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  • चमियाणा में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर और बुजुर्गों के लिए विशेष ओपीडी सुविधा शुरू होगी

    चमियाणा में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर और बुजुर्गों के लिए विशेष ओपीडी सुविधा शुरू होगी

    प्रदेश सरकार बच्चों और वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ व आधुनिक बनाने की दिशा में नई पहल कर रही है। पल्स पोलियो अभियान के माध्यम से राज्य के पोलियो-मुक्त दर्जे को बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

    शिमला/चमियाणा

    सघन पल्स पोलियो अभियान का राज्य स्तरीय शुभारम्भ
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में राज्य स्तरीय सघन पल्स पोलियो अभियान का शुभारम्भ करते हुए बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाई। उन्होंने अभियान के सफल संचालन में जुटे चिकित्सकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा, एएनएम, शिक्षकों और प्रशासन की सराहना की।

    चमियाणा में खुलेगा एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान, चमियाणा में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र में बच्चों के उपचार के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं और आधुनिक आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा।

    वृद्धजनों के लिए अस्पतालों में विशेष ओपीडी स्लॉट
    प्रदेश के अस्पतालों में 70 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों के लिए ओपीडी परामर्श हेतु विशेष स्लॉट निर्धारित किए जाएंगे। इससे बुजुर्ग मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें सुविधाजनक उपचार मिल सकेगा।

    स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर जोर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं। चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए विश्वस्तरीय तकनीक, आधुनिक मशीनें और आधारभूत ढांचे का विकास किया जा रहा है, साथ ही रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जा रहा है।

    पोलियो-मुक्त दर्जा बनाए रखने का लक्ष्य
    सघन पल्स पोलियो अभियान के तहत प्रदेशभर में हजारों पोलियो बूथों पर शून्य से पांच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को टीके लगाए जाएंगे। मॉप-अप अभियान के दौरान घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों, प्रवासी परिवारों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।

    अत्याधुनिक तकनीक और नई चिकित्सा सुविधाएं
    मुख्यमंत्री ने बताया कि चमियाणा अस्पताल और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की गई है। प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में एमआरआई, सीटी स्कैन और एक्स-रे जैसी आधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं तथा आधुनिक ट्रॉमा सेंटर भी स्थापित किए गए हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला, अब सुरक्षित रहेंगे वन भूमि पर बसे सेब के बगीचे

    सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला, अब सुरक्षित रहेंगे वन भूमि पर बसे सेब के बगीचे

    शिमला/नई दिल्ली:

    हिमाचल प्रदेश के लाखों सेब बागवानों के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से एक ऐसी राहत भरी खबर आई है, जिसने पूरे प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ दी है। लंबे समय से अपनी आजीविका और पहचान बचाने की जंग लड़ रहे बागवानों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है,

    जिसमें वन भूमि पर लगे सेब के बगीचों को हटाने और पेड़ों को काटने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले ने उन हजारों परिवारों को उजड़ने से बचा लिया है, जो दशकों से इन बगीचों के भरोसे अपना जीवनयापन कर रहे थे।

    आजीविका के अधिकार को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता

    यह पूरी कानूनी लड़ाई शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर की याचिका के बाद एक निर्णायक मोड़ पर पहुंची। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से यह पक्ष रखा गया कि छोटे और सीमांत बागवानों के बगीचों को उजाड़ना सीधे तौर पर उनके मौलिक अधिकारों और रोजी-रोटी का गला घोंटने जैसा है।

    अदालत ने इस मानवीय पहलू को स्वीकार किया कि हजारों लोगों को केवल तकनीकी नियमों के आधार पर बेरोजगार नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि हाई कोर्ट का पिछला फैसला जरूरत से ज्यादा सख्त था, जिसमें गरीब किसानों के भविष्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया था।

    बागवानी और पर्यावरण के बीच नए संतुलन की शुरुआत

    सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब वन विभाग की उन कार्रवाइयों पर पूरी तरह रोक लग गई है, जिसके तहत फलदार पेड़ों को काटा जा रहा था और बगीचों के चारों ओर तारबंदी की जा रही थी। पिछले कुछ वर्षों में शिमला, कुल्लू और मंडी जैसे सेब बहुल जिलों में इस तरह की कार्रवाई से बागवानों में दहशत का माहौल था।

    कोर्ट के इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण की रक्षा जरूरी है, लेकिन वह उन लोगों की बलि देकर नहीं होनी चाहिए जिनका अस्तित्व ही इन पहाड़ियों और पेड़ों से जुड़ा है।

