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  • सिरमौर से हर्षवर्धन चौहान का मंत्री बनना लगभग तय

    सिरमौर से हर्षवर्धन चौहान का मंत्री बनना लगभग तय

    HNN/ नाहन

    साधारण व्यक्तित्व और अपने ही दम पर मुख्यमंत्री बने सुखविंदर सिंह सुक्खू के मंत्रिमंडल में मंत्री भी युवा हो सकते हैं। असल में कांग्रेस पहले कोई तमाम गलतियों से नसीहत लेते हुए लंबी व मजबूत पॉलिसी के तहत पारी खेलने की तैयारी कर चुकी है। इसके साथ साथ गुटबाजी का पटाक्षेप करते हुए सबसे पहले विक्रमादित्य को कैबिनेट में जिम्मेदार पद सौंपा जा सकता है। वही सुखविंदर सिंह सुक्खू के काफी नजदीकी माने जाने वाले जिला सिरमौर के मृदुभाषी हर्षवर्धन चौहान का भी मंत्रिमंडल में शामिल होना लगभग तय है। अब सवाल उठता है सोलन विधानसभा क्षेत्र का।

    इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का पूरा सुपड़ा साफ हुआ है। ऐसे में सोलन से कश्यप परिवार की राजनीति पर फिर से सुलतानपुरी परिवार को महत्व मिल सकता है। स्वर्गीय केडी सुल्तानपुरी के बाद विनोद सुल्तानपुरी जोकि युवा है और एक मंत्री को उन्होंने 6768 मतों से हराया भी है। कांग्रेस में लंबी पारी खेलने के लिए इस युवा नेता को धनीराम शांडिल की जगह मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि कर्नल धनीराम शांडिल वरिष्ठ कांग्रेसी नेता है मगर अब उम्र दराज हो चुके हैं। ऐसे में उनकी छत्रछाया के साथ विनोद सुल्तानपुरी सोलन जिला में कांग्रेस के गढ़ को मजबूती दे सकते हैं।

    तो वही धर्मशाला से सुधीर शर्मा की पार्टी के प्रति निष्ठा को फिर से जगह मिल सकती है। कांगड़ा को अभिमान दिया जाना राजनीतिक समीकरणों को दुरुस्ती भी देता है। ऐसे में चंद्र कुमार चौधरी की भी लॉटरी लग सकती है। वही सुजानपुर से राजेंद्र राणा का मंत्रिमंडल में शामिल होना भी लगभग तय है। राजेंद्र राणा एक कुशल रणनीतिकार हैं। उनके राजनीतिक गुरु माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से उन्होंने कई कूटनीतिक अस्त्र शस्त्र चलाने सीखे हैं। जिसका प्रयोग सोलन नगर निगम के चुनावों में देखने को मिल चुका है। इसी प्रकार एप्पल बेल्ट ऊपरी शिमला के लिए एक निर्णायक भूमिका निभाती है।

    ऐसे में वीरभद्र घुट में हाशिए पर रहे राम लाल ठाकुर के पोते रोहित ठाकुर को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। यही नहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर और चंद्रशेखर को प्रदेश कांग्रेस सरकार में कोई बड़ा जिम्मेवार पद दिया जा सकता है। अब यदि बात की जाए जिला सिरमौर मुख्यालय की नाहन विधानसभा सीट की तो यहां भाजपा में चाणक्य माने जाने वाले सबसे कद्दावर नेता एक कुशल रणनीतिकार राजीव बिंदल को अजय सोलंकी ने मात दी है। अजय सोलंकी युवा नेता है और सुखविंदर सिंह सुक्खू के सबसे करीबी माने जाते हैं। ऐसे में भले ही उन्हें मंत्रिमंडल में जगह ना मिल पाए मगर उन्हें कोई भी महत्वपूर्ण विभाग सौंपा जा सकता है।

    तो यदि सिरमौर में भाजपा के दिग्गजों की यदि घेराबंदी की बात की जाए तो सुखविंदर सिंह सुक्खू सोलंकी के लिए कैबिनेट में भी जगह बनवा सकते हैं। हालांकि सोलंकी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री बने हैं तो वह खुद भी मुख्यमंत्री के समान ही हुए हैं। अजय सोलंकी का मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना कूटनीतिक और जातीय समीकरणों के आधार पर जरूरी माना जा सकता है। इस विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोट की वजह से सोलंकी को जीत मिली है। ऐसे में कांग्रेस की भविष्य की राजनीति को लेकर सोलंकी को और अधिक मजबूत किया जाना कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाता है।

    बड़ी बात तो यह है कि अजय सोलंकी ने एक बेहतर नेता की भूमिका भी निभाई है। जीत के बाद उन्होंने अपने समर्थकों को बिल्कुल सख्त लहजे में संदेश दिया कि बिंदल या किसी के खिलाफ किसी भी प्रकार की टिप्पणियां कटाक्ष बिल्कुल ना किया जाए। इससे साफ जाहिर हो जाता है कि सोलंकी हर नजरिए से संतुलन बनाते हुए इन 5 सालों में पार्टी और खुद को मजबूत करने में ज्यादा ध्यान देंगे। मुकेश अग्निहोत्री को उपमुख्यमंत्री का पद सौंप कर कांग्रेस पहले ही जातीय समीकरणों को यानी ब्राह्मणों को खुश कर चुकी है। कहा जा सकता है 2027 तक कांग्रेस हर तरह से अपने आप को मजबूत कर निश्चित ही अगली पारी दमदार तरीके से खेलने को लेकर अभी से ही अपनी रणनीतियों पर काम करना शुरू करेगी।

  • सुखविंदर सिंह सुक्खू का मुख्यमंत्री बनना लगभग अब हुआ तय

    सुखविंदर सिंह सुक्खू का मुख्यमंत्री बनना लगभग अब हुआ तय

    HNN/ नाहन

    हालांकि, पुष्ट सूत्र कहते हैं कि कांग्रेस हाईकमान के द्वारा सुखविंदर सिंह सुक्खू के नाम पर सहमति दे दी गई है। बावजूद इसके प्रतिभा सिंह गुट इसका विरोध कर रहे हैं। तो वही एआईसीसी सूत्रों की मानें तो यदि गुट ए सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए और प्रतिभा सिंह मुकेश अग्निहोत्री के लिए अड़े रहे तो हाईकमान किसी तीसरे विकल्प पर अपनी मोहर लगा सकता है। अब यह तीसरा नाम अगर हर्षवर्धन चौहान का होता है तो संभवत इस पर प्रतिभा सिंह गुट कहीं ना कहीं सहमति दे सकता है।

    हालांकि, हर्षवर्धन चौहान भी सुक्खू के घनिष्ठ मित्र हैं ऐसे में दोनों तरफ बराबर बैलेंस बनाने के लिए हाईकमान इस फैसले पर विचार कर सकता है। अब सवाल यह उठता है कि केंद्र में बैठी भाजपा और भाजपा सरकार प्रदेश में कांग्रेस की चल रही इस सेहरा बंदी के नजारे को बड़ी ही पैनी नजर से देख रही है। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस संगठन देख रही प्रतिभा सिंह को एक बेहतर किंगमेकर की भूमिका में नजर आना चाहिए।

    संभवत कूटनीतिक की राए पर अगर विचार किया जाए तो प्रतिभा सिंह को यदि स्वर्गीय वीरभद्र सिंह वाली कांग्रेस को वजूद में रखना है तो एकजुटता का पाठ सबको उन्हें बढ़ाना होगा। अब यदि उनके द्वारा सुखविंदर सिंह सुक्खू गुट के ऊपर अतिरिक्त दबाव बनाया गया तो निश्चित रूप से ना केवल कांग्रेस की बड़ी किरकिरी होगी बल्कि भाजपा जो उम्मीद लगा रही है उसमें उन्हें सफलता भी मिलेगी।

    बरहाल, ना केवल प्रदेश बल्कि पूरा देश इस समय हिमाचल के राजनीतिक समीकरणों पर नजर बनाए हुए बैठा है। अभी तकनीकी रूप से देखा जाए तो हर लिहाज से सुखविंदर सिंह सुक्खू का मुख्यमंत्री लगभग बनना तय हो चुका है।

  • प्रदेश में हुई हार के बाद क्या भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देंगे पद से इस्तीफा

    प्रदेश में हुई हार के बाद क्या भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देंगे पद से इस्तीफा

    HNN/ नाहन

    हिमाचल प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार के द्वारा संभवत काम में कहीं कोई कमी नहीं छोड़ी गई। कोविड के साथ लॉकडाउन के बावजूद जयराम सरकार और उनके मंत्रिमंडल ने विकास की दृष्टि से बेहतर प्रदर्शन किया। बावजूद इसके सरकार को अंतिम चुनावी वर्ष में जिस तरीके से संगठनात्मक सहयोग मिलना चाहिए था वह पूरी तरह विफल रहा। प्रदेश की वास्तु स्थिति के अनुसार बेहतर रणनीति बनाने में संगठन कुछ खास नहीं कर पाया।

