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  • हरिपुरधार हादसा : कब जागेगा सिस्टम? चालक को ही जिम्मेदार मान लेना सच्चाई से मुंह मोड़ना होगा

    हरिपुरधार हादसा : कब जागेगा सिस्टम? चालक को ही जिम्मेदार मान लेना सच्चाई से मुंह मोड़ना होगा

    ओवरलोडिंग ने ली 14 जानें, 52 घायल—प्रशासनिक लापरवाही उजागर

    नाहन/ हरिपुरधार

    हरिपुरधार की गहरी खाई में गिरी निजी बस ने सिर्फ 14 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि सिरमौर में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक दावों की भी पोल खोल दी।

    शिमला से कुपवी जा रही इस बस में क्षमता से कहीं अधिक 66 यात्री सवार थे, जबकि पहाड़ी इलाकों की संकरी और जोखिम भरी सड़कें पहले ही अतिरिक्त भार झेलने की स्थिति में नहीं होतीं।

    हादसे में 14 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 52 लोग घायल हुए हैं।
    सवाल यह नहीं है कि दुर्घटना कैसे हुई, बल्कि यह है कि ऐसी स्थिति बनने दी ही क्यों गई। घना कोहरा, कड़ाके की ठंड और संकरी सड़क पर ओवरलोड बस का संचालन किसी तकनीकी चूक से ज्यादा, लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा नजर आता है।

    यह मान लेना कि केवल चालक ही इसका जिम्मेदार है, सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा, क्योंकि निजी बसों में ओवरलोडिंग बिना बस मालिकों की सहमति और परिवहन विभाग की अनदेखी के संभव नहीं हो सकती।

    विडंबना यह है कि जिस दिन यह हादसा हुआ, उसी दौरान आरटीओ सिरमौर सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम चला रहा था। मंचों से नियमों की बातें हो रही थीं, लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि एक ओवरलोड बस मौत बनकर खाई में जा गिरी।

    इससे साफ होता है कि सड़क सुरक्षा महज औपचारिक अभियानों से नहीं, बल्कि निरंतर और सख्त निगरानी से सुनिश्चित होती है।
    यह पहला मौका नहीं है जब सिरमौर में लापरवाही ने जानें ली हों। वर्ष 2018 में श्री रेणुका जी मेले के दौरान ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार के कारण बस हादसे में नौ लोगों की मौत हो चुकी है।

    तब भी जांच के आदेश हुए थे और सख्ती के दावे किए गए थे, लेकिन समय बीतने के साथ वे दावे कागजों तक ही सिमटकर रह गए। हरिपुरधार हादसा बताता है कि पूर्व की त्रासदियों से अब तक कोई ठोस सबक नहीं लिया गया।

    इस दुर्घटना के बाद आरटीओ की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बसों की नियमित फिटनेस जांच, पहाड़ी रूटों पर विशेष निगरानी और ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई अगर समय रहते होती, तो शायद इतनी बड़ी कीमत न चुकानी पड़ती।

    66 यात्रियों से भरी बस का बिना रोक-टोक संचालन अपने आप में सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।
    हादसे ने दुर्गम क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोर कड़ी को भी उजागर किया है।

    घायलों को समय पर उपचार दिलाने में स्थानीय लोग आगे आए, लेकिन सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे अस्पतालों की स्थिति एक बार फिर सामने आ गई। दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण और मेडिकल स्टाफ की तैनाती अब टाली नहीं जा सकती।

    हरिपुरधार हादसा सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब संवेदना से आगे बढ़कर ठोस समाधान करने होंगे।

    पहाड़ी सड़कों के सुधार, खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा उपाय, बसों की कड़ी जांच, ओवरलोडिंग पर जीरो टॉलरेंस और मजबूत आपातकालीन व्यवस्था ही भविष्य में ऐसे हादसों को रोक सकती है। अगर अब भी सबक नहीं लिया गया, तो अगली खबर फिर किसी खाई से आने का खतरा बना रहेगा।

