अवैध रूप से चल रही बार में परोसी जा रही नंबर दो की शराब
HNN/ नाहन
राज्य कर एवं आबकारी विभाग जिला सिरमौर और पुलिस की नजरों में धूल झोंकते हुए कोलर में अवैध शराब का कारोबार जमकर फल-फूल रहा है। यही नहीं इस क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित हो रही बार में अवैध शराब भी बेची जा रही है।
शराब के इस अवैध कारोबार के चलते ना केवल सरकार के राजस्व को चूना लग रहा है बल्कि महंगे दामों पर इस यूनिट को संचालित करने वाले ठेकेदार को भी भारी नुक्सान उठाना पड़ रहा है।
शराब कारोबारी नितिन चौहान ने बताया कि अवैध रूप से बेची जा रही शराब के कारण उनकी सेल बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जानकारी तो यह है कि यह अवैध शराब का कारोबार एक प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है।
आरोप तो यहां तक है कि किया जा रहा अवैध शराब का कारोबार संबंधित क्षेत्र पुलिस अधिकारी की नजर अंदाजी के कारण फल फूल रहा है। सूत्रों की माने तो कथित अवैध शराब कारोबारी डिमांड के अनुसार होम डिलीवरी तक देने में भी गुरेज नहीं करता है।
हैरानी तो इस बात की यह है कि इस अवैध कारोबारी की शराब कई बार पकड़ी भी जा चुकी है बावजूद इसके प्रशासन और पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए बा दस्तूर हरियाणा राज्य की शराब बेची जा रही है।
उधर, राज्य कर एवं आबकारी विभाग जिला सिरमौर के उप आयुक्त हिमांशु का कहना है कि उनके द्वारा इस क्षेत्र में किसी को भी बार लाइसेंस नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के द्वारा बार लाइसेंस के लिए अप्लाई किया गया था उसके पर दर्ज कई मामलों के चलते अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि अवैध शराब का कारोबार करने वाले और अवैध बार चलाने वाले प्रभावशालीयों को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा।
हिमाचल प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग का नाहन फाउंड्री में निर्माणाधीन एडवांस टेक्नोलॉजी का ऑडिटोरियम 2024 में जनता को समर्पित होगा। यह वायदा मंगलवार को नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने निर्माणाधीन भवन के निरीक्षण के दौरान किया।
इस दौरान उनके साथ प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रूपेंद्र ठाकुर, जिला कांग्रेस महामंत्री नरेंद्र तोमर, मंडल अध्यक्ष ज्ञान चौधरी आदि भी शामिल रहे। विधायक अजय सोलंकी ने निर्माणाधीन रंगशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने किए जा रहे कार्य पर संतुष्टि जताते हुए अधिकारियों और ठेकेदार को वर्ष 2024 से पहले पहले कार्य कंप्लीट करने के लिए भी कहा।
इस मौके पर मीडिया से रूबरू होते हुए सोलंकी ने कहा कि भाषा एवं संस्कृति विभाग का यह इनडोर ऑडिटोरियम जिला के लिए बड़ी सौगात होगी। उन्होंने बताया कि इस भवन की आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के द्वारा रखी गई थी। उन्होंने हैरानी भी जताते हुए कहा कि पूर्व में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार 5 साल में भी इस इंडोर ऑडिटोरियम का निर्माण कार्य पूरा नहीं कर पाई।
सोलंकी ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह साफ कहा है कि किसी भी तरह के निर्माण कार्य रुके नहीं। यही नहीं मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को खुद जाकर निरीक्षण भी करें। उन्होंने कहा कि नाहन में बनाया जा रहा भाषा एवं संस्कृति विभाग का यह ऑडिटोरियम अपने आप में एक एडवांस टेक्नोलॉजी से सुसज्जित भवन होगा।
उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य हमारी पहाड़ी बोलियों में छुपी अनमोल सांस्कृतिक विरासतों का उत्थान करना उसका संरक्षण तथा संवर्धन के लिए सांस्कृतिक सर्वेक्षण करना भी होगा। संस्कृति के उत्थान के लिए कार्यशाला ओं सेमिनार तथा संघ गोष्ठियों का आयोजन भी इंनडोर ऑडिटोरियम में किया जाया करेगा।
सोलंकी ने बताया कि हमारी पहचान हमारी संस्कृति है फिर चाहे वह खानपान से संबंधित हो या हमारे पहनावे से। उन्होंने बताया कि किस ऑडिटोरियम में ना केवल प्रदेश बल्कि अन्य प्रदेशों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ करेंगे। सोलंकी ने बताया कि एक दूसरे की संस्कृति का आदान-प्रदान भाईचारा सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का दिग्दर्शन होता है।
वहीं सोलंकी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि बनाए जा रहे ऑडिटोरियम में सिरमौर के लोहिया और डांगरा सहित नगाड़ों को भी विशेष पहचान दिलाई जाए। विधायक अजय सोलंकी ने बताया कि रंगशाला का निर्माण 88000 स्क्वायर फीट एरिया में किया जा रहा है। जिसमें दो ब्लॉक बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ए ब्लॉक के धरातल पर 50 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। उन्होंने बताया कि फर्स्ट फ्लोर में आर्ट गैलरी और उसके ऊपर 643 लोगों के बैठने के लिए आधुनिक तकनीक से युक्त ऑडिटोरियम होगा। वहीं बी ब्लॉक के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसके धरातल में पार्किंग तथा फर्स्ट फ्लोर में कैंटीन तथा उससे ऊपर मेल और फीमेल की अलग-अलग डोर मेट्री भी बनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि डोर मेट्री में 30 30 लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी होगी। इसके अलावा रंगशाला में आने वाले लेखकों के लिए कलाकारों के लिए अलग से कमरों का निर्माण भी किया जा रहा है। बरहाल जहां ठेकेदार के द्वारा इस एडवांस टेक्नोलॉजी से युक्त इंनडोर रंगशाला का निर्माण किया जा रहा है उसका उस दौरान निर्माण बजट 8 करोड़ था।
पूर्व सरकार के समय कुछ क्लीयरेंस को लेकर इसके निर्माण में देरी भी हुई। अब इस देरी का बड़ा खामियाजा ठेकेदार को भुगतना पड़ सकता है क्योंकि उस समय निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाला मेटेरियल सस्ता था जबकि अब यह रेट कहीं ज्यादा बढ़ चुका है।
बावजूद इसके विधायक से मिले आश्वासन के बाद विधायक से मिले आश्वासन के बाद ठेकेदार ने भी स्पष्ट किया है कि जून 2024 तक तमाम निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस दौरान लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता अरविंद शर्मा, एसडीएम नाहन रजनेश कुमार, अधिशासी अभियंता दिनकर शर्मा, सहायक अभियंता आलोक जवनेजा तथा कनिष्ठ अभियंता रजत चौहान सहित निर्माण कंपनी के सीएमडी राजेश बंसल मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
एडीजे पांवटा साहिब की कोर्ट ने सुनाया फैसला लगाया ₹60000 का जुर्माना भी
HNN News नाहन पांवटा साहिब
सिरमौर के पोंटा साहिब में 14 मार्च 2016 को हुई महिला की हत्या में मुख्य अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास जबकि मामले में लिप्त दूसरे आरोपी को 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।
यह सजा माननीय एडिशनल जिला सत्र न्यायाधीश पोंटा साहिब के द्वारा सुनाई गई है। माननीय न्यायाधीश के द्वारा सुनाई गई सजा में आजीवन कारावास के साथ ₹60000 का जुर्माना भी लगाया गया है। जबकि 3 वर्ष के कारावास वाले आरोपी को ₹10000 का अर्थदंड लगाया गया है।