    संभवत इसके पीछे संगठन के ऊपर केंद्र का या तो दबाव रहा होगा या फिर प्रदेश में संगठन चलाने वालों की काबिलियत एक बेहतर रणनीतिकार की नहीं रही होगी।बाय इलेक्शन के बाद संगठन के पास आत्ममंथन करने का अच्छा खासा वक्त भी था। बावजूद इसके संगठन से जुड़े संगठन मंत्री को जवाबदेही में नहीं लाया गया। हालांकि जगत प्रकाश नड्डा के द्वारा पुराने भाजपाइयों को नए भाजपाइयों के साथ जोड़ने का बेहतर प्रयास किया गया मगर प्रदेश का संगठन उस जोड़ को मजबूती नहीं दे पाया।

    प्रदेश में संगठन की निर्णय क्षमताओं के ऊपर कई बार सवालिया निशान लगे। केंद्र शासित प्रदेश को यह अच्छी तरह से मालूम था कि यहां की राजनीति में कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में सरकार को सबसे बड़ी जरूरत कर्मचारियों के लिए एक बेहतर रणनीति की थी। उस रणनीति में सरकार को ना केंद्रीय और ना ही राज्य संगठन का उचित सहयोग मिल पाया। प्रदेश का संगठन राष्ट्रीय मुद्दों के साथ प्रदेश के 2022 रण में उत्तरा हुआ था।

    कांग्रेस के मेनिफेस्टो को काउंटर करने के लिए केवल आलोचनाओं पर उतरा रहा। हाटी जनजातीय मुद्दे पर भी इसके ड्रॉबैक्स को ना देखते हुए उल्टा गले की फांस बनवा लिया। इसका सबसे बड़ा नुक्सान भाजपा को अपने एक बेहतर रणनीतिकार नेता को गवा कर हुआ है। डॉ राजीव बिंदल की हार में मुख्य मुद्दा ही हाटी बनाम गुर्जरों की नाराजगी रहा। प्रदेश के संगठन प्रमुख के द्वारा ग्रास रूट के कार्यकर्ताओं के साथ केवल कागजी तथा सम्मेलन और बैठक स्तर पर ही सामंजस्य बिठाया गया ना कि खुद ग्रास रूट यानी फील्ड में उतर कर वास्तु स्थिति को भांपा गया।

    इस चीज को ऐसे भी समझा जा सकता है कि प्रदेश में आम जनता के द्वारा भाजपा को भरपूर समर्थन मिला है मगर कर्मचारियों के असहयोग से रिवाज की जगह ताज बदल गया। ऐसे में सबसे बड़ी नैतिक जिम्मेवारी प्रदेश संगठन की बनती है, जिस प्रकार मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा सौंपा तो वही प्रदेश अध्यक्ष को भी अपना इस्तीफा अभी तक दे देना चाहिए था। वही भाजपा को भी आने वाले वक्त में कम से कम राज्य के संगठन अध्यक्ष को निर्णय क्षमताओं के साथ आत्मनिर्भर बनाना होगा।

    इसमें भी कोई शक नहीं है कि यदि सतपाल सिंह सत्ती अथवा राजीव बिंदल के हाथ संगठन की कमान होती तो निश्चित ही सरकार को रिवाज बदलने में बहुत बड़ा सहयोग मिलता और आज प्रदेश में भाजपा की सरकार कायम होती।

  • भाजपा का इन जिलों में हुआ सूपड़ा साफ तो यहां पर खाई मुंह की

    भाजपा का इन जिलों में हुआ सूपड़ा साफ तो यहां पर खाई मुंह की

    HNN/ नाहन

    प्रदेश में भाजपा
    भाजपा शिमला जिला से 1 सीट पर ही सिमट कर रह गई है, सोलन जिला में भाजपा का सूपड़ा साफ हुआ है। कांगड़ा जिला में भाजपा केवल 4 सीटें ही ले पाई है। ऊना जिला में भी भाजपा की हालत पतली रही यहां केवल 1 सीट ही निकल पाई। अब यह हमीरपुर जिला है जो केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का गृह क्षेत्र है मगर यहां भी भाजपा का सूपड़ा साफ हुआ।

    सिरमौर ने भाजपा की थोड़ी जान बचाई यहां केवल 2 सीटें ही भाजपा को मिली है। चंबा जिला की बात की जाए तो यहां भाजपा को 3 सीटें मिली हैं। बिलासपुर जिला में भी 3, कुल्लू में 2 सीटें भाजपा को मिली हैं। मंडी जिला से भाजपा 9 सीटें लेने में कामयाब हुई है। लाहौल स्पीति और किन्नौर जिला की बात की जाए तो यहां भाजपा का पूरी तरह सूपड़ा साफ हुआ है।

    प्रदेश में कांग्रेस
    सबसे पहले हम सिरमौर जिला की बात करें तो यहां कांग्रेस 3 सीट निकालने में कामयाब हुई है। हमीरपुर से 4 तो एक सीट यहां भी आजाद उम्मीदवार निकाल ले गया है। ऊना जिला में 4 सीटें। सोलन जिला में चार जबकि एक सीट आजाद उम्मीदवार को यहां मिली है। राजधानी शिमला जिला की बात की जाए तो यहां कांग्रेस ने 8 में से 7 सीटें निकालकर रुतबा कायम किया है। इसी प्रकार डिसाइडिंग जिला कांगड़ा से कांग्रेस 10 सीट लेने में कामयाब हुई है।

    इसी प्रकार किन्नौर की मात्र 1 सीट लाहौल स्पीति की एक सीट कांग्रेस के खाते में गई हैं। कुल्लू जिला की 4 सीटों में दो कांग्रेस के खाते में। इसी प्रकार मंडी जो कि मुख्यमंत्री रहे जयराम ठाकुर का गृह क्षेत्र है यहां से कांग्रेस 10 में से केवल 1 सीट ले पाने में कामयाब हुई है। बिलासपुर जिला की 4 सीटों में से कांग्रेस के खाते में सिर्फ एक गई है। चंबा जिला की बात की जाए तो यहां 5 सीटों में से 2 सीटें ही कांग्रेस को मिल पाई है। इस प्रकार कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में 40 सीटें लेने का रिकॉर्ड बनाया है।

    भाजपा की हार की वजह
    प्रदेश में भाजपा की करारी हार का सबसे बड़ा मुद्दा ओ पी एस रहा। मगर केवल बिलासपुर जिला ही ऐसा था जहां ओ पी एस का जादू नहीं चला। दूसरी मुख्य वजह सरकार और संगठन दोनों का नेतृत्व सबसे कमजोर था। दोनों की निर्णय क्षमता लगभग 0 कही जा सकती है। चुनाव के दौरान अपने किए पर कम केंद्रीय निर्णयों पर ही भाजपा ने फोकस किया हुआ था। बार-बार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का हवाला देकर रिवाज बदलने की बात की जा रही थी।

    जबकि प्रदेश में जयराम सरकार के द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य खुद में जीत के लिए पर्याप्त थे जिन्हें ना तो भाषणों में ठीक से उतारा गया और ना ही रिवाज बदलने के लिए इनका कूटनीतिक प्रयोग किया गया। चुनाव प्रचार तथा आचार संहिता लगने से पहले भाजपा के द्वारा सरकारी खर्चे पर किए गए प्रचार-प्रसार के साथ जो एचआरटीसी की तमाम बसें थी वह जनता को नहीं मिल पाई। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग, महिलाएं, बच्चे सड़कों पर धक्के खाते हुए पैदल या टैक्सी कर घर पहुंचे।

    जनता को चिढ़ाने में यह भी एक बड़ा फैक्टर रहा। वही भाजपा के केंद्र से आने वाले ब्रांड चेहरे बार-बार प्रदेश में प्रचार प्रसार के लिए आए। ऐसे में जो समय प्रत्याशियों को जनता के बीच में लगाना चाहिए था उसकी जगह ब्रांड नेता के लिए भीड़ जुटाने की रणनीति बनाने में प्रत्याशी के चार चार दिन व्यर्थ गए। मगर उन ब्रांड दिग्गज चेहरों का कोई जादू नहीं चल पाया। प्रदेश में भाजपा पूरी तरह मोदी के नाम पर ही पालना झूल रही थी खुद गहरी नींद में सो रही थी।

    प्रदेश में भाजपा की रणनीति को सही मायने में दशा और दिशा जो नेता दे सकता था उसको भाजपा ने हाशिए पर रखा। उस पर भ्रष्टाचार के आरोप स्वयं सिद्ध करवाए गए। जबकि अन्य कांडों में भाजपा ने अपने नेताओं को हर तरह से बचाया और क्लीन चिट दी। जिनमें शराब कांड, खनन कांड, पुलिस भर्ती मामले आदि रहे। केंद्र से आने वाले ब्रांड चेहरे प्रदेश की वस्तु स्थिति के अलावा विधानसभा वॉइज किस मुद्दे पर बोलना है उस पर पूरी तरह फेल रहे।

