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  • आईजीएमसी प्रकरण के बाद हिमाचल में डॉक्टरों की हड़ताल जारी , बर्खास्तगी को एकतरफा कार्रवाई बताकर सरकार से न्याय की मांग

    आईजीएमसी प्रकरण के बाद हिमाचल में डॉक्टरों की हड़ताल जारी , बर्खास्तगी को एकतरफा कार्रवाई बताकर सरकार से न्याय की मांग


    हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है, जिससे कई अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। चिकित्सक बर्खास्तगी के आदेश वापस लेने और अस्पतालों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग पर अड़े हैं।


    शिमला

    आईजीएमसी प्रकरण को लेकर चिकित्सकों में रोष

    इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में मरीज से मारपीट के मामले के बाद सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला को बर्खास्त किए जाने के विरोध में प्रदेशभर के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। रविवार को भी मेडिकल छात्र, इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर आईजीएमसी के अटल सभागार स्थित बैडमिंटन हॉल में एकत्र हुए और सरकार के फैसले को एकतरफा बताते हुए न्याय की मांग की।

    प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

    हड़ताल में रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन भी शामिल है, जबकि मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक संगठन समर्थन में हैं। इसके चलते मेडिकल कॉलेजों, जोनल अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में ओपीडी और नियमित सेवाएं प्रभावित रहीं। कई स्थानों पर मरीजों की जांच और नियोजित ऑपरेशन नहीं हो सके, जिससे दूरदराज से आए मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    आपात सेवाओं के लिए सरकार ने जारी की एसओपी

    सरकार ने हालात को देखते हुए अस्पतालों में आपात सेवाएं सुचारु रखने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की है। इसके तहत सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और वरिष्ठ चिकित्सकों की छुट्टियों पर रोक लगाई गई है। कंसल्टेंट डॉक्टरों को ओपीडी में बैठने और वार्ड राउंड अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि केवल आपातकालीन ऑपरेशन किए जाएंगे।

    रेजिडेंट डॉक्टरों की प्रमुख मांगें

    रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि बिना पूरी जांच के केवल चिकित्सक पर कार्रवाई से पेशे की गरिमा और संस्थान की साख को ठेस पहुंची है। संगठन का दावा है कि छह घंटे में निलंबन और 48 घंटे में बर्खास्तगी का फैसला जल्दबाजी में लिया गया। डॉक्टरों ने डॉ. राघव नरूला की बहाली और अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।

    सरकार का पक्ष

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि हड़ताल सही कदम नहीं है और आपात सेवाओं में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की ओर से सभी स्वास्थ्य संस्थानों से रोजाना रिपोर्ट मांगी जा रही है और मुख्यमंत्री के लौटने पर चिकित्सकों से बातचीत कराने की बात कही गई है।

  • Himachal Weather / हिमाचल में घना कोहरा और ठंड का असर, कुछ जिलों में वर्षा व हिमपात की संभावना

    Himachal Weather / हिमाचल में घना कोहरा और ठंड का असर, कुछ जिलों में वर्षा व हिमपात की संभावना


    राज्य के कई हिस्सों में कोहरे और ठंड का प्रभाव लगातार बना हुआ है। आने वाले दिनों में कुछ जिलों में कोहरा छाने के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की वर्षा व हिमपात की संभावना जताई गई है।


    हिमाचल प्रदेश

    राज्य के कई क्षेत्रों में कोहरे की स्थिति

    राज्य के सुंदरनगर में बहुत घना कोहरा, बिलासपुर में घना जबकि मंडी में हल्का कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग के अनुसार निचले व मैदानी क्षेत्रों में दृश्यता प्रभावित रही, जिससे सुबह और रात के समय आवागमन में सतर्कता की आवश्यकता रही।

    तापमान में उतार-चढ़ाव दर्ज

    राज्य में अधिकतम तापमान ऊना में 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान ताबों में -4.2 डिग्री सेल्सियस रहा। शिमला का अधिकतम तापमान 15.2 डिग्री और न्यूनतम 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कल्पा में अधिकतम तापमान 10.3 डिग्री और न्यूनतम 0.6 डिग्री रहा, जबकि मनाली में अधिकतम 11.4 डिग्री और न्यूनतम 2.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    घने कोहरे को लेकर अलर्ट

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर और मंडी जिलों के कुछ हिस्सों में घना कोहरा छाने की संभावना है। वहीं बिलासपुर जिले के कुछ क्षेत्रों में घना से बहुत घना कोहरा रहने की आशंका जताई गई है।

    ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वर्षा व हिमपात के आसार

    चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा और हिमपात की संभावना व्यक्त की गई है। इसके बाद शेष दिनों में अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।

    आने वाले दिनों का सामान्य पूर्वानुमान

    आसमान मुख्यतः साफ रहने की संभावना है। शिमला शहर में अधिकतम तापमान लगभग 18 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान करीब 8 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

  • आईजीएमसी शिमला विवाद: डॉक्टर की बर्खास्तगी के विरोध में चिकित्सकों का सामूहिक अवकाश, सेवाएं प्रभावित

    आईजीएमसी शिमला विवाद: डॉक्टर की बर्खास्तगी के विरोध में चिकित्सकों का सामूहिक अवकाश, सेवाएं प्रभावित

    आईजीएमसी शिमला में मरीज से मारपीट के मामले में डॉक्टर की बर्खास्तगी के बाद चिकित्सक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। इसके विरोध में रेजिडेंट डॉक्टरों ने सामूहिक अवकाश और आगे हड़ताल का निर्णय लिया है।