इस बाबत जानकारी देते हुए अतिरिक्त जिला न्याय वादी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि मामला वर्ष 2016 का है। 14 मार्च को पांवटा साहिब थाना में एक महिला का शव यमुना अंचल गली के खेत में मिला था।
इस ब्लाइंड मिस्त्री की तफ्तीश इंस्पेक्टर लाइक राम तथा सब इंस्पेक्टर दौलत राम की टीम ने संयुक्त रूप से की थी। महिला की हत्या को लेकर साक्ष्यों के आधार पर दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था।
24 गवाहों के दर्ज हुए बयान और सबूतों के आधार पर हुई दोष सिद्धि में माननीय अदालत के द्वारा सजा सुना दी गई। हत्या के मुख्य आरोपी किशोर क्षेत्री पुत्र स्वर्गीय राजेंद्र निवासी केंट नाहन तथा दूसरा आरोपी जावेद पुत्र खुर्शीद निवासी वार्ड नंबर 10 देवी नगर पांवटा साहिब के रहने वाले है। जिला न्याय वादी ने बताया कि जुर्माना न अदा करने की सूरत में 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
नई भर्तियों के लिए अब अलग-अलग विभागों में क्रियाशील पदों पर भी होगा फैसला
HNN News शिमला
हिमाचल प्रदेश में करार खत्म होने के बाद 17 सौ से अधिक आउटसोर्स कर्मी 31 मार्च को नौकरी से बाहर कर दिए गए थे। सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने इन्हें राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मामला 13 तारीख को होने वाली कैबिनेट में रखे जाने का फैसला लिया है।
असल में स्वास्थ्य विभाग में जो आउटसोर्स कर्मियों का मामला वित्त विभाग को भेजा था उसे वित्त विभाग ने सरकार को प्रेषित कर दिया है। जिसके बाद मामले को मंजूरी के लिए कैबिनेट हेतु विचाराधीन कर लिया गया है।
ऐसे में यदि कैबिनेट की मुहर आउटसोर्स कर्मियों के मामले पर लग जाती है तो यह सब सरकारी मुलाजिम बन जाएंगे। बता दें कि रेगुलर पदों की कमी के चलते और कोविड- काल के दौरान 1700 से भी अधिक आउटसोर्स कर्मियों को भर्ती किया गया था। यह भर्ती विभिन्न कंपनियों के माध्यम से की गई थी।
जिसमें स्टाफ नर्स फीमेल हेल्थ वर्कर पैरामेडिकल स्टाफ चपरासी डाटा एंट्री ऑपरेटर वगैरह शामिल थे। यही नहीं कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य विभाग के द्वारा करीब 2000 से अधिक कर्मचारियों को इमरजेंसी व्यवस्था के लिए भर्ती किया गया था। यह सभी कर्मचारी 2 साल से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं निष्ठा के साथ दे रहे थे।
अचानक बाहर किए जाने पर इन सब की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था। जिसको लेकर सरकार ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए इनको राहत पहुंचाने का फैसला लेने की सोची है। मामला असल में इसलिए भी बिगड़ा क्योंकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेगुलर स्टाफ भी भर्ती कर दिया गया था।
जिसके चलते आउटसोर्स कर्मियों की वजह से वित्तीय बोझ बढ़ गया था। यही वजह है कि इन्हें आगे सेवाओं के लिए बहाल करने को लेकर वित्तीय कारण बताए जा रहे थे। बरहाल सरकार की मंशा और नियत यह साफ इशारा करती है कि वह आउट सोर्स कर्मियों के विरोध में नहीं बल्कि उनको कैसे रीएंटर किया जाए इसको लेकर चिंतित है।
अपने गुरु द ग्रेट खली की तरह योगेश का सपना डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर बनने का
HNN/ हरिपुरधार
प्रदेश के सिरमौर की धरती ने जहां डब्ल्यूडब्ल्यूई जैसे रेसलर द ग्रेट खली को जन्म दिया है, तो वहीं इसी जिला के योगेश चौहान सुपर फाइटर बनकर उभरे हैं। सिरमौर के हरिपुरधार स्थित गांव घरडिया निवासी 27 वर्षीय योगेश चौहान ने वर्ल्ड टैग टीम चैंपियन जीत के बाद पहली बार अपने घर सिरमौर पहुंचा है। नाहन पहुंचने पर रेसलर का जोरदार स्वागत हुआ, तो वहीं सिरमौर के इस गबरू को उसकी इस बड़ी उपलब्धि पर विधायक अजय सोलंकी ने उसे बधाई दी।