    जैसे नाहन में स्मृति ईरानी आई मगर जो जातीय समीकरण बिंदल के लिए हार का कारण बनी उस पर जहां उन्होंने मरहम लगाना चाहिए था वही और अधिक आग सुलगा कर चली गई। अमित शाह आए मगर साथ में दुनिया की सबसे बड़ी ताकतवर पार्टी कहलाने के साथ हाटी का गारंटी पत्र साथ नहीं लाए। पीएम नरेंद्र मोदी बार-बार हिमाचल आए यहां उन्होंने केवल राष्ट्रीय मुद्दों पर ही अपने भाषण केंद्रित रखें। वही भाजपा का मीडिया प्रबंधन सबसे कमजोर साबित रहा।

    डिजिटल मीडिया की पावर को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए केवल देरी से छपने वाले समाचारों और बड़े-बड़े राष्ट्रीय चैनलों को जमकर विज्ञापन बांटे। टीवी से एंड्रॉयड पर उतरे मीडिया को मीडिया प्रबंधन समझ नहीं पाया। भाजपा के लिए अच्छा होता कि प्रदेश के ही चेहरों को ब्रांड चेहरे बनाया जाता और अधिकतर समय प्रत्याशी अपने विधानसभा क्षेत्र के प्रचार प्रसार में जनता के बीच लगाता तो आज यह स्थिति ना होती।

    बावजूद इन सब मुद्दों के प्रदेश में केवल ओ पी एस सबसे बड़ा हार का कारण बना। यहां पर कर्मचारी नेता अश्विनी ठाकुर पूरी तरह से फेल साबित हुए। ओ पी एस को लेकर कर्मचारी नेता अगर कूटनीतिक प्रयोग से इस मुद्दे को नियंत्रित कर लेते तो निश्चित ही प्रदेश में भाजपा रिवाज बदलने में कामयाब हो जाती। अब संगठन के तौर पर बात की जाए तो नेता ऐश करते रहे जबकि कार्यकर्ता अत्यधिक पार्टी एक्सरसाइज में ओवर बर्डन में आ गया।

    अधिकतर पन्ना प्रमुख आदि जैसे कार्यकर्ताओं ने वास्तविक रिपोर्ट ना देकर केवल टेबल रिपोर्ट बनाई। पूर्व में बाय इलेक्शन में भी यही स्थिति थी जिसको संगठन समझ नहीं पाया। कार्यकर्ताओं को जो मान सम्मान मिलना चाहिए था वह ओवरबर्डन के बावजूद नहीं मिल पाया। कमोवेश एन वक्त पर भाजपा की गुटबाजी ने कांग्रेस को भी पछाड़ दिया। अचानक कांग्रेस में सेंधमारी कर उनके नेताओं को तोड़ने की रणनीति भाजपा के कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरी।

    भाजपा के इस प्राचीन प्रयोग का समझदार जनता के बीच कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसी जगह पर भाजपा ही भाजपा के प्रत्याशी की हार का सबसे बड़ा कारण बनी। प्रदेश में जयराम ठाकुर स्वच्छ व साधारण छवि के एक ब्रांड चेहरा थे मगर उन पर केंद्रीय नियंत्रण ने उनकी निर्णय क्षमताओं को अत्यधिक दबाव में लाकर रख दिया। जबकि सियासी शिक्षा यह कहती है कि चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री को पूरी तरह फ्री हैंड कर देना चाहिए।

    ऐसे बहुत से कारण थे जो भाजपा की हार के कारण बने। निश्चित ही यह तो तय है कि रिवाज बदलने से पहले प्रदेश के कर्मचारी वर्ग को नियंत्रण करने के लिए ट्रांसफर नियंत्रण पॉलिसी बनाना भी जरूरी होगा अन्यथा ऐसे ही मुद्दे किसी भी सरकार के लिए गले की फांस बनते रहेंगे।
    अपने-अपने जिला में बैठने वाले सालों से एक ही सीट पर काबिज रहने वाले कर्मचारी अमूमन नौकरी कम राजनीति ज्यादा करते हैं।

    बरहाल, भाजपा को अपनी हार की समीक्षा में गहन मंथन करते हुए शांत स्वभाव के साथ सही वक्त का इंतजार करना चाहिए। जोड़-तोड़ के कूटनीतिक प्रयोगों की जगह विपक्ष की बेहतर भूमिका के साथ फिर से जनता के दिल में जगह बनानी चाहिए। अगर प्रदेश में भी भाजपा ने अन्य राज्यों की तरह जोड़-तोड़ के खेल खेलने की कोशिश करी तो निश्चित ही आने वाले संसदीय चुनावो में ना केवल प्रदेश से बल्कि देश के कई राज्यों से विपरीत परिणाम देखने को मिलेंगे।

  • नाहन विस क्षेत्र के 121 पोलिंग बूथों में इन पर सोलंकी और डॉ बिंदल को मिली बढ़त

    नाहन विस क्षेत्र के 121 पोलिंग बूथों में इन पर सोलंकी और डॉ बिंदल को मिली बढ़त

    HNN/ नाहन

    हिमाचल नाउ न्यूज़ ने मतदान के बाद अपने किए गए विश्लेषण में सिरमौर से 3-2 का आंकड़ा दे दिया था। वही नाहन विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के अजय सोलंकी के लिए प्रदेश का सबसे कद्दावर चेहरा माने जाने वाले डॉ राजीव बिंदल थे। सुबह ठीक 8:00 बजे शुरू हुई काउंटिंग के बाद ना केवल जिला सिरमौर बल्कि पूरे प्रदेश में रिवाज की जगह सरकार बदलती नजर आई। नाहन से अजय सोलंकी पहले राउंड से अंतिम राउंड तक यहां तक कि बैलेट पेपर की काउंटिंग में भी कांटे की टक्कर के साथ बढ़त बनाए रहे।

    अजय सोलंकी और बिंदल को इस बूथ से पड़े इतने मत
    पोलिंग बूथ नंबर 56/1 झाज्जड में अजय सोलंकी को 182 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 101 वोट डले। पोलिंग बूथ नंबर 2 चाकली में सोलंकी को 249 तो डॉक्टर बिंदल को भी 249 वोट डलें। निहोग पोलिंग बूथ नंबर 3 से डॉ राजीव बिंदल को 172 तो अजय सोलंकी को 254 वोट डले। पोलिंग बूथ नंबर 4 क्यारी अजय सोलंकी को 187 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 192 वोट डले। पोलिंग बूथ नंबर 5 बोहरली से अजय सोलंकी को 67 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 94 वोट डले। 6 नंबर बलसार से अजय सोलंकी को 143 तो बिंदल को 134 वोट ही डले। कोंलावाला भूंड-1 में अजय सोलंकी को 321 तो बिंदल को 486 वोट डले। कोलावाला भूंड 2 से अजय सोलंकी को 317 तो डॉक्टर बिंदल को 312 वोट डले हैं।

    इसी प्रकार पोलिंग बूथ नंबर 9 धोब घाट से अजय सोलंकी को 184 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 172 वोट ही डले। 10 नंबर पोलिंग बूथ शिकारडी से अजय सोलंकी को 187 तो डॉक्टर बिंदल को 155 वोट ही डले। पोलिंग बूथ नंबर 11 जामली से सोलंकी को 361 बिंदल को 153, देवका पुडला पोलिंग बूथ नंबर 12 अजय सोलंकी को 91 तो बिंदल को 230 की यहां बढ़त मिली है। पोलिंग स्टेशन नंबर 13 सुरला चारजन से अजय सोलंकी को 321 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को इस पोलिंग बूथ पर बढ़त के साथ 338 वोट डले हैं। पहले राउंड के अंतिम पोलिंग स्टेशन नंबर 14 सिल्ली सनाड़ी में भी बिंदल को बढ़त मिली है। जिसमें राजीव बिंदल को 173 तो अजय सोलंकी को 147 वोट डले हैं।

    इस प्रथम चरण के राउंड में कुल 6111 मतों की गिनती हुई जिसमें 2991 अजय सोलंकी को तो 2961 डॉ राजीव बिंदल को वोट डले। अब यदि बात की जाए पोलिंग स्टेशन नंबर 15 चम्याड कोराड की तो अजय सोलंकी को यहां 52 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 56 वोट डले हैं। कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले गौंत पोलिंग स्टेशन नंबर 16 में अजय सोलंकी को 74 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 41 वोट डले। बनेठी पोलिंग स्टेशन नंबर 17 से अजय सोलंकी को 432 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 316 वोट डले। मंडलाहां पोलिंग स्टेशन नंबर अट्ठारह से अजय सोलंकी को 192 तो डॉक्टर बिंदल को 166 वोट ही डले। सतना पोलिंग स्टेशन नंबर 19 से अजय सोलंकी को 401 तो डॉक्टर बिंदल को 293 वोट मिले हैं।