    छोटे बागवानों के लिए बना सुरक्षा कवच

    इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन छोटे किसानों को मिलेगा, जिनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में एक ऐसी उदार और मानवीय नीति तैयार करे, जिसमें छोटे बागवानों को संरक्षण मिले।

    कोर्ट का मानना है कि प्रशासन को उन लोगों के बीच फर्क करना चाहिए जो अपनी भूख मिटाने के लिए खेती कर रहे हैं और उन लोगों के बीच जिन्होंने व्यावसायिक लाभ के लिए अवैध कब्जे किए हैं। इस दिशा में अब सरकार को नई नियमावली तैयार करनी होगी।

    पूरे प्रदेश में उत्साह और जश्न का माहौल

    सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के बाद ऊपरी हिमाचल की वादियों में जश्न का माहौल है। बागवान संगठनों ने इसे सत्य और धैर्य की जीत बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल बगीचों को बचाएगा, बल्कि हिमाचल की डगमगाती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा।

    अब बागवान बिना किसी कानूनी डर के अपने बगीचों की देखभाल कर सकेंगे और आने वाली फसल की तैयारी में जुट सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश भविष्य में भी बागवानी और वन संरक्षण से जुड़े मामलों के लिए एक नजीर साबित होगा।

  • जगाधरी–पौंटा साहिब रेल लाइन पर झटका, कम ट्रैफिक बना अड़चन ; पीएम स्वनिधि से स्ट्रीट वेंडर्स को बड़ा लाभ

    जगाधरी–पौंटा साहिब रेल लाइन पर झटका, कम ट्रैफिक बना अड़चन ; पीएम स्वनिधि से स्ट्रीट वेंडर्स को बड़ा लाभ

    जगाधरी और पौंटा साहिब के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन को लेकर संसद में स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। वहीं, पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल भुगतान पर करोड़ों रुपये का लाभ मिलने की जानकारी भी दी गई।

    दिल्ली

    कम ट्रैफिक के कारण नई रेल लाइन को मंजूरी नहीं

    केन्द्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में सांसद इंदु बाला गोस्वामी के प्रश्न के उत्तर में बताया कि जगाधरी और पौंटा साहिब के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन के लिए सर्वे पूरा किया जा चुका है, लेकिन कम ट्रैफिक के आकलन के कारण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग 62 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के निर्माण को फिलहाल मंजूरी नहीं दी गई है।

    रेल परियोजनाएं ट्रैफिक और उपयोगिता के आधार पर होती हैं तय

    रेलवे मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी नई रेल परियोजना को ट्रैफिक की संभावनाओं, मार्ग की लाभप्रदता, कंजेस्टेड लाइनों पर दबाव और रेलवे की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही स्वीकृति दी जाती है। इन मानकों पर विचार करने के बाद ही जगाधरी–पौंटा साहिब रेल लाइन को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

    पीएम स्वनिधि योजना से स्ट्रीट वेंडर्स को करोड़ों का कैशबैक

    इसी क्रम में केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्यसभा में जानकारी दी कि पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत जून 2020 से अब तक स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल माध्यम से ऋण चुकाने पर कुल 242 करोड़ रुपये का कैशबैक प्रदान किया गया है।

    1.27 करोड़ आवेदन, लाखों को मिला ऋण लाभ

    उन्होंने बताया कि योजना के तहत अब तक 1.27 करोड़ से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स से ऋण के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 68.89 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनके तहत कुल 99.07 लाख रुपये की राशि वितरित की गई है।

    समय पर ऋण चुकाने पर ब्याज में सब्सिडी

    मंत्री ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत समय सीमा के भीतर ऋण चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को ब्याज पर सात प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। यह ब्याज सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है।

    डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन

    उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योजना के तहत डिजिटल माध्यम से ऋण अदायगी करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को प्रति वर्ष अधिकतम 1200 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल भुगतान अपनाने, अपनी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत करने और भविष्य में बड़े ऋण प्राप्त करने में सहायता मिल रही है, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है।

  • हिमाचल के सरकारी स्कूलों में अब गाइड-हेल्पबुक से पढ़ाई पर पूरी तरह रोक, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    हिमाचल के सरकारी स्कूलों में अब गाइड-हेल्पबुक से पढ़ाई पर पूरी तरह रोक, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षण पद्धति को एकरूप और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त निर्णय लिया है। अब कक्षा शिक्षण के दौरान गाइड, हेल्पबुक या किसी भी अनधिकृत पुस्तक का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और नियम तोड़ने वाले शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    शिमला