योगेश ने वर्ल्ड टैग टीम के इंटरनेशनल चैंपियन्स सिंह जोशन तथा सरदार सिंह को पछाड़कर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती है। बता दें कि योगेश चौहान का बचपन से सपना था कि वह ग्रेट खली की तरह वर्ल्ड फाइट चैंपियन बने। योगेश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हरिपुरधार से करने के बाद सोलन से पॉलिटेक्निक में एडमिशन ले कर डिप्लोमा किया।
बड़ी बात तो यह है कि योगेश ने जब अपने माता-पिता से नौकरी की जगह रेसलिंग सीखने की इच्छा जताई तो उन्होंने उसे आशीर्वाद देकर सफल होने की कामना भी की। योगेश चौहान डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर द ग्रेट खली को अपना गुरु भी और आदर्श भी मानते हैं।
लिहाजा वह सिरमौर छोड़कर रेसलिंग सीखने के लिए जालंधर स्थित द ग्रेट खली की सीडब्ल्यूई एकेडमी में पहुंच गए। 3 साल तक अपने गुरु द ग्रेट खली उर्फ दिलीप सिंह से कड़ी मेहनत कर रेसलिंग के सुपर दाव सीखें। गुरु सेवा और कड़ी मशक्कत का नतीजा यह रहा कि हाल ही में हुई वर्ल्ड टैग टीम प्रतियोगिता में योगेश ने दोनों धुरंधरों को पकड़ते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप जीत ली।
योगेश प्रदेश का पहला ऐसा नवयुवक है जिसने बहुत कम समय में इस चैंपियनशिप को जीता है। फाइटर मैन योगेश चौहान ने अभी तक 110 से ज्यादा फाइट की है जिनमें से अधिकतर उन्होंने जीती भी हैं। अपनी इस उपलब्धि का वह सारा श्रेय अपने गुरु द ग्रेट खली और अपने माता-पिता को देते हैं।
योगेश ने बताया कि अब उसका एक ही सपना है कि वह अपने गुरु ग्रेट खली की तरह डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर बने और जीत का सेहरा अपने गुरु के सर बांधे। बताते हैं कि योगेश चौहान इतने चुस्त और फास्ट हैं कि वह कब अपने प्रतिद्वंदी को पटनी देदे पता भी नहीं चलता है।
उनकी तेजी और फाइट के दांव पेंचों की दक्षता के चलते उन्हें भारतीय वायु सेना का तेजस जेट भी कहा जाता है। योगेश चौहान ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत इरादे हो तो सपने भी साकार होते हैं। उन्होंने युवा वर्ग से अपील करते हुए कहा कि खेल स्वस्थ और उत्तम जीवन का मुख्य आधार है।
उन्होंने युवाओं से आग्रह करते हुए भी कहा की वह नशे से दूर रहें अगर नशा करना ही है तो खेल का करें और खेल खेल कर अपना अपने माता-पिता का अपने प्रदेश का और अपने देश का नाम रोशन करें।
जिला में कोरोना पॉजिटिव के 104 मामले, 3 मेडिकल कॉलेज कोविड वार्ड में एडमिट
HNN/ नाहन
जिला सिरमौर में वर्ष 2023 की कोरोना से पहली मौत दर्ज की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उपमंडल राजगढ़ के गांव नेहरटी भगोट निवासी 68 वर्षीय नरसिंह करीब 4 दिनों से नाहन मेडिकल कॉलेज के कोविड- वार्ड में एडमिट था। हालांकि मृतक व्यक्ति को हृदय और सांस संबंधी तकलीफ पहले से ही थी उसी के चलते मरीज को राजगढ़ करीब 5 दिन पहले एडमिट किया गया था।
राजगढ़ अस्पताल में हालत बिगड़ती देख नरसिंह को नाहन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। इलाज के दौरान ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर नरसिंह का कोरोना वायरस टेस्ट भी किया गया, जिसमें उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। नरसिंह को कोरोना वार्ड में एडमिट कर दिया गया था, जहां उसका इलाज चल रहा था।