    भाजपा का गढ़ माने जाने वाले जमटा नंबर 1 में सोलंकी बढ़त लेने में कामयाब हुए हैं यहां उन्हें 327 तो डॉक्टर बिंदल को 200 वोट मिले हैं। जमटा नंबर दो पोलिंग स्टेशन नंबर 21 में अजय सोलंकी को 387 और डॉक्टर राजीव बिंदल को 213 वोट ही डल पाए हैं। धगेड़ा पोलिंग स्टेशन नंबर 22 से सोलंकी को 385 तो डॉक्टर बिंदल को 336 मत पड़े हैं। दधोग पोलिंग स्टेशन नंबर 23 से अजय सोलंकी को 423 तो राजीव बिंदल को 259 वोट पड़े। धौंण पोलिंग स्टेशन नंबर 24 में अजय सोलंकी को 260 तो वहीं इस ग्रामीण क्षेत्र में डॉ राजीव बिंदल को 343 वोट पड़े हैं। रामा पुलिस स्टेशन नंबर 25 में अजय सोलंकी को केवल 94 जबकि राजीव बिंदल को 187 वोट कास्ट हुए हैं।

    रेन पीरगड़ी पोलिंग स्टेशन नंबर 26 में अजय सोलंकी को 189 तो भाजपा के राजीव बिंदल को 214 वोट कास्ट हुए हैं। चबाहां पोलिंग बूथ नंबर 27 में अजय सोलंकी को 371 जबकि डॉ राजीव बिंदल को यहां 307 वोट ही डल पाए हैं। तालों सेरटा पोलिंग बूथ नंबर 28 पर अजय सोलंकी को 225 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को यहां बढ़त के साथ 283 वोट डले हैं। यह दूसरे नंबर राउंड की डिटेल दी गई है। जिसमें अजय सोलंकी को 3812 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 3214 वोट डले। अब तीसरे चरण की काउंटिंग के दौरान पोलिंग स्टेशन नंबर 29 सिंबल वाला से अजय सोलंकी को 304 तो इस जगह डॉक्टर राजीव बिंदल को बढ़त के साथ 384 वोट डले।

    पोलिंग बूथ नंबर 30 जाबल का बाग़ में सोलंकी को 205 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 332 वोट पड़े। पोलिंग बूथ नंबर 31 कोटडी से डॉक्टर बिंदल को 126 तो अजय सोलंकी यहां बढ़त में 131 वोट हासिल करने में कामयाब हुए। बूथ नंबर 32 खजूरना से अजय सोलंकी को 204 तो डॉ राजीव बिंदल को यहां केवल 175 वोट ही डल पाए। पोलिंग बूथ नंबर 33 नाहन छावनी शमशेरपुर से अजय सोलंकी को 121 जबकि भाजपा के डॉ राजीव बिंदल को बड़त में 155 वोट डले। नाहन कैंट पोलिंग बूथ नंबर 34 से अजय सोलंकी को 421 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को यहां 345 वोट ही डल पाए। ढाबों नंबर 1 पोलिंग बूथ नंबर 35 में राजीव बिंदल को 330 तो वही अजय सोलंकी को 230 वोट डले।

    ढाबों 2 पोलिंग बूथ नंबर 36 से अजय सोलंकी को 362 तो वही डॉक्टर राजीव बिंदल भी यहां बराबरी पर यानी 362 वोट ही ले पाए। हरिपुर नाहन पोलिंग बूथ नंबर 37 में अजय सोलंकी को 265 जबकि इस जगह राजीव बिंदल को केवल 81 वोट ही पड़े। हरिपुर नंबर 2 पोलिंग बूथ नंबर 38 से अजय सोलंकी को 236 जबकि डॉ राजीव बिंदल को यहां 233 वोट पड़े। नाहन शांति संगम पोलिंग बूथ नंबर 39 से अजय सोलंकी को 273 जबकि डॉ राजीव बिंदल को यहां केवल 144 वोट ही डाल पाए। शांति संगम दो पोलिंग बूथ नंबर 41 से अजय सोलंकी को 236 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 190 वोट डले। इसी प्रकार नाहन शमशेरगंज 1 के पोलिंग बूथ नंबर 41 से डॉक्टर राजीव बिंदल को 218 तो अजय सोलंकी को यहां 204 वोट डले।

    शमशेर गंज दो पोलिंग स्टेशन नंबर 42 से अजय सोलंकी को 306 जबकि यहां डॉ राजीव बिंदल को 261 वोट मिले। इस प्रकार तीसरे चरण की काउंटिंग में अजय सोलंकी को 3528 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 3136 वोट पड़े। तीसरे चरण में कुल वोट अजय सोलंकी को 10321 तो डॉ राजीव बिंदल को 9311 वोट डल पाए। अभी तक अजय सोलंकी 1020 की लीड पर थे। इसी प्रकार यदि चौथे चरण की काउंटिंग की बात की जाए तो नाहन के अमरपुर नंबर 1 पोलिंग बूथ नंबर 43 से अजय सोलंकी को 398 जबकि डॉ राजीव बिंदल को 380 वोट डले। अमरपुर दो पोलिंग बूथ नंबर 44 की बात की जाए तो यहां अजय सोलंकी को 216 जबकि बिंदल 257 वोट लेने में कामयाब हुए।

    नया बाजार नंबर 1 नाहन से राजीव बिंदल को 207 तो अजय सोलंकी को यहां बढ़त में 240 वोट मिले। नया बाजार नंबर दो से अजय सोलंकी को 359 जबकि राजीव बिंदल को यहां 342 वोट मिले। ऊपरी टोली नाहन पोलिंग बूथ नंबर 47 पर हुए मतदान में अजय सोलंकी को 345 जबकि डॉक्टर बिंदल को 291 वोट मिले। पक्का टैंक पोलिंग स्टेशन नंबर 48 से अजय सोलंकी को 419 जबकि डॉ राजीव बिंदल को यहां 360 वोट मिले। रानीताल पोलिंग बूथ नंबर से अजय सोलंकी को 317 तो राजीव बिंदल को यहां 352 डले। मियां का मंदिर पोलिंग बूथ नंबर 50 में अजय सोलंकी को 292 जबकि राजीव बिंदल को यहां बढ़त में 305 वोट मिले।

    कच्चा टैंक पोलिंग बूथ नंबर 51 की बात की जाए तो यहां अजय सोलंकी को 463 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 275 में ही सब्र करना पड़ा। जगन्नाथ मंदिर पोलिंग बूथ नंबर 52 की बात की जाए तो यहां पर अजय सोलंकी 465 जबकि डॉ राजीव बिंदल केवल 416 वोट ही ले पाए। पोलिंग बूथ नंबर 53 नावणी का बाग से अजय सोलंकी को 483 जबकि राजीव बिंदल को 427 वोट ही पड़े। इसी प्रकार बाल्मीकि बस्ती नाहन पोलिंग बूथ नंबर 54 से अजय सोलंकी को 377 जबकि डॉ राजीव बिंदल को यहां 223 वोट ही पड़े।आमवाला पोलिंग बूथ नंबर 55 में अजय सोलंकी को 291 राजीव बिंदल को 185 वोट मिले। सैनवाला पोलिंग स्टेशन नंबर 56 की बात की जाए तो यहां अजय सोलंकी को 537 तो राजीव बिंदल को यहां 380 वोट मिले।

    यह ग्रामीण क्षेत्र भाजपा समर्थित पंचायत प्रधान का है बावजूद इसके यहां भी डॉ राजीव बिंदल पीछे रहे। इस प्रकार इस चौथे चरण में अजय सोलंकी को 5202 जबकि डॉ राजीव बिंदल को 4400 वोट मिले। चौथे राउंड तक अजय सोलंकी को कुल 15533 तो डॉक्टर राजीव बिंदल का अब तक का टोटल 13711 वोट लेने का रहा। इस चरण में अजय सोलंकी 1822 मतों से आगे चल रहे थे। चलिए पांचवें चरण की बात की जाए तो पोलिंग बूथ नंबर 57 मोहलिया कटोला से अजय सोलंकी को 469 तो डॉक्टर बिंदल को 357 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 58 सलानी से अजय सोलंकी को 143 तो डॉ राजीव बिंदल को 190 वोट मिले। बकारला पोलिंग स्टेशन नंबर 59 में अजय सोलंकी को केवल 47 जबकि राजीव बिंदल को यहां 100 वोट डले।

