की संख्या में श्रद्धालु संगम तट व अन्य नदियों के तट पर जमकर स्नान-दान करने में लगे हुए हैं। स्नान के बाद लोगों को भगवान सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए। साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। साथ ही भगवान विष्णु की चालीसा का पाठ भी करना चाहिए क्योंकि नारायण को जगत का पालनहार कहा गया है। 

    माना जाता है कि भगवान विष्णु की उपासना से भक्तों के सभी दुख-पीड़ा खत्म हो जाते हैं। साथ ही धन-धान्य की भी कोई कमी नहीं रहती है और सदैव भगवान की कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए पढ़ते हैं विष्णु चालीसा…

    श्री विष्णु चालीसा 

    दोहा

    विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।

    कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।।

    नमो विष्णु भगवान खरारी। कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥
    प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी। त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
    सुन्दर रूप मनोहर सूरत। सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥
    तन पर पीतांबर अति सोहत। बैजन्ती माला मन मोहत॥
    शंख चक्र कर गदा बिराजे। देखत दैत्य असुर दल भाजे॥
    सत्य धर्म मद लोभ न गाजे। काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
    संतभक्त सज्जन मनरंजन। दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥
    सुख उपजाय कष्ट सब भंजन। दोष मिटाय करत जन सज्जन॥
    पाप काट भव सिंधु उतारण। कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥
    करत अनेक रूप प्रभु धारण। केवल आप भक्ति के कारण॥
    धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा। तब तुम रूप राम का धारा॥
    भार उतार असुर दल मारा। रावण आदिक को संहारा॥
    आप वराह रूप बनाया। हरण्याक्ष को मार गिराया॥
    धर मत्स्य तन सिंधु बनाया। चौदह रतनन को निकलाया॥
    अमिलख असुरन द्वंद मचाया। रूप मोहनी आप दिखाया॥
    देवन को अमृत पान कराया। असुरन को छवि से बहलाया॥
    कूर्म रूप धर सिंधु मझाया। मंद्राचल गिरि तुरत उठाया॥
    शंकर का तुम फन्द छुड़ाया। भस्मासुर को रूप दिखाया॥
    वेदन को जब असुर डुबाया। कर प्रबंध उन्हें ढूंढवाया॥
    मोहित बनकर खलहि नचाया। उसही कर से भस्म कराया॥
    असुर जलंधर अति बलदाई। शंकर से उन कीन्ह लडाई॥
    हार पार शिव सकल बनाई। कीन सती से छल खल जाई॥
    सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी। बतलाई सब विपत कहानी॥
    तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी। वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥
    देखत तीन दनुज शैतानी। वृन्दा आए तुम्हें लपटानी॥
    हो स्पर्श धर्म क्षति मानी। हना असुर उर शिव शैतानी॥
    तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे। हिरणाकुश आदिक खल मारे॥
    गणिका और अजामिल तारे। बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥
    हरहु सकल संताप हमारे। कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥
    देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे। दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥

  • एकादशी के दिन करें विष्णु चालीसा पाठ, बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा

    एकादशी के दिन करें विष्णु चालीसा पाठ, बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा

    सनातन धर्म में जया एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से विष्णु चालीसा का पाठ करने से भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं इस वर्ष जया एकादशी कब पड़ रही है, इसका महत्व और विष्णु चालीसा के पाठ का लाभ।


    जया एकादशी 2025: तिथि और शुभ संयोग

    📅 तिथि: माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी
    🕰️ तिथि प्रारंभ: 7 फरवरी 2025, शुक्रवार रात 9:26 बजे
    🕰️ तिथि समाप्ति: 8 फरवरी 2025, शनिवार रात 8:15 बजे
    📌 व्रत पालन की तिथि: 8 फरवरी 2025 (उदयातिथि के अनुसार)

    🔹 इस वर्ष के खास योग

    • 🌟 मृगशिरा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग
    • इन शुभ योगों में विष्णु चालीसा का पाठ करना अत्यधिक लाभकारी माना जाता है।
    • इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता मिलती है।

    🔱 जया एकादशी का महत्व

    1️⃣ मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति जया एकादशी का व्रत रखता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे मृत्यु के बाद बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