    कक्षा में केवल एनसीईआरटी पुस्तकें ही मान्य
    स्कूल शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कक्षा शिक्षण के लिए केवल एनसीईआरटी की निर्धारित पाठ्य पुस्तकों का ही उपयोग किया जाएगा। विभाग के अनुसार कुछ स्कूलों में शिक्षकों द्वारा गाइड और हेल्पबुक से पढ़ाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिससे विद्यार्थियों की सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो रही थी।

    प्रधानाचार्य और मुख्याध्यापक होंगे जिम्मेदार
    निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों में स्कूल स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को सौंपी गई है। यदि कोई शिक्षक कक्षा में हेल्पबुक या गाइड से पढ़ाते हुए पाया जाता है, तो संबंधित स्कूल प्रमुख को उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

    औचक निरीक्षण के निर्देश
    शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूलों का औचक निरीक्षण करें। यदि निरीक्षण के दौरान निर्देशों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

    बच्चों की मौलिक सोच पर पड़ रहा था असर
    विभाग का मानना है कि हेल्पबुक बच्चों को तैयार उत्तर उपलब्ध कराती हैं, जिससे उनमें प्रश्न पूछने, तर्क करने और विश्लेषण करने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती। शिक्षा का उद्देश्य केवल उत्तर रटाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समझ और जिज्ञासा पैदा करना है।

    पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश
    शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि इस विषय पर पहले भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ स्कूलों में अनियमितताएं सामने आती रही हैं। बार-बार चेतावनी के बावजूद नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया गया है।

    गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर रहेगा फोकस
    निदेशालय ने कहा कि अनधिकृत पुस्तकों का प्रयोग शिक्षण नवाचार को सीमित करता है और पाठ्यक्रम की एकरूपता को प्रभावित करता है। इसलिए अब पूरे प्रदेश में कक्षा शिक्षण के दौरान केवल मान्य एनसीईआरटी पुस्तकों के माध्यम से ही पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • सुप्रीम कोर्ट ने सेब बागों को हटाने का हाईकोर्ट आदेश रद्द किया, लाखों हिमाचली बागवानों को बड़ी राहत

    सुप्रीम कोर्ट ने सेब बागों को हटाने का हाईकोर्ट आदेश रद्द किया, लाखों हिमाचली बागवानों को बड़ी राहत

    सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के लाखों सेब उत्पादकों को बड़ी राहत देते हुए वन भूमि पर लगाए गए फलदार बागों को हटाने संबंधी हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इसे समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों और भूमिहीन लोगों को प्रभावित करने वाला गंभीर निर्णय बताया।

    शिमला

    शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति
    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश से समाज के सबसे कमजोर वर्ग, विशेषकर सीमांत किसान और भूमिहीन परिवार, बुरी तरह प्रभावित होते। अदालत ने माना कि इस तरह का आदेश न्यायिक विवेक के बजाय नीति निर्धारण के क्षेत्र में हस्तक्षेप था।

    फलदार पेड़ों की कटाई को बताया अनुचित
    पीठ ने कहा कि फलदार पेड़ों को हटाने का निर्देश देना केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी संवेदनशील विषय है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नीति से जुड़े मामलों में अदालतों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

    राज्य सरकार को केंद्र से समाधान निकालने के निर्देश
    सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह कल्याणकारी राज्य की भावना को ध्यान में रखते हुए गरीब, आपदा-प्रभावित और भूमिहीन परिवारों के हित में एक व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार के समक्ष रखे, ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके।

    वन भूमि पर कार्रवाई का अधिकार बरकरार
    हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि वन भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में राज्य सरकार को कानून के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन यह कार्रवाई मानवीय और संतुलित दृष्टिकोण के साथ होनी चाहिए।

    मॉनसून में कटाई से खतरे की चेतावनी
    याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि मॉनसून के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ काटने से भूस्खलन, मिट्टी कटाव और पर्यावरणीय असंतुलन का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। अदालत ने इन आशंकाओं को गंभीरता से लिया।