    वही फोटो खींच कर दुर्घटना स्थल पर राजनीतिक टॉनिक लेने वाले जनप्रतिनिधियों को भी अब उन 14 मासूम जिंदगियों को जवाब देना होगा कि आखिर वोट जरूरी है या फिर जनता के लिए बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन। जाहिर सी बात है इस बड़ी चूक का ठीक रहा कहीं ना कहीं चालक के सिर्फ फूटेगा मगर चालक से ज्यादा जिम्मेवार वह परिवहन अधिकारी है जिसकी जिला में मौजूदगी के बाद 66 सावरिया एक निजी वाहन में भरकर चल रही थी।

  • यशवंत विहार में पार्कों के निर्माण और सफाई व्यवस्था को लेकर विधायक अजय सोलंकी से मिली कल्याण समिति

    यशवंत विहार में पार्कों के निर्माण और सफाई व्यवस्था को लेकर विधायक अजय सोलंकी से मिली कल्याण समिति

    अध्यक्ष संजय ठाकुर बोले– नक्शे के अनुसार हो पार्कों की निशानदेही; आवारा पशुओं और स्ट्रीट लाइट की समस्या पर भी घेरा प्रशासन

    नाहन:

    यशवंत विहार कल्याण समिति ने क्षेत्र की बदहाल सफाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। रविवार को समिति के अध्यक्ष संजय ठाकुर के नेतृत्व में दर्जनों सदस्यों ने विधायक अजय सोलंकी से मुलाकात कर उन्हें क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं से संबंधित एक मांग पत्र सौंपा।

    समिति ने दो-टूक शब्दों में मांग की है कि यशवंत विहार कॉलोनी के स्वीकृत नक्शे में जो पार्क दर्शाए गए हैं, प्रशासन तुरंत उनकी निशानदेही कर निर्माण कार्य शुरू करवाए, ताकि वर्षों से पार्क की सुविधा से वंचित कॉलोनी निवासियों को उनका हक मिल सके।

    ​विधायक के समक्ष सख्ती से मुद्दा उठाते हुए अध्यक्ष संजय ठाकुर ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कॉलोनी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, कूड़ा उठाने वाली गाड़ी का कोई निश्चित समय नहीं है और स्ट्रीट लाइटें खराब होने के कारण रात के समय कॉलोनी अंधेरे में डूबी रहती है।

    इसके अलावा, माता बाला सुंदरी मंदिर बनोग से कौलावालाभूड़ मार्ग पर लगातार हो रही पानी की लीकेज और सड़क तंग होने से लग रहे जाम ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। समिति ने आवारा पशुओं के आतंक से होने वाले संभावित हादसों पर भी गहरी चिंता जताई।

    ​विधायक अजय सोलंकी ने समिति की मांगों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि जनहित के इन मुद्दों पर किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तुरंत नगर परिषद, जल शक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को इन समस्याओं के स्थाई समाधान के निर्देश देने का भरोसा दिलाया।

    विधायक ने कहा कि कॉलोनी में पार्कों का निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही इन समस्याओं पर धरातल पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष को और तेज करेंगे।

  • ददाहू-पनार-बेचड़ का बाग सड़क का ‘मजेदार’ हुआ सफर: 18.60 करोड़ से संवरी सैनधार की लाइफलाइन

    ददाहू-पनार-बेचड़ का बाग सड़क का ‘मजेदार’ हुआ सफर: 18.60 करोड़ से संवरी सैनधार की लाइफलाइन

    पीएमजीएसवाई के तहत 21.50 किलोमीटर मार्ग का जीर्णोद्धार कार्य लगभग पूरा; सोलन और शिमला जाने वाले यात्रियों को मिली बड़ी राहत

    नाहन:

    सिरमौर जिला के सैनधार इलाके की लाइफलाइन कही जाने वाली ददाहू-पनार-बेचड़ का बाग सड़क पर अब सफर करना यात्रियों और वाहन चालकों के लिए बेहद सुगम और मजेदार हो गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत लगभग 18.60 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से इस 21.50 किलोमीटर लंबी सड़क का अपग्रेडेशन कार्य अब अपने अंतिम चरण में है।

    हाल ही में इस मार्ग पर टारिंग (तारकोल बिछाने) का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जिससे दशकों से खस्ताहाल सड़क और तंग रास्तों की समस्या से जूझ रहे हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है।