    बर्मा पापड़ी पोलिंग बूथ नंबर 60 से मिले परिणामों में अजय सोलंकी को 321 जबकि यहां पर डॉ राजीव बिंदल 445 वोट लेने में कामयाब रहे। बर्मा पापड़ी नंबर दो पोलिंग बूथ नंबर 61 से अजय सोलंकी को 454 तो यहां डॉक्टर राजीव बिंदल को 340 वोटों से ही सबर करना पड़ा। जंगला भुंड पोलिंग बूथ नंबर 62 से अजय सोलंकी को 235 जबकि डॉ राजीव बिंदल 290 वोटों की बढ़त लेने में कामयाब हुए। पोलिंग बूथ नंबर 63 गुरुद्वारा ढांग वाला से अजय सोलंकी को 208 जबकि राजीव बिंदल को केवल यहां 98 वोट ही मिल पाए। इस प्रकार पोलिंग बूथ नंबर 64 भोगपुर सीमलवाड़ा से अजय सोलंकी को 77 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को यहां 91 वोट मिले।

    गुमटी के पोलिंग स्टेशन नंबर 65 से अजय सोलंकी को 232 तो राजीव बिंदल को 170 वोट मिले। इसी प्रकार पालियों पोलिंग बूथ नंबर 66 से अजय सोलंकी 207 राजीव बिंदल को 304 वोट मिले। कोटला पोलिंग बूथ नंबर 62 से अजय सोलंकी को 255 तो राजीव बिंदल को बढ़त में यहां 372 वोट मिले। कोटला पोलिंग बूथ नंबर से बिंदल को 372 जबकि अजय सोलंकी को यहां 255 वोटों में सबर करना पड़ा। त्रिलोकपुर पोलिंग बूथ नंबर 68 से अजय सोलंकी को 229 जबकि राजीव बिंदल यहां बढ़त में 278 वोट लेने में कामयाब रहे। त्रिलोकपुर 2 पोलिंग बूथ नंबर 69 से अजय सोलंकी को 229 तो यहां डॉ राजीव बिंदल 319 वोटों को लेने में कामयाब रहे।

    पोलिंग बूथ नंबर 70 खरकौं से डॉ राजीव बिंदल को केवल 70 वोट पड़े जबकि अजय सोलंकी को 118 वोट मिले। इस प्रकार पांचवें चरण में अजय सोलंकी को 3224 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 3424 में बढ़त मिली है। इस प्रकार पांचवें चरण तक अजय सोलंकी को कुल 18757 जबकि डॉ राजीव बिंदल को 17135 वोट ही मिल पाए। अब यदि छठे चरण की काउंटिंग की बात की जाए तो पोलिंग बूथ नंबर 71 खैरी से अजय सोलंकी को 239 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को यहां 208 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 72 ओगली में अजय सोलंकी को 241 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को बढ़त में 400 वोट मिले हैं। बूथ नंबर 73 रामपुर जटान से अजय सोलंकी को 239 जबकि डॉ राजीव बिंदल को 338 वोट मिले। नागल सुकेती पोलिंग बूथ नंबर 74 से अजय सोलंकी को 283 तो डॉक्टर राजीव बिंदल यहां बढ़त में 392 वोट ले गए।

    मोगी नंद पोलिंग बूथ नंबर 75 से अजय सोलंकी 469 जबकि डॉ राजीव बिंदल 477 वोट लेने में कामयाब रहे। पोलिंग बूथ नंबर 76 देवनी से राजीव बिंदल को 293 जबकि अजय सोलंकी को 250 वोट मिले। लाल पीपल पोलिंग बूथ नंबर 77 से अजय सोलंकी को 310 जबकि डॉ राजीव बिंदल को 285 वोट डले। वीर विक्रम आबाद पोलिंग बूथ नंबर 78 से राजीव बिंदल को 406 जबकि अजय सोलंकी को 315 मत पड़े। पोलिंग बूथ नंबर 79 खैर वाला सिंबल वाला से अजय सोलंकी को 393 जबकि राजीव बिंदल को 246 वोट ही मिल पाए। पोलिंग बूथ नंबर 80 मालो वाला से डॉक्टर राजीव बिंदल को 499 जबकि अजय सोलंकी को 405 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 81 शंभू वाला से अजय सोलंकी को 263 जबकि डॉ राजीव बिंदल को 395 मत मिले।

    पोलिंग बूथ नंबर 82 नेहरला से अजय सोलंकी को केवल 9 वोट जबकि राजीव बिंदल को 131 वोट डले। पोलिंग बूथ नंबर 83 बंनकला से अजय सोलंकी को 416 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 340 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 84 जोगी बन से अजय सोलंकी को 332 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 264 वोट ही मिल पाए। छठे राउंड की काउंटिंग में अजय सोलंकी को 4164 जबकि राजीव बिंदल को 4674 वोट मिले। इस प्रकार अभी तक छठे चरण की काउंटिंग में अजय सोलंकी का आंकड़ा 22921 जबकि राजीव बिंदल का आंकड़ा 21809 तक पहुंचा था। सातवें चरण की काउंटिंग में पोलिंग बूथ नंबर 85 रूखड़ी से अजय सोलंकी को 410 डॉ राजीव बिंदल को 516 वोट मिले।

    पोलिंग बूथ नंबर 86 उत्तम वाला बड़ा वन से अजय सोलंकी को 252 डॉ राजीव बिंदल को 237 वोट मिले। इसी प्रकार पोलिंग बूथ नंबर 87 मात्तर से अजय सोलंकी को 140 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को यहां 182 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 88 संभालका से राजीव बिंदल को 163 जबकि अजय सोलंकी को केवल 63 वोट ही मिले। पोलिंग बूथ नंबर 89 नलका से राजीव बिंदल को 296 जबकि अजय सोलंकी को केवल 140 वोट मिले। इसी प्रकार पोलिंग बूथ नंबर 90 भगता वाला से अजय सोलंकी को 142 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 166 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 91 भेड़ों से अजय सोलंकी को 302 जबकि डॉ राजीव बिंदल को यहां केवल 67 वोट ही मिल पाए।

    हरिपुर पोलिंग बूथ नंबर 92 से अजय सोलंकी को 397 राजीव बिंदल को 276 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 93 झील बांका वाड़ा से अजय सोलंकी को 224 जबकि डॉ राजीव बिंदल को 235 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 94 लोहगढ़ से अजय सोलंकी को 162 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को केवल 80 वोटों से सबर करना पड़ा। अब यदि बात की जाए कोल्लर नंबर वन की तो यहां अजय सोलंकी को 407 तो राजीव बिंदल को 507 मत मिले। कोल्लर 2 पोलिंग बूथ नंबर 96 से अजय सोलंकी को 277 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को केवल 181 वोट मिले। कोलर 3 पोलिंग बूथ नंबर 97 से अजय सोलंकी को 543 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को यहां 370 वोट ही मिल पाए। पोलिंग बूथ नंबर 98 सुखचैन पुर से अजय सोलंकी को 200 जबकि डॉ राजीव बिंदल को यहां केवल 115 वोट मिले।

    इस प्रकार सातवें चरण में अजय सोलंकी को 3664 तो डॉक्टर राजीव बिंदल को 3391 वोट मिले। सातवें चरण में अब तक मिले कुल वोटों में अजय सोलंकी 26585 तो राजीव बिंदल को 25200 वोट मिल चुके थे। आठवें चरण की काउंटिंग में डॉ राजीव बिंदल का पूरा दबदबा रहा। यहां पोलिंग बूथ नंबर 99 धौला कुआं से अजय सोलंकी को 322 तो राजीव बिंदल को 256 वोट मिले। धौला कुआं नंबर 2 पोलिंग बूथ नंबर 100 से अजय सोलंकी को 318 जबकि राजीव बिंदल को 371 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 101 भारापुर से अजय सोलंकी को 448 तो राजीव बिंदल को 447 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 102 रामपुर माजरी एक से अजय सोलंकी को 532 जबकि राजीव बिंदल को 344 वोट मिले। रामपुर माजरी नंबर 2 राजीव बिंदल को 348 तो अजय सोलंकी को 251 वोट मिले।

    रामपुर माजरी नंबर 3 से अजय सोलंकी को 341 राजीव बिंदल को 449 वोट मिले। पोलिंग बूथ नंबर 105 मेहराड गिरी नगर से अजय सोलंकी को 131 तो राजीव बिंदल को यहां 144 वोट मिले हैं। पोलिंग बूथ नंबर 106 पढ़दूनी से अजय सोलंकी को 382 जबकि राजीव बिंदल को यहां 514 वोट हासिल हुए हैं।पोलिंग बूथ नंबर 107 बहरामपुर सलामतपुर से अजय सोलंकी को 256 जबकि राजीव बिंदल को यहां 339 वोट लेने की कामयाबी मिली थी। पोलिंग बूथ नंबर 108 सैनवाला मुबारकपुर से अजय सोलंकी को 261 तो राजीव बिंदल को यहां 510 वोट लेने में कामयाबी मिली। पोलिंग बूथ नंबर 109 टोक्यो से अजय सोलंकी को 378 जबकि राजीव बिंदल को यहां 600 वोट लेने में कामयाबी मिली। माजरा पोलिंग बूथ नंबर 110 के नंबर 1 से राजीव बिंदल को 510 तो अजय सोलंकी को यहां 343 वोट मिले।