    आजीविका और पर्यावरण से जुड़ा मसला
    अदालत के समक्ष यह भी रखा गया कि सेब के बाग केवल फसल नहीं, बल्कि हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये बाग मिट्टी को स्थिर रखने, जैव विविधता बनाए रखने और हजारों परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    पहले ही हजारों पेड़ काटे जा चुके थे
    सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विभिन्न इलाकों में हजारों सेब के पेड़ पहले ही काटे जा चुके थे और यदि आदेश लागू रहता, तो राज्य भर में बड़े पैमाने पर फलदार बाग नष्ट हो जाते, जिससे व्यापक जन असंतोष फैलता।

    किसान संगठनों ने फैसले को बताया संघर्ष की जीत
    सेब उत्पादक संघ के सचिव संजय चौहान ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह न्याय किसानों और बागवानों की मेहनत के सम्मान की दिशा में बड़ा कदम है। किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा ने इसे किसानों, बागवानों और गरीब वर्ग के लंबे संघर्ष की नैतिक जीत बताया।

  • 1971 युद्ध विजय दिवस : भारतीय सेना के शौर्य को नमन, हिमाचल के 261 वीरों को श्रद्धांजलि

    1971 युद्ध विजय दिवस : भारतीय सेना के शौर्य को नमन, हिमाचल के 261 वीरों को श्रद्धांजलि

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीरगति को प्राप्त भारतीय सैनिकों को नमन करते हुए उनके बलिदान को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि यह विजय भारत की सैन्य शक्ति, एकता और नेतृत्व क्षमता का ऐतिहासिक प्रतीक है।

    शिमला

    भारतीय सेना ने रचा था शौर्य का इतिहास
    विनय कुमार ने कहा कि 1971 में भारतीय सेना ने शौर्य और पराक्रम की मिसाल कायम करते हुए देश को गौरवान्वित किया। भारत पर थोपे गए युद्ध का सेना ने साहस के साथ सामना किया और पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की।

    वैश्विक स्तर पर भारत की शक्ति हुई स्थापित
    उन्होंने कहा कि इस विजय ने न केवल भारत की एकता और अखंडता को मजबूत किया, बल्कि विश्व पटल पर भारत की सामरिक शक्ति को भी स्थापित किया। यह विजय आज भी हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

    इंदिरा गांधी के नेतृत्व में सेना का अद्वितीय पराक्रम
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कुशल और निर्णायक नेतृत्व में भारतीय सेना ने अद्भुत साहस का परिचय दिया, जिसे देश हमेशा स्मरण करता रहेगा।

    हिमाचल के 261 शहीदों को विशेष नमन
    विनय कुमार ने हिमाचल प्रदेश के उन 261 वीर सैनिकों को विशेष रूप से याद किया, जिन्होंने 1971 के युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले सभी सैनिकों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

  • नेशनल हेराल्ड मामले में सत्य की जीत, मोदी सरकार की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बेनकाब: विनय कुमार

    नेशनल हेराल्ड मामले में सत्य की जीत, मोदी सरकार की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बेनकाब: विनय कुमार

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है कि नेशनल हेराल्ड प्रकरण में आया न्यायालय का फैसला सत्य, कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों की निर्णायक जीत है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से मोदी सरकार की राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई पूरी तरह उजागर हो गई है।

    शिमला

    ईडी की कार्रवाई को अदालत ने माना अवैध
    विनय कुमार ने कहा कि माननीय अदालत ने यंग इंडियन मामले में कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को अवैध और दुर्भावना से ग्रसित पाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ईडी के पास न तो क्षेत्राधिकार था और न ही कोई वैध एफआईआर, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया जा सके।

    राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति हुई उजागर
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पिछले एक दशक से मुख्य विपक्षी दल के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही कार्रवाई आज पूरे देश के सामने बेनकाब हो गई है। यह स्पष्ट हो गया है कि यह मामला कानून नहीं बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण था।

    मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला था ही नहीं
    उन्होंने कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला कभी था ही नहीं। निम्नस्तरीय राजनीति, द्वेष और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए सभी आरोप आज धराशायी हो गए हैं।

    सत्य और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा
    विनय कुमार ने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी और उसका नेतृत्व सत्य के लिए तथा हर भारतीय नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से संघर्ष करता रहेगा।

  • केंद्र ने आपदा के नाम पर हिमाचल को एक रुपया नहीं दिया, नड्डा तथ्यों के साथ बताएं पैसा कहां है : विनय कुमार

    केंद्र ने आपदा के नाम पर हिमाचल को एक रुपया नहीं दिया, नड्डा तथ्यों के साथ बताएं पैसा कहां है : विनय कुमार