    इस परियोजना के तहत न केवल सड़क को चौड़ा किया गया है, बल्कि नमी वाले संवेदनशील हिस्सों पर इंटरलॉक टाइलें भी लगाई गई हैं ताकि सड़क लंबे समय तक सुरक्षित रहे। अक्सर देखा जाता है कि जिन स्थानों पर धूप कम लगती है या नमी ज्यादा रहती है, वहां तारकोल वाली सड़क जल्दी टूट जाती है, लेकिन विभाग ने इस बार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला है।

    ​भौगोलिक दृष्टि से यह सड़क अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिरमौर को जिला सोलन के ओच्छघाट से जोड़ती है। इसके साथ ही यह मार्ग बेचड़ का बाग से आगे बड़ू साहिब, खैरी और राजगढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों को भी आपस में कनेक्ट करता है।

    दशकों पुरानी इस सड़क की हालत पिछले कुछ वर्षों में काफी जर्जर हो गई थी और सड़क तंग होने के कारण दो वाहनों का एक साथ गुजरना भी चुनौतीपूर्ण था। निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार को चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और बरसात के कारण हुए भूस्खलन का भी सामना करना पड़ा, जिससे कई डंगे ध्वस्त हो गए थे, जिन्हें विभाग ने दोबारा मजबूती से तैयार करवाया है।

    अब सड़क पर पुलिया, कलवर्ट और डंगों का निर्माण कार्य तकरीबन पूरा हो चुका है और वर्तमान में केवल पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज जैसे छुटपुट फिनिशिंग कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।

    ​इस सड़क के सुधरने से सैनधार क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक पंचायतों की हजारों की आबादी सीधे तौर पर लाभान्वित हो रही है। ददाहू, राजगढ़, बड़ू साहिब, बागथन और सराहां जाने वाले सैकड़ों वाहन चालक अब इसी सुगम मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।

    विशेष रूप से बड़ू साहिब आने वाले बाहरी राज्यों के पर्यटकों के लिए भी यह सड़क अब पहली पसंद बन गई है क्योंकि सोलन और शिमला जाने के लिए यह एक ‘शॉर्टकट’ मार्ग प्रदान करती है।

    लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता ई. दलीप चौहान ने पुष्टि की है कि सड़क का जीर्णोद्धार कार्य लगभग पूरा हो चुका है और टारिंग के बाद अब शेष बचे छोटे-मोटे कार्यों को तेजी से निपटाया जा रहा है, जिससे भविष्य में आवाजाही और भी सुगम और सुरक्षित हो जाएगी।

  • ​⚖️ हिरासत में हिंसा व्यवस्था पर ‘बड़ा दाग’, इसे बर्दाश्त नहीं करेगा देश/ सुप्रीम कोर्ट​

    ​⚖️ हिरासत में हिंसा व्यवस्था पर ‘बड़ा दाग’, इसे बर्दाश्त नहीं करेगा देश/ सुप्रीम कोर्ट​

    अमरीका की ओपन एयर जेलों और निजी जेलों का भी हुआ जिक्र मगर..

    नई दिल्ली​

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा और मौतों पर अत्यंत कठोर टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने इन घटनाओं को देश की न्यायिक और कानून व्यवस्था पर एक ‘बड़ा दाग’ बताते हुए साफ कहा कि भारत अब किसी भी परिस्थिति में ऐसी वारदातों को स्वीकार नहीं करेगा।

    ​न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों के कार्यान्वयन में आ रही विसंगतियों से जुड़े एक मामले की स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही थी।

    इस दौरान अदालत ने राजस्थान में केवल आठ महीनों के भीतर हुई 11 हिरासत मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की।​बेंच ने सख्त लहजे में कहा, “हिरासत में मौतें नहीं हो सकतीं। यह पूरी व्यवस्था पर एक धब्बा है, और देश किसी भी हालत में इसे अब और बर्दाश्त नहीं करेगा।

    ​⚠️ केंद्र सरकार पर नाराजगी, अनुपालन रिपोर्ट न देने पर सवाल​

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हिरासत में हुई मौतों को अनुचित ठहराया, लेकिन कोर्ट इस बात से नाराज़ दिखा कि केंद्र सरकार ने अभी तक इस मामले में अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है।​

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को हल्के में लेने का आरोप लगाते हुए तीखे सवाल किए। इसके बाद केंद्र सरकार ने तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का वादा किया।