    2️⃣ पापों से मुक्ति और मोक्ष

    पुराणों में कहा गया है कि इस दिन व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    3️⃣ सफलता और सुख-समृद्धि

    इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।


    📖 विष्णु चालीसा पाठ का महत्व

    जया एकादशी पर विष्णु चालीसा का पाठ करने से:
    ✅ भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
    ✅ जीवन में सभी तरह की नकारात्मकता दूर होती है।
    ✅ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
    ✅ सभी कार्य सफल होते हैं और बाधाएं दूर होती हैं।

    🛕 विष्णु चालीसा पाठ करने की विधि

    1️⃣ प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    2️⃣ भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।
    3️⃣ चंदन, फूल और तुलसी पत्र अर्पित करें।
    4️⃣ संकल्प लेकर विष्णु चालीसा का पाठ करें।
    5️⃣ अंत में भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

    विष्णु चालीसा

    दोहा

    विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाए।

    कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताए॥

    चौपाई

    नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी।
    प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
    सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत।
    तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजंती माला मन मोहत॥
    शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे।
    सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
    सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन।
    सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन॥
    पाप काट भव सिंधु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण।
    करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण॥
    धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा।
    भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा॥
    आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया।
    धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया॥
    अमिलख असुरन द्वंद मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया।
    देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया॥
    कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया।
    शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया॥
    वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुंढवाया।
    मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया॥
    असुर जलंधर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई।
    हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई॥
    सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी।
    तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृंदा की सब सुरति भुलानी॥
    देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आए तुम्हें लपटानी।
    हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी॥


    जया एकादशी 2025 पर व्रत रखने और विष्णु चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता आती है। इस खास दिन को पूरी श्रद्धा के साथ मनाएं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

  • जया और विजया एकादशी 2025: जानें जया एकादशी कब है और विजया एकादशी कब है, साथ ही जानें सही मुहूर्त और महत्व

    जया और विजया एकादशी 2025: जानें जया एकादशी कब है और विजया एकादशी कब है, साथ ही जानें सही मुहूर्त और महत्व

    फरवरी 2025 में दो प्रमुख एकादशी तिथियां आने वाली हैं – जया एकादशी और विजया एकादशी। ये दोनों तिथियां भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती हैं और हिंदू धर्म में इनका विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन एकादशी तिथियों पर व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं इनका सही दिन, शुभ मुहूर्त और महत्व।


    जया एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

    📅 तिथि: माघ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी
    🕰️ प्रारंभ: 7 फरवरी 2025, शुक्रवार रात 9:26 बजे
    🕰️ समाप्ति: 8 फरवरी 2025, शनिवार रात 8:15 बजे
    📌 व्रत पालन की तिथि: 8 फरवरी 2025 (उदयातिथि के अनुसार)
    🕰️ पारण का समय: 9 फरवरी 2025, सुबह 7:04 से 9:17 तक

    🔹 जया एकादशी का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी व्रत रखने से जातक को भूत-प्रेत बाधाओं और नीच योनियों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और ब्राह्मणों को भोजन कराने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे यश-वैभव की प्राप्ति होती है।


    विजया एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

    📅 तिथि: फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी
    🕰️ प्रारंभ: 23 फरवरी 2025, रविवार दोपहर 1:55 बजे
    🕰️ समाप्ति: 24 फरवरी 2025, सोमवार दोपहर 1:44 बजे
    📌 व्रत पालन की तिथि: 24 फरवरी 2025 (उदयातिथि के अनुसार)
    🕰️ पारण का समय: 25 फरवरी 2025, सुबह 6:50 से 9:08 तक

    🔹 विजया एकादशी का महत्व

    विजया एकादशी का नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलती है और जीवन में विजय प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से सभी प्रकार की बाधाओं से छुटकारा मिलता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


    कैसे करें जया और विजया एकादशी व्रत?