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने शिमला दौरे के दौरान जगत प्रकाश नड्डा के बयानों को भ्रामक बताते हुए केंद्र सरकार पर आपदा राहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि घोषणाएं बहुत हुईं, लेकिन हिमाचल को आज तक वास्तविक सहायता नहीं मिली।

    शिमला

    नड्डा के बयानों को बताया तथ्यों से परे
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा शिमला में दिए गए बयान पूरी तरह तथ्यों से परे और जनता को गुमराह करने वाले हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि नड्डा आंकड़ों के साथ स्पष्ट करें कि केंद्र सरकार ने किस योजना के तहत, किस मद में हिमाचल प्रदेश को कितना पैसा जारी किया है।

    1500 करोड़ की घोषणा, लेकिन पैसा आज तक नहीं मिला
    विनय कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा तीन महीने पहले आपदा राहत के लिए 1500 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक प्रदेश सरकार को एक रुपया भी प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली से शिमला पैदल पहुंचने में भी चार दिन लगते हैं, जबकि घोषणा के 90 दिन बीत जाने के बाद भी प्रदेश इंतजार कर रहा है।

    डबल इंजन सरकार के दावे खोखले साबित हुए
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पहले तथाकथित डबल इंजन सरकार के दौर में भी भाजपा के दावे पूरी तरह खोखले रहे। उसी दौरान प्रदेश की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि आज नड्डा द्वारा किए जा रहे दावे भी केवल हवा-हवाई बातें हैं।

    कर्मभूमि हिमाचल, फिर भी मदद नहीं
    विनय कुमार ने कहा कि भले ही जगत प्रकाश नड्डा किसी अन्य राज्य से राज्यसभा पहुंचे हों, लेकिन उनकी कर्मभूमि हिमाचल प्रदेश ही रही है। ऐसे में उनसे अपेक्षा थी कि वे आपदाग्रस्त प्रदेश के लिए प्रधानमंत्री द्वारा घोषित राशि तुरंत जारी करवाते।

    शिमला दौरा पूरी तरह राजनीतिक रहा
    नड्डा के शिमला दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए विनय कुमार ने कहा कि यह दौरा पूरी तरह राजनीतिक था। केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद उन्होंने न तो कोई ठोस आश्वासन दिया और न ही कोई वास्तविक मदद। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हिमाचल के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

    केंद्र ने वित्तीय दबाव बढ़ाया: कांग्रेस
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह कमजोर किया। अब केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के पेंशन अंश को रोके रखा है, केंद्रीय योजनाओं की राशि में कटौती की गई है और ऋण सीमा पर भी अनुचित अंकुश लगाया गया है।

    कांग्रेस सड़क से संसद तक लड़ेगी
    विनय कुमार ने कहा कि भाजपा केवल घोषणाओं और जुमलों की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस पार्टी और प्रदेश सरकार आपदा की घड़ी में जनता के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी हिमाचल के हक की हर एक पाई के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।

    प्रदेश की भौगोलिक सच्चाई समझें नड्डा
    उन्होंने कहा कि नड्डा हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं। यदि प्रदेश और यहां के लोगों के प्रति उनके मन में थोड़ा भी स्नेह है, तो उन्हें आगे आकर हिमाचल को वास्तविक सहायता दिलानी चाहिए।

  • हिमाचल की शिक्षा में बड़ी छलांग , स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध , डिजिटल मॉनिटरिंग और भर्तियों का रोडमैप

    हिमाचल की शिक्षा में बड़ी छलांग , स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध , डिजिटल मॉनिटरिंग और भर्तियों का रोडमैप

    हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है और व्यापक नीतिगत फैसलों के जरिए सरकार ने शिक्षा सुधारों की नई दिशा तय की है। डिजिटल मॉनिटरिंग, स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध और भर्तियों की घोषणा ने इस पहल को और प्रभावी बना दिया है।

    शिमला

    अत्याधुनिक शैक्षणिक अवसंरचना का लोकार्पण
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समग्र शिक्षा निदेशालय में नव-निर्मित विद्या समीक्षा केंद्र, शिक्षा दीर्घा, कार्यक्रम प्रबंधन स्टूडियो, सम्मेलन क्षेत्र, नए सम्मेलन कक्ष और आधुनिक केंद्रीय ताप व्यवस्था का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि ये सुविधाएं प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यप्रणाली को अधिक सक्षम बनाएंगी और प्रदेश में डिजिटल शिक्षा प्रबंधन के नए युग की शुरुआत करेंगी।