    यह मामला 2018 और 2020 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश से जुड़ा है, जिसके तहत सभी पुलिस थानों, सीबीआई, ईडी, और एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कार्यालयों में फुल कवरेज वाले सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया था।

    ​अदालत को यह जानकारी दी गई कि शीर्ष अदालत के आदेशों के बावजूद केवल 11 राज्यों ने ही अब तक अपनी रिपोर्ट दाखिल की है, जबकि कई राज्यों और केंद्र के विभागों ने कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, यह बताया गया कि तीन केंद्रीय एजेंसियों में सीसीटीवी लग चुके हैं।​

    ओपन एयर जेल और अमेरिकी मॉडल पर चर्चा​

    मामले की सुनवाई के दौरान, बातचीत में अमेरिका के जेल मॉडल का उल्लेख हुआ, जहाँ कुछ स्थानों पर सीसीटीवी की लाइव स्ट्रीमिंग और निजी जेलों का प्रावधान है।

    सॉलिसिटर जनरल ने सीएसआर फंड से निजी जेल बनाने के सुझाव की बात कही। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि वह पहले से ही ‘ओपन एयर प्रिजन मॉडल’ पर एक अन्य मामले की सुनवाई कर रहा है, जो जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ और हिंसा जैसे मुद्दों को कम करने में भी सहायक हो सकता है।

    ​ इसी दौरान, शीर्ष कोर्ट ने मध्य प्रदेश के प्रयासों की सराहना की और कहा कि राज्य ने अत्यंत सराहनीय काम किया है, जहाँ प्रत्येक पुलिस स्टेशन और चौकी को जिला नियंत्रण कक्ष से सीधे लाइव जोड़ा गया है।

  • नशे के खिलाफ जंग में इनर व्हील क्लब क्लासिक नाहन ने थामा पुलिस का हाथ

    नशे के खिलाफ जंग में इनर व्हील क्लब क्लासिक नाहन ने थामा पुलिस का हाथ

    एसपी सिरमौर को सौंपा समर्थन, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी छेड़ा अभियान

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन:

     नशे के बढ़ते जाल को तोड़ने के लिए जिला सिरमौर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान को इनर व्हील क्लब क्लासिक नाहन का पुरजोर समर्थन मिला है। क्लब की अध्यक्ष आशा भारद्वाज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिरमौर निश्चिंत सिंह नेगी से मुलाकात की और उन्हें अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।

    क्लब की अध्यक्ष आशा भारद्वाज और उनकी सहयोगी कार्यकर्ताओं ने एसपी सिरमौर का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर आशा भारद्वाज ने कहा कि जिला सिरमौर पुलिस नशे के खिलाफ जिस दृढ़ता से कार्रवाई कर रही है, वह अत्यंत सराहनीय है।

    उन्होंने कहा कि क्लब पुलिस के इस महत्वपूर्ण कार्य में हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।प्रतिनिधिमंडल ने एसपी सिरमौर के साथ जिले में नशे की समस्या और इसके दुष्प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। आशा भारद्वाज ने बताया कि इनर व्हील क्लब क्लासिक नाहन केवल नशे के खिलाफ ही नहीं, बल्कि अन्य सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

    क्लब द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, जिनमें लोगों को नशीले पदार्थों के सेवन के खतरों और सामाजिक बुराइयों के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जाती है।

    उन्होंने बताया कि क्लब शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी लगातार योगदान दे रहा है। जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना क्लब के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

    नशे के खिलाफ पुलिस के अभियान में सहयोग करना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एसपी सिरमौर निश्चिंत सिंह नेगी ने इनर व्हील क्लब क्लासिक नाहन के इस समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज के सभी वर्गों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है और क्लब का यह कदम निश्चित रूप से इस अभियान को और मजबूती प्रदान करेगा। 

    उन्होंने क्लब को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया और उम्मीद जताई कि मिलकर वे जिले को नशा मुक्त बनाने में सफल होंगे।

    बरहाल इनर व्हील क्लब क्लासिक नाहन के इस पहल से यह स्पष्ट है कि समाज का हर वर्ग अब नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट हो रहा है और एक स्वस्थ एवं प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस और सामाजिक संगठनों के इस समन्वय से निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

    इस दौरान क्लब की महसचिव सीमा वर्मा, नीलम शर्मा, रचना ठाकुर , अलका जवनेजा आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।