मगर 8 अप्रैल सुबह 7:00 बजे शनिवार को कार्डिया आघात के चलते नरसिंह दुनिया को अलविदा कह गया। बताया जा रहा है कि नर्सिंग नेपाली मूल का है जो कि अपने परिवार सहित बचपन से ही पोस्ट ऑफिस जदोल टपरोली के नेहरटी भगोट में रह रहा था। जिला सिरमौर में सबसे अच्छी बात तो यह है कि कोरोना से मरने वाले व्यक्ति को उसके घर तक पहुंचाने के लिए राम सिंह जैसे समाज सेवक का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
समाज सेवक राम सिंह आज भी जैसे ही उसको कोरोना से हुई मौत का पता चला वह तुरंत एंबुलेंस के साथ अस्पताल पहुंच गया था। कोरोना वॉरियर्स की टीम के साथ राम सिंह मृतक का शव लेकर शमशान घाट नाहन की ओर रवाना हो गया था। बता दें कि मृतक का अंतिम संस्कार भी राम सिंह व साथ में गए मेडिकल कॉलेज के कोरोना वॉरियर्स के द्वारा ही नाहन में ही कर दिया गया है
बता दें कि जिला सिरमौर में मौजूदा समय कोरोना पॉजिटिव केस की संख्या 104 तक पहुंच चुकी है। जिनमें चार पेशेंट नाहन मेडिकल कॉलेज के कोविड- वार्ड में एडमिट थे। जिनमें से 68 वर्षीय नरसिंह की मौत हो गई है। वहीं सीएमओ जिला सिरमौर डॉ. अजय पाठक ने खबर की पुष्टि करी है। उन्होंने बताया कि मरीज पहले से ही अन्य बीमारियों से ग्रस्त था।
डॉ. पाठक ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना अभी भी काफी सक्रिय है। उन्होंने कहा कि लोग सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से परहेज करें यदि मजबूरन जाना भी पड़े तो मुंह पर मास्क जरूर लगाएं। डॉ. पाठक ने लोगों से यह भी अपील करी है कि यदि सर्दी-जुकाम आदि की शिकायत हो तो घर पर भी मास्क लगाकर रखें।
यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि समय रहते कोरोना का टेस्ट भी जरूर करावा लें। बरहाल इससे पहले की सरकार और प्रशासन को शक्ति के साथ कड़े नियम अपनाने पड़े। लोगों को चाहिए कि वे कोरोना प्रोटोकॉल के तहत तमाम नियमों का नैतिकता के साथ पालन करें।
हालांकि जिला सिरमौर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए मुकम्मल और बेहतर इंतजाम है। बावजूद इसके इन सब की जरूरत ना पड़े इसके लिए जरूरी है की फेस मास्क और अन्य नियमों का पालन भी किया जाना चाहिए।
सड़क सुरक्षा क्लब और ट्रैफिक पुलिस ने बिछाया शहर में तीसरी आंख का जाल
HNN/ नाहन
नाहन शहर में ट्रैफिक नियमों की अवहेलना और रैश ड्राइविंग करने वालों की अब खैर नहीं है। ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने वालों पर अब शहर में जगह-जगह हिडन कैमरा मुस्तैद हो गए हैं। अब यदि किसी ने भी रैश ड्राइविंग अथवा मोटर व्हीकल नियमों की अनदेखी करी तो मौके पर नहीं बल्कि गिफ्ट के तौर पर घर बैठे ही आपका चालान पहुंच जाएगा।
यह व्यवस्था सड़क सुरक्षा क्लब के अध्यक्ष विशाल तोमर की टीम तथा नाहन की ट्रैफिक पुलिस के द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई है। बड़ी बात तो यह है कि नियमों की अवहेलना करने वालों को अब ट्रैफिक पुलिस रोकेगी नहीं बल्कि जगह-जगह छुपे हुए हिडन कैमरे उन पर ऐसी लगाम लगाएंगे कि फिर से रैश ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने की जरूरत नहीं करेंगे।
वहीं सड़क सुरक्षा क्लब के अध्यक्ष विशाल तोमर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि दोपहिया और चौपहिया वाहन चलाते हुए पैदल चलने वालों को भी उचित जगह दें और उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि हमारी ट्रैफिक पुलिस मित्र पुलिस की भूमिका निभाती है। इसीलिए सड़क पर सुरक्षा के लिए हर व्यक्ति को अपनी नैतिक जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