    1️⃣ स्नान और संकल्प:

    • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

    2️⃣ भगवान विष्णु की पूजा:

    • तुलसी, फल, पंचामृत और दीप जलाकर श्री हरि की आराधना करें।

    3️⃣ भजन-कीर्तन:

    • पूरे दिन भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें और आध्यात्मिक ग्रंथों का पाठ करें।

    4️⃣ दान-पुण्य:

    • ब्राह्मणों को भोजन कराएं और जरूरतमंदों को दान दें।

    5️⃣ पारण का समय:

    • अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।

    निष्कर्ष

    जया और विजया एकादशी हिंदू धर्म में अत्यधिक शुभ तिथियां मानी जाती हैं। ये तिथियां न केवल आध्यात्मिक उन्नति देती हैं, बल्कि जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि भी प्रदान करती हैं। यदि आप जीवन में सफलता और शांति चाहते हैं, तो इन एकादशियों का व्रत पूरी श्रद्धा और नियमों के अनुसार अवश्य करें।

    📌 आप इन एकादशियों पर व्रत रखने वाले हैं? कमेंट में जरूर बताएं! 🚩

  • प्रदोष व्रत / कब है इस साल का पहला रवि प्रदोष? जानें शुभ मुहूर्त और जानें किन चीज़ो के दान से होंगे सभी कष्ट दूर

    प्रदोष व्रत / कब है इस साल का पहला रवि प्रदोष? जानें शुभ मुहूर्त और जानें किन चीज़ो के दान से होंगे सभी कष्ट दूर

    फरवरी 2025 में माघ माह का दूसरा प्रदोष व्रत 9 फरवरी, रविवार को पड़ रहा है, जिसे रवि प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

    🔹 प्रदोष व्रत 2025 शुभ मुहूर्त:

    • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 9 फरवरी, शाम 07:25 बजे
    • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 10 फरवरी, शाम 06:57 बजे
    • शिव पूजा का शुभ मुहूर्त: 9 फरवरी, शाम 7:00 बजे से रात 8:42 बजे तक

    प्रदोष व्रत पर क्या करें दान?

    व्रत और पूजा के बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से कष्टों का नाश होता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं, इस दिन किन चीजों का दान करना शुभ माना जाता है—

    1. अनाज का दान

    अगर कोई जातक रवि प्रदोष व्रत कर रहा है तो उसे गरीबों को अनाज दान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती और परिवार में समृद्धि बनी रहती है। इस दिन चावल, गेहूं और दाल दान करना विशेष शुभ माना जाता है।

    2. सफेद मिठाई का दान

    भगवान शिव को सफेद रंग की मिठाइयां जैसे रसगुल्ला, पेड़ा, या दूध से बनी मिठाई प्रिय होती हैं। व्रत के दिन जरूरतमंदों को सफेद मिठाई का दान करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    3. पौधे का दान

    यदि कोई जातक ग्रह दोष से परेशान है, तो उसे इस दिन किसी को पौधा दान करना चाहिए। ऐसा करने से ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं और जीवन में खुशहाली लौट आती है। विशेष रूप से तुलसी, पीपल या बेलपत्र का पौधा दान करना शुभ माना जाता है।

    4. वस्त्र दान

    इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। विशेष रूप से सफेद या पीले रंग के वस्त्र दान करना अधिक शुभ माना जाता है।

    🔔 निष्कर्ष

    प्रदोष व्रत के दिन पूजा और दान का विशेष महत्व है। अनाज, मिठाई, पौधे और वस्त्र दान करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जातक के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। इस शुभ अवसर पर व्रत का पालन करें और पुण्य अर्जित करें।

    🔹 शिव कृपा प्राप्त करने के लिए इस प्रदोष व्रत पर दान अवश्य करें! 🙏

  • षटतिला एकादशी 2025 / माघ मास की षटतिला एकादशी कब है? पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

    षटतिला एकादशी 2025 / माघ मास की षटतिला एकादशी कब है? पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

    षटतिला एकादशी 2025: माघ माह में होने वाला महत्वपूर्ण व्रत

    Shattila Ekadashi 2025 का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिससे व्यक्ति को अनेक लाभ और पुण्य मिलता है। 2025 में यह व्रत 25 जनवरी को मनाया जाएगा। जानें षटतिला एकादशी के व्रत का महत्व, पूजा का शुभ मुहूर्त, और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों के बारे में।

    षटतिला एकादशी का महत्व

    षटतिला एकादशी का व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। इस दिन तिल का विशेष महत्व है, जिससे इस व्रत का नाम “षटतिला” पड़ा है। तिल का दान, स्नान, भोजन, पान, हवन और लेपन करना इस दिन के प्रमुख कार्य होते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन तिल का दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