  • आजादी के 78 साल बीते फिर भी नेडा गांव के लोग सर पर पानी ढोने को मजबूर

    आजादी के 78 साल बीते फिर भी नेडा गांव के लोग सर पर पानी ढोने को मजबूर

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ शिलाई

    आजादी के 78 साल बीते फिर भी नेडा गांव के लोग सर पर पानी ढोने को मजबूरशैलेश सैनी नाहन-देश को आजादी मिले 78 साल बीत गए हैं बावजूद इसके प्रदेश में अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां पीने की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

    गर्मियों के मौसम शुरू होते ही गिरिपार के नेडा गांव के लोग पीने के पानी के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं। लगभग 40 परिवार वाले इस गांव में कभी कभार ही पानी आता है। ऐसे में गांव की औरतों को लगभग 2 किलोमीटर खड़ी चढ़ाई चढ़कर पानी ढोने को मजबूर है।

    ग्रामीणों का कहना है कि जल शक्ति विभाग की लापरवाही की वजह से उन्हें खड्ड का गंदा पानी पीना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों कहना हे की गर्मियां बढ़ाने के साथ भी पहाड़ों पर पीने के पानी की समस्याएं सामने आने लगी है सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में कई गांव में पेयजल समस्याएं शुरू हो गई है।

    क्षेत्र नेडा गांव के लोग पीने के पानी के लिए कड़ी मशक्कत करने को मजबूर है। हालांकि इस गांव को उठाऊ पेयजल योजना से जोड़ा गया है मगर, कर्मचारियों के लापरवाही की वजह से ग्रामीणों को कभी कभार ही पानी मिल पाता है। जितनी सप्लाई आती है वह इंसानों और पशुओं की जरूरत को पूरा नहीं कर पाती।

    महीने के लगभग 20 दिन तो नेडा गांव में पानी की सप्लाई नहीं आती है। ऐसे में गांव की महिलाओं को 2 किलोमीटर नीचे उतर कर खड्ड से दूषित पानी लेकर आती हैं। गांव की महिलाएं सर पर पानी के बड़े-बड़े बर्तन रखकर खड़ी चढ़ाई चढ़ कर जरूर का पानी घरों पहुंचती हैं।

    यह तस्वीर नेडा गांव की मजबूर महिलाओं की हैं। महिलाओं को पानी के बर्तन के नीचे दिन में 10 से 15 बार यह चढ़ाई चड़नी पड़ती है। बुजुर्ग महिलाओं के हालत देखिए, हाथों में डंडा लेकर सिर पर पानी का बर्तन उठाएं चढ़ाई पड़ रही है।

    यहां पानी को लेकर पिछले दो महीना से यह स्थिति बनी हुई है। महिलाओं के इतने बदतर हालत देखकर भी जल शक्ति विभाग को कुव्यवस्था को दुरुस्त नहीं कर रहा है। जल शक्ति विभाग की लापरवाही की वजह से ग्रामीण महिलाओं का जीवन पानी की जरूरत है पूरा करने में ही बीत रहा है।

    ग्रामीण बार बार विभाग और प्रशासन से उनके गांव को पानी सप्लाई पहुंचने की गुहार लगा रहे हैं। मगर सुनवाई नहीं हो रही है।

  • जमटा से बिरला सड़क का निर्माण हुआ शुरू

    जमटा से बिरला सड़क का निर्माण हुआ शुरू

    प्रशासन के हुए हैं आदेश बिरला की ओर जाने वाले वाहन जाएंगे यहां से होकर

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन

    जिला दंडाधिकारी सिरमौर सुमित खिम्टा ने जमटा से बिरला सड़क के उन्नयन कार्य के चलते यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट करने के आदेश जारी किए है।

    डीसी सिरमौर ने बताया कि सड़क के उन्नयन कार्य शुरू कर दिया गया है। चूंकि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने प्रशासन से सिफारिश की थी कि रूट डायवर्ट करने के लिए प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएं।

    लिहाजा आम जनता को असुविधा न हो इसके लिए 08 अप्रैल से 20 अप्रैल, 2025 तक आपातकालीन मामलों/वाहनों को छोड़कर, सभी वाहनों की अवाजाही पंजाहल-मलगांव, जैंथल घाट-ददाहू, जैंथल घाट-नाहन वाया धगेडा-रामाधौन (बायीं ओर) मार्गो से की जाएगी।