वहीं उन्होंने बाजार में दोपहिया वाहन चालकों से भी अपील करते हुए कहा कि जो समय निश्चित किया गया है उसी समय बाजार से गाड़ी निकाले। उन्होंने कहा कि यदि आपात स्थिति है तो ट्रैफिक पुलिस को जानकारी देकर अपने वाहन को पैदल बाजार में घर तक लेकर जाएं।
विशाल तोमर ने कहा कि सड़क और वाहन सुरक्षित तौर से घर तक जाने का एक जरिया है और यदि इन दोनों पर लापरवाही बरती जाती है तो यह घर की जगह परलोक जाने का जरिया भी बन जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है इसीलिए इसके महत्व को भी समझें खुद भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रहने का मौका दें।
उन्होंने कहा कि यशवंत विहार डिग्री कॉलेज के आसपास भी दुर्घटनाओं को कम करने के लिए बैरिकेड्स लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में कॉलेज के दौरान ट्रैफिक पुलिस से भी निवेदन कर व्यवस्था बनाए जाने का प्रयास किया जाएगा।
नाहन मेडिकल कॉलेज के 100 से अधिक आउटसोर्स कर्मी अब भगवान भरोसे
HNN/ नाहन
कोविड महामारी के दौरान आपातकालीन व्यवस्था में कंपनी की मार्फत रखें नाहन मेडिकल कॉलेज के आउटसोर्स कर्मी बेरोजगार हो गए हैं। केएस एंड ईएस तथा एनसीईएस कंपनी का सरकार के साथ हुआ करार समाप्त हो गया है। ऐसे में नाहन मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स पर रखी 60 स्टाफ नर्स, 25 डाटा एंट्री ऑपरेटर ,चालक, चपरासी आदि सेवाओं से बहाल कर दिए गए हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि इनमें से अधिकतर स्टाफ नर्स और अन्य ऐसे कर्मचारी हैं जिन्होंने कोविड के दौरान उन वार्ड में अपनी सेवाएं दी है, जहां डॉक्टर भी जाने से कतराते थे। अपनी जान पर खेलकर इन आउटसोर्स कर्मियों ने ना जाने कितनी जानों को बचाया। मगर आज इनकी खुद की रोजी-रोटी पर गहरा संकट मारा गया है।
बाकायदा इंटरव्यू के माध्यम से कंपनी की मार्फत रखें यह आउटसोर्स कर्मी इस उम्मीद पर थे कि नई सरकार के आने के बाद उन्हें पॉलिसी के अंतर्गत नियमित किया जाएगा। मगर प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार भी इन कोरोना वॉरियर्स का सहारा बनने में असहाय नजर आ रही है। इनमें से अधिकतर ऐसे कर्मी है जिन की शादियां भी हो चुकी हैं और इसी नौकरी के सहारे परिवार चल रहा है।
बड़ी बात तो यह भी है कि मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में पहले ही भारी-भरकम स्टाफ का टोटा चल रहा है ऐसे में सरकारी जनसेवा भी बाधित होने का संकट मंडराने लग पड़ा है। अवसर पर रखे यह कर्मचारी नियमित कर्मचारियों से ज्यादा काम और बगैर छुट्टी लिए रेगुलर काम किया करते थे। यहां हैरान कर देने वाली बात तो यह भी है कि जिन कंपनियों ने इन्हें नौकरी पर रखा था, वहां इन्हें इंसेंटिव देने के भी वायदे किए गए थे।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें ना तो 3 महीने से सैलरी मिली है और ना ही इंसेंटिव दिए गए हैं। 200 रुपए प्रतिदिन इंसेंटिव देने का वादा किया था मगर केवल एक बार 1500 रुपए देकर लेबर एक्ट की भी धज्जियां उड़ाई गई है। जानकारी तो यह भी है कि बीते 2 वर्षों में भी इन्हें कभी भी नियमित रूप से वेतन नहीं दिया गया।
2 महीने का वेतन रोक कर 1 महीने का वेतन दिया जाता था। नौकरी छीन जाने के बाद इन्हें ना केवल मानसिक आघात पहुंचा है बल्कि आने वाला भविष्य भी इन्हें मौजूदा सरकार की ना नुकुर करके चलते अंधकार में नजर आ रहा है। आज बुधवार को मेडिकल कॉलेज में जहां आम स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही तो वही ड्यूटी पर ना बुलाए जाने को लेकर आउटसोर्स कर्मी लाचार और मासूम खड़े नजर आए।
सिरमौर में कुल्लू, मनाली, शिमला से ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता मगर….