    षटतिला एकादशी पूजा मुहूर्त और शुभ समय

    Shattila Ekadashi 2025 का व्रत 24 जनवरी की शाम 7:25 बजे से शुरू होगा और 25 जनवरी की रात 8:31 बजे समाप्त होगा। इस दिन का पूजा मुहूर्त 25 जनवरी को सुबह 5:30 बजे से लेकर 9:00 बजे तक रहेगा। व्रत का पारण 26 जनवरी को सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे तक किया जाएगा, जो कि शुभ और फलदायक माना जाता है।

    षटतिला एकादशी व्रत के लाभ

    षटतिला एकादशी का व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, पवित्रता, धन और संतोष की प्राप्ति कराता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन तिल का दान करने से व्यक्ति को स्वर्ग में स्थान मिलता है। इसके अलावा, तिल और जल ग्रहण करने से शरीर के दोष दूर होते हैं और ग्रह नक्षत्रों के शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।


  • Masik Shivratri 2025: माघ मासिक शिवरात्रि कब है? जानें पूरे साल की तिथियां

    Masik Shivratri 2025: माघ मासिक शिवरात्रि कब है? जानें पूरे साल की तिथियां

    Masik Shivratri का महत्व
    मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri 2025) हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के पवित्र बंधन का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। मासिक शिवरात्रि व्रत (Masik Shivratri Vrat) को सभी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-शांति लाने वाला माना गया है।


    मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व

    1. Masik Shivratri Vrat शिव भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है।
    2. भगवान शिव का गंगाजल, शहद और सुगंधित जल से अभिषेक करने से विशेष फल मिलता है।
    3. अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत शुभ और योग्य जीवनसाथी प्राप्त करने में सहायक है।
    4. विवाहित महिलाओं का दांपत्य जीवन इस व्रत से और अधिक सुखमय बनता है।
    5. मासिक शिवरात्रि व्रत आपको आत्म-संयम और इंद्रियों को नियंत्रण में रखने में मदद करता है।

    2025 में मासिक शिवरात्रि की तिथियां (Masik Shivratri 2025 Date List)

    महीनाMasik Shivratri तिथि और दिन
    माघ27 जनवरी 2025, सोमवार
    फाल्गुन (महाशिवरात्रि)26 फरवरी 2025, बुधवार
    चैत्र27 मार्च 2025, बृहस्पतिवार
    वैशाख26 अप्रैल 2025, शनिवार
    ज्येष्ठ25 मई 2025, रविवार
    आषाढ़23 जून 2025, सोमवार
    श्रावण23 जुलाई 2025, बुधवार
    भाद्रपद21 अगस्त 2025, बृहस्पतिवार
    आश्विन19 सितंबर 2025, शुक्रवार
    कार्तिक19 अक्टूबर 2025, रविवार
    मार्गशीर्ष18 नवंबर 2025, मंगलवार
    पौष18 दिसंबर 2025, बृहस्पतिवार

    Masik Shivratri 2025 पर कैसे करें पूजा

    1. सुबह स्नान कर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, और शहद अर्पित करें।
    2. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और भगवान शिव का ध्यान करें।
    3. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर उन्हें प्रसाद चढ़ाएं।
    4. मासिक शिवरात्रि व्रत के दौरान सात्विक आहार ग्रहण करें और उपवास रखें।

    Masik Shivratri के अद्भुत लाभ

    • आध्यात्मिक शांति: इस व्रत से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति आती है।
    • सुखद दांपत्य जीवन: विवाहित महिलाओं के लिए मासिक शिवरात्रि व्रत सुखद और खुशहाल दांपत्य जीवन का प्रतीक है।
    • पारिवारिक समृद्धि: भगवान शिव की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

    मासिक शिवरात्रि 2025 (Masik Shivratri 2025) के शुभ अवसरों पर भगवान शिव की आराधना से आप जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं। हर महीने की Masik Shivratri Vrat तिथि याद रखें और इस पावन व्रत का पालन कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें।