  • कृषि मंत्री ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड  के अध्यक्ष से की यह बड़ी चर्चा 

    कृषि मंत्री ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड  के अध्यक्ष से की यह बड़ी चर्चा 

    हिमाचल प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ धर्मशाला

    कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार की अध्यक्षता में उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक मलेंद्र राजन ने गुजरात के आनंद स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड  का दौरा किया।

    यह दौरा हिमाचल प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के समग्र विकास, मूल्य संवर्धन, एवं पशुपालन से संबंधित चुनौतियों के समाधान हेतु एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
    प्रतिनिधिमंडल ने एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मनीष शाह से विस्तृत बातचीत की, जिसमें हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय भूगोल को ध्यान में रखते हुए डेयरी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, पशु चारे की उपलब्धता, रोग नियंत्रण, उत्पादकता में वृद्धि, विपणन नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण, एवं किसान हितैषी योजनाओं पर चर्चा की गई।

    डॉ. शाह ने डेयरी की विभिन्न पहलों व तकनीकी नवाचारों की जानकारी दी, जो हिमाचल जैसे राज्यों में भी लागू किए जा सकते हैं।
    इस महत्वपूर्ण बैठक में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ से डॉ. संदीप ठाकुर, प्रबंधक (विपणन), तथा प्रवीन शर्मा, उप प्रबंधक भी उपस्थित रहे।

    उन्होंने राज्य में डपसामिक द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, विपणन रणनीतियों, एवं आगामी परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने डेयरी से तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग का आग्रह भी किया।

    प्रतिनिधिमंडल ने इस अवसर पर अमूल चॉकलेट प्लांट, आनंद का भी भ्रमण किया। वहां उन्होंने चॉकलेट निर्माण की आधुनिक प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली, और ब्रांड निर्माण की रणनीतियों का अवलोकन किया।

    यह भ्रमण राज्य में मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों की संभावनाओं को बढ़ावा देने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।

    कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि यह दौरा हिमाचल प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को बेहतर प्रशिक्षण, बाजार, और मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

  • Shri Renuka Ji Dam Project / राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय श्री रेणुकाजी बांध परियोजना की तमाम आपत्तियां क्लीयर

    Shri Renuka Ji Dam Project / राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय श्री रेणुकाजी बांध परियोजना की तमाम आपत्तियां क्लीयर

    प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट नियुक्ति की प्रक्रिया तेज, जल्द शुरू होगा बांध निर्माण कार्य


    श्री रेणुकाजी बांध परियोजना (Shri Renuka Ji Dam Project) की आपत्तियां क्लीयर

    परियोजना की शुरुआत की उम्मीदें
    केंद्र सरकार की राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय श्री रेणुकाजी बांध परियोजना (Shri Renuka Ji Dam Projec) के निर्माण का कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीदें परवान चढ़नी शुरू हो गई हैं। मिनिस्ट्री आफ एनवायरमेंट की ओर से फोरेस्ट क्लीयरेंस को लेकर जो आपत्तियां लगाई गई थीं, उन आपत्तियों को एचपीपीसीएल ने लगभग क्लीयर कर दिया है। यही नहीं, कार्पोरेशन द्वारा अपनी अंतिम रिपोर्ट बनाकर मिनिस्ट्री आफ एनवायरमेंट को भी भेज दी है।


    निर्माण कार्य में कोई बाधा नहीं

    सीडब्ल्यूसी द्वारा कंसलटेंसी नियुक्ति
    विभागीय सूत्रों की मानें तो निर्माण कार्य में तमाम बाधाएं अब क्लीयर हो चुकी हैं। सीडब्ल्यूसी की ओर से अब डिजाइन कंसलटेंसी जो सेंट्रल वाटर कमीशन है, उनके द्वारा जल्द ही डैम निर्माण को लेकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट को नियुक्ति दे दी जाएगी। कंसलटेंट के नियुक्त होते ही अंतिम डिजाइन पर मुहर लगने के बाद पहले फेज के निर्माण के लिए ग्लोबल टेंडर आमंत्रित होंगे। ये टेंडर आने वाले तीन से पांच माह के भीतर ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए प्रकाशित होंगे।