HNN/ नाहन
प्रदेश का जिला सिरमौर पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाओं के बावजूद पर्यटकों को आकर्षित कर पाने में नाकाम साबित हुआ है। जिला सिरमौर ना केवल आंतरिक, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को अपनी ओर खींचने का जबरदस्त मदरसा रखता है। बल्कि कुल्लू, मनाली, शिमला जैसे विकसित पर्यटन क्षेत्रों से भी कहीं ज्यादा आकर्षण रखता है।
इस नाकामी की सबसे बड़ी वजह अविकसित सड़कें बन रही हैं। टूटी-उखड़ी तथा संकरी सड़कें जान को जोखिम में तो डालती ही है साथ ही पर्यटक भी इनकी हालत देखकर कन्नी काट जाता है। बता दें कि पर्यटन की सफलता सुविधाओं के विकास पर निर्भर करती है।
जबकि ना केवल भाजपा सरकार के दौरान बल्कि कांग्रेस सरकार में भी इस जिला के जनप्रतिनिधि राष्ट्रीय स्तर पर बड़े ओहदेदार हैं। मौजूदा सरकार में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान सिरमौर से ही ताल्लुक रखते हैं तो वहीं शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सुरेश कश्यप भी इसी जिला से हैं।
यही नहीं पूर्व सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे सुखराम चौधरी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे डॉ. राजीव बिंदल भी इसी जिला से ताल्लुक रखते हैं। हैरानी तो इस बात की यह भी है कि हिमाचल के निर्माता स्वर्गीय डॉ. वाईएस परमार भी इसी जिला की देन रहे हैं। बावजूद इसके सिरमौर आज भी पर्यटन के क्षेत्र में सबसे पिछड़ा हुआ कहा जा सकता है।
अब आप यह भी जानकर हैरान हो जाएंगे कि राज्य पर्यटन विकास निगम के द्वारा एक बेहतर व्यवस्था भी यहां विकसित की हुई है बावजूद इसके अतिथि को एक बेहतर सड़क हवाई मार्ग अथवा रज्जू मार्ग आदि दे पाने में नाकाम है। बता दें कि जिला में 140 होटल, 109 होमस्टे और 100 से अधिक रेस्टोरेंट भी है।
यही नहीं पर्यटकों की सुविधा के लिए 19 ट्रेंड गाइड तथा 20 ट्रैवल एजेंट पर्यटन विभाग में और रजिस्टर्ड हैं। जिला सिरमौर ना केवल सामान्य पर्यटक को आकर्षित करता है बल्कि व्यवसायिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक, इको टूरिस्ट, धार्मिक, साहसिक, वाइल्ड लाइफ आदि पर्यटन के विभिन्न प्रकारों को आकर्षित कर पाने के लिए दमदार भूमिका निभा सकता है।
जिसके लिए भगवान परशुराम की जन्मस्थली श्री रेणुका जी, ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब, मां बाला सुंदरी त्रिलोकपुर टेंपल, मां भंगायनी देवी हरिपुरधार, भूरेश्वर मंदिर सराहां, श्रृंगी ऋषि की गुफाएं, सतयुग कालीन पौड़ी वाला शिव मंदिर, पातालियो शिव मंदिर आदि धार्मिक पर्यटन को आकर्षित कर सकता है।
तो वहीं हिस्टोरिकल टूरिज्म के लिए सुकेती फॉसिल पार्क, रियासत कालीन तालाबों का शहर नाहन, ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री टोका साहिब आदि दर्जनों ऐतिहासिक एवं सतयुग कालीन विरासते हैं जो धार्मिक पर्यटन को बार-बार बांधने का मादा रखती है।
इसके अलावा शैक्षणिक पर्यटन के मध्य नजर आईआईएम मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज कृषि विज्ञान एम रिसर्च सेंटर धौला कुआं, अकाल यूनिवर्सिटी बडू साहिब, हिमालयन इंस्टीट्यूट काला अंब के साथ-साथ नाहन की महिमा लाइब्रेरी ज्ञान का खजाना समेटे हुए हैं। ऐसे ही शी हॉट जैसा उपक्रम भी सिरमौर में है जो सिरमौर के पहाड़ी व्यंजनों को पर्यटन में महत्वपूर्ण स्थान देता है।
जिला की माइनिंग औद्योगिक क्षेत्र और पीच वैली राजगढ़ व्यावसायिक पर्यटन को आकर्षित कर सकता है। जिला के पास सिंबल वाड़ा वाइल्ड सेंचुरी और श्री रेणुका जी वेटलैंड जैसा पारस पत्थर भी है जो जीव विज्ञानि पर्यटन को अपनी और खींच सकता है।
अब यदि प्रदेश की सरकार पर्यटन को जनसेवा उद्योग का दर्जा देती है तो निश्चित ही अतिथि ना केवल देव साबित होगा बल्कि प्रदेश की जीडीपी के लिए भी वह वरदान देने वाला होगा। गौरतलब हो कि पर्यटन की सफलता सुविधाओं के विकास पर निर्भर करती है।