    Related Posts You Should Read

    1. माघ मास 2025: महत्व और व्रत-त्योहार
      जानें माघ महीने के महत्व, त्योहारों और व्रतों की पूरी जानकारी।
      माघ मास 2025 का महत्व और व्रत-त्योहार
    2. मौनी अमावस्या 2025: कब है?
      मौनी अमावस्या की तिथि, महत्व और इस दिन के खास पूजा-विधानों की जानकारी।
      मौनी अमावस्या 2025 की पूरी जानकारी
    3. महाशिवरात्रि 2025 विशेष: पूजा विधि और तिथि
      जानें महाशिवरात्रि 2025 का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।
      महाशिवरात्रि 2025 विशेष
  • मासिक शिवरात्रि / 29 दिसंबर को साल की आखिरी मासिक शिवरात्रि, जानें पूजा का मुहूर्त, विधि और महत्व

    मासिक शिवरात्रि / 29 दिसंबर को साल की आखिरी मासिक शिवरात्रि, जानें पूजा का मुहूर्त, विधि और महत्व

    मासिक शिवरात्रि 2024 का महत्व

    मासिक शिवरात्रि, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, इस वर्ष 29 दिसंबर को विशेष रूप से मनाई जाएगी। यह दिन साल 2024 की आखिरी मासिक शिवरात्रि होगा। मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से मानसिक, पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह दिन नए साल में भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ प्रवेश करने का भी अवसर प्रदान करता है। आइए जानते हैं इस दिन पूजा का सही मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में।


    मासिक शिवरात्रि 2024 का शुभ मुहूर्त

    मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होता है। 29 दिसंबर को पौष कृष्ण चतुर्दशी तिथि है, जो सुबह 3:32 बजे से शुरू होकर 30 दिसंबर को सुबह 4:01 बजे तक चलेगी।

    • शिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त:
      पूजा के लिए सबसे शुभ समय रात्रि 11:56 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा। इस समय में 55 मिनट का मुहूर्त है, जब विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

    मासिक शिवरात्रि पूजा विधि

    मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा विधि को बहुत ही श्रद्धा और शुद्धता के साथ करना चाहिए।

    1. प्रात:काल स्नान और ध्यान:
      सबसे पहले प्रात:काल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    2. भगवान सूर्य को जल अर्पित करें:
      फिर सूर्यदेव को जल अर्पित करें ताकि आपके जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता बनी रहे।
    3. मंदिर की शुद्धि:
      इसके बाद, अगर आप मंदिर में पूजा कर रहे हैं तो उसे गंगाजल से शुद्ध करें।
    4. शिव पूजा की शुरुआत:
      अब भगवान शिव की पूजा शुरू करें और उन्हें कच्चा दूध, बेलपत्र, गंगाजल, धतूरा, भांग, धूप-दीप, फल, फूल, और मिठाई अर्पित करें।
    5. दीपक और चालीसा:
      शिवजी के सामने घी का दीपक जलाएं और शिव चालीसा का पाठ करें।
    6. मंत्र जाप:
      साथ ही, शिवजी के मंत्रों का जप भी करें।
    7. प्रसाद वितरण:
      अंत में, भगवान शिव को प्रसाद का भोग लगाएं और अन्य लोगों में भी इसे वितरित करें।
    8. माता पार्वती की पूजा:
      इस दिन माता पार्वती की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की पूजा से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

    मासिक शिवरात्रि का महत्व

    मासिक शिवरात्रि का व्रत भक्तों के लिए बहुत लाभकारी होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से उनकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    • वैवाहिक जीवन में सुख:
      अगर किसी का विवाह नहीं हो पा रहा है या वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ रही हैं, तो मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से इन समस्याओं का समाधान हो सकता है।
    • आध्यात्मिक उन्नति:
      जो लोग आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हैं, वे भी इस दिन का व्रत करके अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकते हैं। शिवरात्रि का व्रत उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
    • भगवान शिव की कृपा:
      मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन को खुशहाल और शांतिपूर्ण बनाती है।

    साल 2024 की आखिरी मासिक शिवरात्रि 29 दिसंबर को है, और यह दिन भगवान शिव के आशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति पाने का बेहतरीन अवसर है। इस दिन पूजा का सही मुहूर्त और विधि को जानकर श्रद्धापूर्वक व्रत रखें और नए साल में भगवान शिव के आशीर्वाद से अपने जीवन की शुरुआत करें।