    इसी प्रकार माजरा दो पोलिंग बूथ नंबर 111 से अजय सोलंकी को केवल 191 जबकि राजीव बिंदल को यहां 459 वोट मिले।माजरा 3 पोलिंग बूथ नंबर 112 से अजय सोलंकी को 132 तो राजीव बिंदल को यहां 339 वोट लेने में कामयाबी मिली। इस प्रकार आठवें चरण की इस काउंटिंग में अजय सोलंकी को 4286 तो डॉ राजीव बिंदल को 5650 वोट मिले। यहां अजय सोलंकी का टोटल ग्राफ बढ़त का गिरकर 112 तक पहुंच गया था। इस प्रकार इस चरण में अजय सोलंकी को कुल 26585 तो अजय सोलंकी को 25200 वोट डल चुके थे। अब यदि अंतिम चरण यानी नौवें राउंड की बात की जाए तो पोलिंग बूथ नंबर 113 माजरा 4 से अजय सोलंकी को 229 तो राजीव बिंदल को यहां 233 वोट मिले। मेंलियों पोलिंग बूथ नंबर 114 से अजय सोलंकी को 583 तो राजीव बिंदल को यहां 236 वोट ही मिल पाए।

    पोलिंग बूथ नंबर 115 मिस्सर वाला अजय सोलंकी को 654 तो राजीव बिंदल को 187 वोट में सब्र करना पड़ा। मिस्सर वाला नंबर दो पोलिंग बूथ नंबर 116 से अजय सोलंकी को 552 तो राजीव बिंदल को यहां 167 वोट ही मिले। वही पोलिंग बूथ नंबर 117 क्यारदा से अजय सोलंकी को 269 तो राजीव बिंदल को यहां 488 वोट मिले। मिस्सर वाला 3 पोलिंग बूथ नंबर 118 अजय सोलंकी को 397 जबकि राजीव बिंदल को केवल 105 वोट ही मिल पाए। 119 फतेहपुर से अजय सोलंकी को 263 तो डॉक्टर राजीव बिंदल यहां 379 वोट ले पाने में कामयाब हुए। अब यदि पोलिंग बूथ नंबर 120 की बात की जाए तो यह पल होलहोडी में आता है। यहां से अजय सोलंकी को 321 जबकि राजीव बिंदल को यहां 326 वोट मिले।

    इसी प्रकार अंतिम पोलिंग बूथ नंबर 121 पलहोडी नंबर दो से अजय सोलंकी को 406 तो यहां राजीव बिंदल का आंकड़ा केवल 86 मतों पर अटक गया। इस प्रकार अंतिम चरण की मतगणना में अजय सोलंकी को 3674 तो राजीव बिंदल को इस राउंड में केवल 2207 वोट ही मिल पाए। बस इसी चरण में राजीव बिंदल हार की और चले गए। इस प्रकार इस चरण के बाद अजय सोलंकी को कुल 34543, राजीव बिंदल को 33057, वही अयोध्या प्रसाद वर्मा को 258, सलिंदर सिंह को 295, आम आदमी पार्टी के सुनील शर्मा को 381, आजाद खड़े हुए रमजान को केवल 117, नोटा वोट 468 डले।

    इस प्रकार अंतिम परिणाम में कुल 70005 वोट कास्ट हुए। जिनमें 35291 वोट अजय सोलंकी को मिले तो वहीं भाजपा के डॉ राजीव बिंदल को 33652 वोट मिल पाए। इस प्रकार नाहन विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी अजय सोलंकी नाहन विधानसभा के चुनाव में 1639 मतों से विजेता घोषित हुए। जीत के बाद उनके समर्थकों की भारी भीड़ काउंटिंग हॉल और पुलिस के बैरिकेट को तोड़ती हुई आगे आ चुकी थी। मौके पर पहुंची डीएसपी मीनाक्षी ने मोर्चा संभालते हुए पूरी भीड़ को लाइन ऑफ कंट्रोल से पीछे किया। जीत के जश्न में अजय सोलंकी ने सबका आभार व्यक्त किया। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा यह जनता की जीत हुई है। उन्होंने कहा विकास की प्रक्रिया को निरंतर रखा जाएगा। पीछे किए गए कार्यों को और बेहतर करने के लिए लगातार जनता के बीच में और जनता के साथ बना रहूंगा।

  • प्रदेश सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन का एक और काला कारनामा

    प्रदेश सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन का एक और काला कारनामा

    HNN/ नाहन

    प्रदेश की जनता के सरकारी राशन पर डल रहे डाके की परतें धीरे-धीरे और खुलती जा रही हैं। एक ओर जहां सरकारी राशन की सप्लाई को लेकर करोड़ों के घोटाले की आरटीआई में पुष्टि हो चुकी है वही एक और काला कारनामा आरटीआई ने खोल दिया है। यह मामला बिल्कुल वैसा ही है जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के ऊपर स्कूटर से सेब ढोने के आरोप लगे थे।

    मामला नाहन मंगला गुड्स कैरियर का है जिनके द्वारा 26 टन सरकारी राशन काला अंब से हरिपुरधार सिविल सप्लाई के गोदाम तक स्कूटी से ही ढो दिया गया। मामला मई, जुलाई, अक्तूबर 2020 का है। जिसमें गाड़ी रजिस्ट्रेशन नंबर एचपी 18A 8505 के साथ 3 चालान व बिल्टी दिखाई गई है। अब आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि यह वाहन संख्या किसी बड़े ट्रक की नहीं बल्कि स्कूटी की है।

    यह स्कूटी नाहन के किसी निखिल बंसल के नाम रजिस्टर्ड है और इससे भी ज्यादा हैरान कर देने वाला विषय यह है कि विभाग के द्वारा बिना कोई जांच आदि किए बगैर इसका भाड़ा भुगतान भी कर दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि दस्तावेजों में राशन ले जाया भी गया और स्टोर में जमा भी दर्शाया गया। मगर आरटीआई में हुए खुलासे ने यह राज भी खोल दिया कि यह राशन पहले ही कहीं गायब हो चुका है।

    यानी राशन डिपो धारकों और विभाग के कर्मियों के साथ मिलकर हिस्सा बांट लिया गया। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि इससे पहले भी राशन सप्लाई को लेकर तथ्य और सबूतों के साथ खुलासे किए जा चुके हैं। वही विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हमारे गोदाम में तो राशन पहुंचा है। जाहिर है यदि राशन पहुंचा है या तो आरटीआई से लिए विभाग के तमाम डॉक्यूमेंट झूठे हैं या फिर जनता के सरकारी राशन पर डाका डाला गया है।

    यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि काला अंब से हरिपुरधार तक की दूरी डेढ़ सौ किलोमीटर के आसपास बैठती है। हरिपुरधार एक हिल स्टेशन है काला अंब से हरिपुरधार सारा चढ़ाई का एरिया है। तो वही टेंडर में ट्रक से राशन ढुलाई दिखाई जाती है मगर यहां तो स्कूटी के नंबर पर ही आपूर्ति का भुगतान कर दिया गया। जाहिर सी बात है बिना विभाग की मिलीभगत के यह कार्य असंभव होता है।

    उधर, निदेशक राज्य खाद्य एवं आपूर्ति निगम केसी चमन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह अभी फिलहाल छुट्टी पर हैं। उनकी जगह चार्ज देख रहे आईएएस विवेक भाटिया का कहना है कि यह मामला गंभीर है विषय की जांच की जाएगी।

    वही क्षेत्रीय प्रबंधक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम सीमित जिला सिरमौर हुस्न कश्यप का कहना है कि राशन सप्लाई को लेकर पहले से ही रितेश गोयल की शिकायत पर जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि स्कूटी पर राशन सप्लाई का मामला नया है जिसकी जांच की जाएगी।

  • श्री रेणुका जी मेला कहने को अंतरराष्ट्रीय मगर स्तर स्थानीय मेले से भी कम

    श्री रेणुका जी मेला कहने को अंतरराष्ट्रीय मगर स्तर स्थानीय मेले से भी कम

    HNN/ श्री रेणुका जी

    एक ओर जहां श्री रेणुका जी मेला मां रेणुका जी झील और परशु तालाब के अस्तित्व को लेकर संकट का सायरन बजा चुका है वही मेले का अंतरराष्ट्रीय दर्जा किसी भी मायने में एक स्थानीय मेले से अधिक नहीं है। जबकि अंतरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त श्री रेणुका जी मेला ना केवल करोड़ों की इनकम जनरेट कर सकता है बल्कि धार्मिक महत्वत के चलते देश सहित विदेशी धार्मिक पर्यटकों को भी आकर्षित कर सकता है। मौजूदा समय श्री रेणुका जी झील के अस्तित्व पर लंबे समय से बड़ा संकट भी जारी है।

    वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर नरेंद्र मीणा के द्वारा वर्ष 2010 में प्रदेश की अन्य झीलों सहित श्री रेणुका जी झील का गहन अध्ययन किया गया था। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर नरेंद्र मीणा के अनुसार, यह झील काफी संकट की स्थिति में है। उन्होंने यह भी बताया था कि इस झील की अधिकतम गहराई 13 मीटर और दूसरी ओर केवल 8 मीटर ही रह गई है। अब यदि बात की जाए धार्मिक महत्व से इसके संरक्षण की तो इसमें अब एक बड़ा और कड़ा निर्णय लेने की जरूरत है। इस प्राकृतिक झील को सबसे ज्यादा नुक्सान मेले के दौरान ही होता है।

    ऐसे में अब यह जरूरत महसूस की जा रही है कि झील के नजदीक कुरजा पवेलियन में मेले के दौरान लगाए जाने वाली दुकानें गिरी नदी के बेसिन में शिफ्ट की जानी चाहिए। वही अंतरराष्ट्रीय दर्जा के तहत इसका धार्मिक महत्व और अधिक परिष्कृत होना जरूरी है। मेले के दौरान प्रमुख पालकियों के साथ आने वाले पुजारियों का कहना है कि इस मेले में मां रेणुका जी और भगवान परशुराम जी की ओर से प्रदेश के सभी देवी देवताओं को निमंत्रण दिए जाने चाहिए। अब यदि इस मेले के दौरान प्रदेश के अन्य देवी-देवता कुब्जा पवेलियन में सजाए जाते हैं तो यहां का नजारा भव्य हो जाएगा।

    श्री रेणुका जी विकास बोर्ड से जुड़े माता राम आदि का कहना है कि यदि प्रदेश के अन्य देवी-देवता यहां आते हैं तो धार्मिक पर्यटकों की संख्या भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाएगी। यही नहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ मेले में आने वाली भीड़ जो झील के आसपास जंगल आदि में शौच करती हैं उससे भी निजात मिल जाएगी। देवी-देवताओं के एक स्थान पर दर्शनार्थ पहुंचने पर लोग खुद ब खुद आसपास गंदगी फैलाने से गुरेज करेंगे। वही मेले के दौरान आयोजित होने वाली सांस्कृतिक संध्या व अन्य गतिविधियां सहित तमाम दुकानें गिरी नदी के बेसिन में लगनी चाहिए।

    अब यदि सांस्कृतिक संध्या व तमाम दुकानें गिरी नदी के बेसिन में लगती है तो ना केवल प्रशासन व पुलिस प्रशासन की सर दर्दी कम होगी बल्कि मेले के दौरान ट्रैफिक समस्या से भी निजात मिल जाएगी। गिरी नदी का बेसिन इतना बड़ा है कि यहां पर सैकड़ों वाहन पार्क भी किए जा सकते हैं। नदी के बेसिन में टेंटिंग की व्यवस्था कर लोगों को ठहरने के लिए भी उचित स्थान मिल सकता है। बड़ी बात तो यह है कि नदी के बेसन में यदि तमाम वाणिज्य गतिविधियां की जाती है तो भारी भरकम मूल्यों में की जाने वाली प्लाट्स की नीलामी से भी लोगों को राहत मिलेगी।

    1000-2000 रूपए में नदी का बेसिन छोटे स्थानीय दुकानदारों और किसानों को भी बड़ी राहत देगा। यही नहीं मेले के दौरान फैलने वाला प्रदूषण बरसातों के दिनों में खुद-ब-खुद साफ भी हो जाएगा। जिला सिरमौर के बुद्धिजीवी वर्ग का भी मानना है कि श्री रेणुका जी मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने को लेकर अब बड़े बदलाव की भी जरूरत है। वही यदि इस झील के प्राचीन रूप को वापिस अस्तित्व में लाने की बात की जाए तो वाडिया इंस्टीट्यूट इसके लिए रामबाण साबित होगा।

    इसकी बड़ी वजह 2010 में डॉक्टर मीणा के द्वारा कई दिन तक की गई झील की रिसर्च है। डॉक्टर मीणा का कहना है कि सबसे जरूरी है इस झील से गाद को निकालना। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस झील को लेकर रिसर्च किया है जिसमें इस झील को पुनः उसके प्रारूप में लाने के भी वैज्ञानिक तरीके निकाले गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि यदि प्रदेश सरकार इस पवित्र झील के संरक्षण को लेकर गंभीर होती है तो निश्चित ही उन्हें वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की रिसर्च का सहारा लेना ही होगा।

    यही नहीं सरकार व प्रशासन यदि इस मेले के आयोजन को लेकर आमूलचूल परिवर्तन करता है तो निश्चित ही प्रदेश की जीडीपी के लिए यह मेला और धार्मिक स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगा। बरहाल, यदि पूरे प्रदेश के देवी-देवता मां रेणुका जी और भगवान परशुराम जी के बुलावे पर इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर आते हैं तो निश्चित रूप से इसे बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।

    अब यदि इस मेले से होने वाली आमदनी की बात की जाए तो इस बार यह आंकड़ा केवल 79 लाख रुपए तक ही सिमटकर रह गया है। जबकि इस मेले के आयोजन में करीब 61 लाख रुपए का खर्चा आया। प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार मेले में इस वर्ष तीन लाख के आसपास लोग आए थे। यहां यह भी बताना जरूरी है कि नवरात्रों में लगने वाले मां बाला सुंदरी मंदिर त्रिलोकपुर में एक करोड़ से भी अधिक की इनकम हो जाती है।

    वही, उपायुक्त जिला सिरमौर आरके गौतम का कहना है कि इस विषय को लेकर पुजारियों से बात की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल झील नहीं बल्कि धार्मिक भावना के अनुसार इसे मां का दर्जा मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र रेणुका झील और भगवान परशुराम जी के तालाब के संरक्षण को लेकर निश्चित रूप से महत्वपूर्ण प्रयास किए जाएंगे।

  • सरकारी राशन ढुलाई में अग्रवाल फ्लोर मिल कालाअंब का बड़ा घोटाला

    सरकारी राशन ढुलाई में अग्रवाल फ्लोर मिल कालाअंब का बड़ा घोटाला

    HNN/ नाहन

    प्रदेश की भाजपा सरकार के दौरान सरकारी राशन की ढुलाई में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरटीआई एक्टिविस्ट रितेश गोयल के द्वारा ली गई आरटीआई में अग्रवाल फ्लोर मिल कालाअंब के घोटाले का बड़ा सबूत मिला है। आरटीआई से मिली जानकारी में रितेश गोयल ने बताया कि अग्रवाल फ्लोर मिल कालाअंब में है। इस फ्लोर मिल के द्वारा बीते दिनांक 11 जून 2020 को कालाअंब मिल से हिमाचल प्रदेश सिविल सप्लाई के गोदाम पांवटा साहिब के लिए सरकारी आटा भेजा गया था।

    यह आटा गाड़ी संख्या (एचपी 71-8205) जिसका जीआर नंबर 12139 था। जबकि दूसरा बिल 286 नंबर जिसका जीआर नंबर 12140 में क्विंटल आटा ले जाना दर्शाया गया है। इस आटे की रिसीविंग सिविल सप्लाई गोदाम पांवटा साहिब में 12 जून 2020 को दिखाई गई है। वही चौंकाने वाली बात सामने यह आई कि इसी ट्रक संख्या (एचपी 71 8205) में मंगला गुड्स कैरियर नाहन के द्वारा 11 जून 2020 को यानी सेम डेट पर चावल की लोडिंग और 12 जून 2020 को पांवटा साहिब सिविल सप्लाई के गोदाम में चावल की रिसीविंग दिखाई गई है।

    यानी आटा और चावल दोनों का वजन अगर आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार निकाला जाए तो 27 टन बनता है। जबकि मालवाहक ट्रक जिसका नंबर दिखाया गया है वह केवल 10 टन ही ले जा सकता है। इससे साफ जाहिर होता है कि चावल तो ले जाया गया मगर आटा लाना ले जाना और बिल कुछ फर्जी है। हैरानी तो इस बात की है कि इस बिल का अधिकारियों की मिलीभगत के साथ भुगतान भी हो चुका है। इस तरह के एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों मामले हैं।

    जिससे साफ जाहिर होता है यह घोटाला करोड़ों में जाता है। बड़ा सवाल तो यह भी उठता है कि यह बिना किसी भी सरकारी अधिकारी अथवा कर्मचारी की मिलीभगत के संभव ही नहीं था। इस करोड़ों के राशन ढुलाई घोटाले की शिकायत रितेश गोयल के द्वारा पीएमओ और सीएम हेल्पलाइन पर कई बार की गई। रितेश गोयल का कहना है कि कथित आरोपी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त प्रभावशाली व्यक्ति है। यही वजह है कि घोटाले के सबूत आरटीआई में अटेस्टेड कॉपी के साथ लिए जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