    राष्ट्रीय रैंकिंग में हिमाचल की बड़ी छलांग
    मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते तीन वर्षों में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा गुणवत्ता के आकलन में हिमाचल प्रदेश 21वें स्थान से सीधे पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जो शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और सरकार की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।

    विद्या समीक्षा केंद्र से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग
    उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से शिक्षण, मूल्यांकन, उपस्थिति, संसाधन प्रबंधन और विद्यालय संचालन से जुड़े आंकड़े अब एकीकृत डिजिटल मंच पर रीयल-टाइम उपलब्ध होंगे। ‘अभ्यास हिमाचल’, भू-स्थानिक तकनीक आधारित स्मार्ट उपस्थिति प्रणाली और ‘निपुण प्रगति’ जैसे नवाचारों से विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया का वैज्ञानिक विश्लेषण संभव हो पाया है।

    शिक्षकों के लिए सशक्त डिजिटल मंच
    मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘शिक्षक सहायक’ डिजिटल टूल शिक्षकों के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, जिससे शिक्षण सामग्री, दिशा-निर्देश और संसाधन आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। इससे शिक्षण गुणवत्ता में सुधार के साथ प्रशासनिक बोझ भी कम हुआ है।

    स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध का बड़ा फैसला
    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक सत्र से प्री-नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों द्वारा स्कूल परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। अध्यापक अपने मोबाइल फोन स्टाफ रूम या बैग में रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय विद्यार्थियों के सीखने के माहौल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    भर्तियों और भविष्य की शिक्षा नीति का रोडमैप
    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर अस्थायी और स्थायी भर्तियां की जाएंगी। अस्थायी भर्तियां पांच वर्ष के लिए होंगी जबकि स्थायी भर्तियां बैच वाइज और प्रतिस्पर्धा के आधार पर की जाएंगी। मल्टी यूटिलिटी वर्कर्स की भर्ती भी प्रस्तावित है। साथ ही 2032 तक प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूल स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

    क्लस्टर स्कूल और मुफ्त कोचिंग से गुणवत्ता पर जोर
    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। क्लस्टर स्कूल प्रणाली से संसाधनों का साझा उपयोग संभव हुआ है। मेधावी छात्रों के लिए जेईई और नीट की मुफ्त कोचिंग सुनिश्चित की गई है ताकि आर्थिक स्थिति किसी के भविष्य में बाधा न बने।

    यूनेस्को के साथ समझौता और नवाचार पर फोकस
    भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश ने यूनेस्को के साथ फ्यूचर्स प्रोग्राम के अंतर्गत समझौता किया है। इसका उद्देश्य शिक्षा में नवाचार, सतत विकास और वैश्विक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

  • भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शिमला में प्रदेश कार्यालय का शिलान्यास किया

    भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शिमला में प्रदेश कार्यालय का शिलान्यास किया

    हवाई अड्डा मार्ग स्थित मजठाई में नए भाजपा प्रदेश कार्यालय के शिलान्यास के साथ संगठनात्मक गतिविधियों को नई दिशा मिली। विधि-विधान और कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष और यादगार बनाया।

    शिमला

    विधि-विधान से हुआ शिलान्यास और पूजन
    भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने डीएवी विद्यालय के समीप मजठाई में प्रस्तावित भाजपा प्रदेश कार्यालय का विधिवत शिलान्यास किया। कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन, भूमि निरीक्षण और शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं का उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    कार्यालय से संगठन को मिलेगी नई ऊर्जा
    शिलान्यास के दौरान जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि नया प्रदेश कार्यालय संगठन को नई ऊर्जा देगा और कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। उन्होंने परिसर की संरचना, भविष्य की जरूरतों और उपयोगिता को लेकर भी मार्गदर्शन दिया।

    भवन योजना और संगठनात्मक चर्चा
    भूमि निरीक्षण के समय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रस्तावित भवन योजना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। शिलान्यास के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के साथ चाय पर संवाद करते हुए संगठन की मजबूती और आगामी कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया।

    वरिष्ठ नेताओं की रही मौजूदगी
    इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा, सह प्रभारी संजय टंडन, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, संगठन महामंत्री सिद्धार्थन सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने हिमाचल भाजपा के लिए एक नए संगठनात्मक अध्याय की शुरुआत को रेखांकित किया।