यही नहीं जितना जरूरी सरकार का योगदान होता है उतनी ही सहभागिता लोगों की भी जरूरी होती है। पर्यटन क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। जाहिर सी बात है जनता का अतिथ्य और शिष्टता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
*क्या है जिला में पर्यटन को लेकर कमी*
जिला में पर्यटन को मुख्य आधार देने वाली सड़कें किसी भी नजरिए से सुविधाजनक नहीं है। हरिपुरधार से राजगढ़, हरिपुरधार से श्री रेणुका जी तक, श्री रेणुका जी से दोसड़का तक कोई भी सड़क ना तो सुरक्षित है और ना ही चौड़ी है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टूरिस्ट को आकर्षित करने वाली पीच वैली और इंटरनल यूनिवर्सिटी बडू साहिब सड़क जोकि नेशनल हाईवे होना चाहिए थी वह सड़क कार चलाने तक के लिए भी सुरक्षित नहीं है। जिला में अंतरराष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा बनाए जाने का बहुत बड़ा स्थान भी है।
यही नहीं करीब 15 वर्ष पूर्व एविएशन एक्सपोर्ट्स ने भी निजी स्तर पर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ एयरपोर्ट के लिए सिरमौर के एक स्थान को द बेस्ट करार दिया था। जिला में पर्यटन के लिए अभी तक हेलीपोर्ट सुविधा नहीं जुड़ पाई है यही नहीं यह जिला अभी भी रेल सुविधा से वंचित है।
अब यदि बात की जाए टूरिस्ट की तो सामान्य और धार्मिक पर्यटक गत वर्ष करीब 10 लाख की संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। अब यदि इस जिला को पर्यटन के नजरिए से इसके तमाम आयामों को विकसित किया जाता है तो निश्चित ही इस जिला में हर वर्ष 50 लाख से भी अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर पाने का मदरसा है।
उधर, पर्यटन विकास निगम जिला सिरमौर की होटल इंस्पेक्टर मैडम नंदा और असिस्टेंट टूरिज्म डेवलपमेंट ऑफिसर राजीव का कहना है कि जिला सिरमौर के राजगढ़ में पार्किंग के लिए 50 लाख रुपए दिए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि हरिपुरधार से राजगढ़ और रेणुका जी से दोसड़का तक की सड़कों के लिए 7 और 5 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ है।
लाचार देखकर पॉकेट मनी से खरीदा ब्रेड, पानी और खाने का सामान
HNN/ नाहन
नाहन के यशवंत विहार में लाचार वृद्धा को छोड़ जाने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वृद्धा करीब 70-80 वर्ष की है। बुजुर्ग महिला को बस में से उतार कर कॉलेज के गेट के ठीक सामने छोड़ दिया गया।
सड़क पर लाचार बैठी भूखी-प्यासी बुजुर्ग महिला को रोता बिलखते देखकर जहां व्यस्क लोग कन्नी काट रहे थे, तो वहीं कॉलोनी के आसपास रहने वाले कॉलेज और स्कूल के छात्रों का दिल लाचार बुजुर्ग को देखकर पिघल उठा।
छात्रों के द्वारा महिला को सड़क से उठाकर किनारे पर बिठाया गया। जिसके बाद बच्चों ने अपनी पॉकेट मनी से बुजुर्ग महिला के लिए पानी और खाने पीने का सामान खरीदा। यही नहीं बुजुर्ग की बाबत उन्होंने न केवल पुलिस को सूचना दी बल्कि मीडिया को भी उसके हालात के बारे में बताया।
बुजुर्ग महिला के पेट में जब खाने पीने का सामान गया तो ना केवल वाह रोते हुए चुप हुई बल्कि बच्चों को भी आतम संतुष्टि हुई। बच्चे यह सोचकर परेशान थे कि ऐसे कैसे वो लोग होंगे जिन्होंने एक लाचार महिला को घर से निकाल कर दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया है।
वहीं एसएचओ सदर राजेश पाल ने भी आश्वस्त करते हुए कहा कि वह जवानों को भेजकर महिला के बारे में जानकारी लेकर उसको उसके घर भेजने का प्रयास करेंगे।
बरहाल एक बात तो सामने आई है कि आज की युवा पीढ़ी का जो बुजुर्गों के प्रति सम्मान और आस्था निकल कर आई है वह निश्चित ही आने वाले समय में एक बेहतर संस्कारों को जन्म देने में सहायक होगी।