    इससे बड़ी हैरानी तो यह है कि सरकारी राशन में बड़े घोटाले के सबूत मिलने के बावजूद अभी तक दोनों फ्लोर मिल और ढुलाई करने वाली फर्म से अभी भी काम लिया जा रहा है। ऐसे में सरकारी तंत्र पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं। रितेश गोयल का कहना है कि यदि सरकारी तंत्र अभी भी इस पूरे घोटाले की सीबीआई से जांच नहीं करवाता है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उधर, रितेश गोयल के द्वारा आरटीआई की अटेस्टेड कॉपी से जुटाई गई जानकारी से खबर की पुष्टि की गई है।

  • अब नाहन मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात

    अब नाहन मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात

    जल्द ही एनएच-907 ए से मेडिकल कॉलेज तक बनेगा सेफ पैसेज

    HNN / नाहन

    नाहन मेडिकल कॉलेज को अभिशाप साबित होने वाले ट्रैफिक जाम से अब जल्द निजात मिलने वाली है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के द्वारा जल्द ही एनएच-907 ए से मेडिकल कॉलेज तक करीब 1 किलोमीटर की चौड़ी सड़क बनाया जाना प्रस्तावित हुआ है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के द्वारा इस सड़क निर्माण को लेकर लोक निर्माण विभाग के साथ रूपरेखा भी तय कर ली गई है। मेडिकल कॉलेज की ओर से प्रिंसिपल तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारी सोमवार को सड़क के लिए जमीन का निरीक्षण भी करेंगे।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह जमीन ब्लॉक कॉलोनी के नजदीक से देखी गई है। जहां पर मेडिकल कॉलेज की भी जमीन जुड़ती है। लोक निर्माण विभाग इस सड़क को बनाए जाने को लेकर सर्वे रिपोर्ट भी तैयार करने जा रहा है। अब यदि एक अलग से चौड़ी सड़क बन जाती है, तो इस मेडिकल कॉलेज के लिए नासूर साबित होने वाले ट्रैफिक जाम से बड़ी निजात मिलेगी। बता दें कि साल में कई ऐसे पर्व होते हैं जिनमें शहर की मुख्य सड़क पर जलसे और जुलूस होते हैं।

    जगन्नाथ रथ यात्रा, शिवरात्रि, गुरु पर्व आदि पर पूरे शहर में एक बड़ी भीड़ के साथ परिक्रमा होती है। इन सब के चलते नाहन मेडिकल कॉलेज व उसके अस्पताल तक ऐसे मरीज को समय पर पहुंचाने में दिक्कत हो जाती है, जिसकी लड़ाई कुछ सांसों के लिए चली होती है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन सरकार से भी कई बार एक अलग से सेफ पैसेज बनाए जाने की मांग कर चुका है। जानकारी तो यह भी है कि मेडिकल कॉलेज इस सड़क के लिए हर संभव प्रयास भी कर रहा है।

    बरहाल, लोक निर्माण विभाग के साथ होने वाले इसके प्राथमिक सर्वे के बाद निश्चित रूप से मेडिकल कॉलेज तक सड़क बनाए जाने की तमाम अड़चनें भी दूर हो जाएंगी। उधर, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ श्याम कौशिक ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि अलग से सड़क बनाए जाने को लेकर जमीन देखी जा चुकी है। वही, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ दलबीर सिंह राणा ने कहा कि आने वाले सोमवार को जगह का सर्वे किया जाएगा।

  • हेरिटेज नाहन शहर- गेटवे ऑफ सिरमौर, मगर पर्यटन से अछूता

    हेरिटेज नाहन शहर- गेटवे ऑफ सिरमौर, मगर पर्यटन से अछूता

    ब्यूटीफिकेशन के लिए एडीबी बैंक का हो चुका है प्राथमिक सर्वे मगर…..

    HNN / नाहन

    प्रदेश में पर्यटन का गेटवे कहलाने वाला ऐतिहासिक नाहन शहर पर्यटकों को आकर्षित कर पाने में नाकाम साबित हुआ है। दर्जनों ऐतिहासिक महत्त्व रखने वाली विरासतो के होने के बावजूद शहर केवल रिटायर्ड लोगों के रहने का ठिकाना मात्र बनकर रह गया है। कोई भी सरकार शहर के लिए ऐसी कोई भी योजना नहीं बना पाई है जिसको लेकर देश का अथवा विदेश का पर्यटक शहर को निहार सके। शहर में रियासत कालीन तालाब है, ऐसी हेरिटेज बिल्डिंग है जिनका बड़ा ऐतिहासिक महत्व है।

    शहर का ऐतिहासिक तंबू खाना हो या फिर उपायुक्त निवास और कार्यालय इसके अलावा फॉरेस्ट कंजरवेटर कार्यालय, लाल कोठी वगैरा-वगैरा सब पर सरकारी कब्जे हैं। यह वह विरासत हैं जो ना केवल देश के बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करने का माद्दा रखती हैं। अब यदि यही ऐतिहासिक बिल्डिंग अपनी हिस्ट्री के साथ हेरिटेज होटल का आकार लेती है तो ना केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि प्रदेश की जीडीपी में भी बढ़ोतरी होगी। शहर में पर्यटकों के लिए किसी भी ऐतिहासिक विरासत के साथ पार्किंग व्यवस्था है ही नहीं।

    अब यदि अन्य सरकारी अथवा गैर सरकारी पार्किंग की बात की जाए तो उनमें किराया बहुत ज्यादा है। पर्यटक जब शहर से होकर गुजरता है तो पार्किंग की समस्या को लेकर वह शहर में रुकने से परहेज करता है। यही नहीं अब यदि पर्यटक नाहन शहर में आता भी है, तो सबसे बड़ी समस्या उसको एक लग्जरी एकोमोडेशन की रहती है। शहर के पार्क नशेड़ी अथवा शराबियों का अड्डा बन चुके हैं। विला राउंड आशिकों की अश्लीलता के चलते बदनाम हो चुका है। ऐसे में नाहन शहर पर्यटकों को आकर्षित करें तो कैसे यह आज बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है।

    शहर की सबसे प्रमुख विरासत नाहन फाउंड्री है जोकि पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुकी है। स्थानीय विधायक के द्वारा इस फाउंड्री में एक क्राफ्ट विलेज के साथ ऑडिटोरियम बनाए जाने की योजना भी बनाई है। वही इस फाउंड्री में ऐसी मशीनरी हैं जो 100 साल से भी अधिक की उम्र पार कर चुकी हैं। ऐसे में इस फाउंड्री में रखा हर उपकरण कबाड़ नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक मॉन्यूमेंट बन चुका है। बावजूद इसके इसमें रखे उपकरणों आदि को कहीं पर भी संरक्षित कर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए संजोया नहीं गया है।

    फाउंड्री में अभी भी इतना स्पेस है कि शहर के तमाम कार्यालय यहां तक की उपायुक्त व एसडीएम कार्यालय आदि भी इसी फाउंड्री में बनाए जा सकते हैं। शहर में कुछ ऐतिहासिक मेले भी लगते हैं मगर यह मेले केवल स्थानीय स्तर पर ही सिमट कर रह चुके हैं। ऐतिहासिक महत्व के साथ यह मेले विदेशी और देश के पर्यटकों को आकर्षित कर सकें ऐसा कोई भी प्रयास अभी तक किसी भी सरकार के द्वारा नहीं किया गया है। शहर में ऐतिहासिक महत्व रखने वाला तंबू खाने का भवन भी है।

    यह वह तंबू खाना है जो ना केवल बड़े-बड़े राजा महाराजाओं के स्वागत में सक्रिय भूमिका निभाता था, बल्कि श्री गुरु गोविंद सिंह के स्वागत में भी इसी तंबू खाना के तंबू सजाए गए थे। ऐतिहासिक चौगान मैदान की रेलिंग पर अक्सर लोग बैठकर खेलों का आनंद उठाया करते थे। मगर आज रेलिंग की जगह नुकीले लोहे के जंगले लगा दिए गए हैं। अब यदि बात की जाए शहर के ब्यूटीफिकेशन की, तो स्थानीय विधायक के द्वारा बड़े व्यापक स्तर पर प्रयास भी किए गए। लगभग हर वार्ड में बच्चों के खेलने के लिए पार्क, पार्किंग आदि की व्यवस्थाएं भी करवाई गई।

    बावजूद इसके अभी भी शहर के अन्य ऐतिहासिक मॉन्यूमेंट्स के संरक्षण के साथ-साथ उसका ब्यूटीफिकेशन किया जाना जरूरी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पर्यटन विभाग के प्रयासों से शहर के ब्यूटीफिकेशन हेतु एडीबी बैंक की सहायता भी ली गई है। जानकारी के अनुसार एडीबी के द्वारा प्राथमिक सर्वे भी किया जा चुका है। चुनावों के परिणामों के बाद सरकार और स्थानीय भावी विधायक की दूरदर्शिता परी अब यह शहर टकटकी लगाए निहार रहा है।