    पहले चरण का निर्माण कार्य

    डायवर्शन टनल का निर्माण
    टेंडर प्रक्रिया के बाद पहले चरण का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पहले चरण के निर्माण कार्य में डायवर्शन टनल का निर्माण किया जाना है, जिसमें तीन सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। ये सभी सुरंगे करीब 1,500-1,500 मीटर लंबी होंगी। इन सुरंगों के माध्यम से ही मुख्य गिरि नदी के जल प्रवाह को बदलकर बांध का निर्माण किया जाएगा।


    बांध की विशेषताएँ और उद्देश्य

    Shri Renuka Ji Dam Project

    रॉकफिल बेस बांध का निर्माण
    बता दें कि यह रॉकफिल बेस बांध है, जिसकी रिवर बेड से 148 मीटर ऊंचाई होगी। करीब 28 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण डैम बनने के साथ होगा। असल में इस बांध (Shri Renuka Ji Dam Project) का निर्माण कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किए गए शिलान्यास के बाद हो जाना था, लेकिन केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री आफ एनवायरमेंट के द्वारा फोरेस्ट क्लीयरेंस को लेकर कुछ आपत्तियों को लेकर जवाब मांगा गया था। लिहाजा, एचपीपीसीएल ने इन तमाम आपत्तियों को दूर कर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है।


    बांध के निर्माण से होने वाले लाभ

    जल आपूर्ति और पावर प्रोजेक्ट
    बहरहाल, अब वो दिन दूर नहीं कि प्रदेश को देश की सबसे बड़ी ऐसी सौगात मिलेगी, जिससे न केवल दिल्ली की प्यास बुझेगी, बल्कि कई राज्यों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी भी गिरि नदी का उपलब्ध होगा। इसके साथ-साथ डैम (Shri Renuka Ji Dam Project) के निर्माण कार्य के पूरा होते ही 40 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट भी मिलेगा, जो तमाम अधिकारों के साथ प्रदेश का होगा।


    एचपीपीसीएल निदेशक की टिप्पणी

    आखिरी रिपोर्ट और स्टेज टू क्लीयरेंस
    उधर, निदेशक एचपीपीसीएल हरिकेष मीणा ने बताया कि मिनिस्ट्री आफ एनवायरमेंट की ओर से फोरेस्ट क्लीयरेंस को लेकर लगाई गई आपत्तियों को दूर कर दिया है। इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी है। जल्द ही बांध निर्माण को लेकर स्टेज टू क्लीयरेंस मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में डिजाइन कंसलटेंट सेंट्रल वाटर कमीशन है। जैसे ही कंसलटेंट ड्रॉइंग देगा, इसके तुरंत बाद डायवर्शन टनल के निर्माण के लिए ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।

  • एचआरटीसी बस पलटने से 3 यात्री घायल, जांच जारी

    एचआरटीसी बस पलटने से 3 यात्री घायल, जांच जारी

    HNN/शिमला

    शिमला के चौपाल उपमंडल के सरांह बस स्टॉप में सोमवार सुबह एक एचआरटीसी बस पलट गई, जिसमें 3 यात्री घायल हो गए। बस में 6 यात्री सवार थे, जिनमें से 3 को चोटें आई हैं। घायलों में संतोष शर्मा, धर्म प्रकाश और अनिल शामिल हैं। उन्हें सिविल अस्पताल चौपाल लाया गया, जहां से 2 घायलों को शिमला रेफर किया गया।

    एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि परिचालक सहित 2 सवारियों को हल्की चोटें आई हैं। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन की ओर से तीनों घायलों को 2-2 हजार रुपए बतौर फौरी राहत प्रदान किए गए हैं।बस सरांह से चौपाल आ रही थी, लेकिन सरांह बस स्टॉप पर ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे के समय बस में चालक पवन कुमार और परिचालक धर्म प्रकाश सहित 6 यात्री सवार थे।

    घायलों को सिविल अस्पताल चौपाल लाया गया, जहां से 2 घायलों को शिमला रेफर किया गया। एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि परिचालक सहित 2 सवारियों को हल्की चोटें आई हैं। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन की ओर से तीनों घायलों को 2-2 हजार रुपए बतौर फौरी राहत प्रदान किए गए हैं।