    शिमला

    बर्खास्तगी के बाद चिकित्सकों में रोष
    आईजीएमसी शिमला में मरीज से मारपीट के मामले में आरोपी डॉक्टर को सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद मामला गरमा गया है। इस फैसले के खिलाफ विभिन्न चिकित्सक संगठनों ने बैठकें कर सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है।

    सामूहिक अवकाश और हड़ताल की चेतावनी
    आईजीएमसी रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, कॉलेज एससीए और स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स की बैठक में यह फैसला लिया गया कि शुक्रवार को एक दिन का सामूहिक अवकाश रहेगा। मांगें पूरी न होने पर शनिवार से हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

    मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम
    रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि मांगें न माने जाने की स्थिति में आंदोलन जारी रहेगा।

    ओपीडी और ऑपरेशन हो सकते हैं प्रभावित
    सामूहिक अवकाश के चलते आईजीएमसी, कमला नेहरू अस्पताल और डीडीयू अस्पताल में ओपीडी और वैकल्पिक ऑपरेशन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।

    चिकित्सक संगठनों का समर्थन
    चमियाना अस्पताल फैकल्टी एसोसिएशन और हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ ने भी रेजिडेंट डॉक्टरों के फैसले का समर्थन किया है। संगठनों का कहना है कि केवल डॉक्टर के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई अनुचित है और इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।

    प्रशासन का पक्ष
    निदेशक चिकित्सा शिक्षा ने बताया कि सामूहिक अवकाश को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, हालांकि डॉक्टरों के मुख्यमंत्री से मिलने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आपातकालीन सेवाएं हर हाल में जारी रहेंगी।

  • अटल जी के सिद्धांतों पर चलकर ही बनेगा आत्मनिर्भर हिमाचल: डॉ. राजीव बिंदल​

    अटल जी के सिद्धांतों पर चलकर ही बनेगा आत्मनिर्भर हिमाचल: डॉ. राजीव बिंदल​

    सुशासन दिवस पर राज्यपाल, नेता प्रतिपक्ष और भाजपा अध्यक्ष ने शिमला रिज पर दी श्रद्धांजलि; अटल जी के ‘राष्ट्र प्रथम’ संकल्प को दोहराया​

    शिमला :

    भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती ‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर आज राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने अटल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस दौरान भारी संख्या में भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने अटल जी के पदचिन्हों पर चलने और सुशासन की शपथ ली।

    ​अटल जी: राजनीति के शिखर पुरुष और आधुनिक भारत के निर्माता

    श्रद्धांजलि अर्पित करने के उपरांत डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि अटल जी राजनीति के वह शिखर पुरुष थे, जिन्होंने सत्ता को कभी साध्य नहीं, बल्कि सेवा का साधन माना। उन्होंने कहा, “अटल जी का व्यक्तित्व हिमालय की तरह विशाल और उनकी वाणी राष्ट्र निर्माण का मंत्र थी।

    उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सदैव देशहित को सर्वोपरि रखा। आज हम जिस विकसित भारत की कल्पना कर रहे हैं, उसकी वैचारिक नींव अटल जी ने ही अपने सुशासन और अटूट राष्ट्रवाद से रखी थी।

    नाहन चौगान और पोखरण परीक्षण की ऐतिहासिक यादें

    अटल जी के हिमाचल और नाहन से विशेष लगाव का जिक्र करते हुए डॉ. बिंदल ने एक गौरवशाली संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि मई 1998 में ऐतिहासिक ‘पोखरण परमाणु परीक्षण’ के सफल आयोजन के तुरंत बाद अटल बिहारी वाजपेयी नाहन आए थे।

    उन्होंने कहा, “मई 1998 में जब पूरा विश्व भारत की परमाणु शक्ति देख रहा था, उस समय अटल जी ने नाहन के ऐतिहासिक चौगान मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। उस दिन नाहन की धरती पर ‘जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान’ का नारा गुंजायमान हुआ था। नाहन के लोगों के लिए वह पल आज भी एक ऐतिहासिक धरोहर की तरह है।

    “​हिमाचल के विकास के सच्चे संरक्षक नेता

    प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और डॉ. बिंदल ने संयुक्त रूप से कहा कि हिमाचल को ‘अपना दूसरा घर’ मानने वाले अटल जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए प्रदेश को ‘विशेष राज्य’ का दर्जा दिया, जिससे यहाँ के विकास को नई गति मिली। प्रदेश के दुर्गम गांवों की भाग्य रेखा कही जाने वाली ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ उनकी दूरदर्शिता का ही सबसे बड़ा उपहार है।​

    सुशासन और आत्मनिर्भरता का संकल्पभाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश जिस सुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, उसे जन-जन तक पहुँचाना ही अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

    इस अवसर पर रिज मैदान पर उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अटल जी के ‘राष्ट्र प्रथम’ के संदेश को आत्मसात कर एक समृद्ध और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

  • आईजीएमसी शिमला में मरीज से विवाद के बाद सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की सेवाएं समाप्त, आदेश जारी

    आईजीएमसी शिमला में मरीज से विवाद के बाद सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की सेवाएं समाप्त, आदेश जारी

    आईजीएमसी शिमला में मरीज और डॉक्टर के बीच हुई झड़प के मामले में जांच पूरी होने के बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सीनियर रेजिडेंट की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं।

    शिमला

    प्रारंभिक जांच में सामने आया विवाद

    चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय को आईजीएमसी शिमला की अनुशासनात्मक जांच समिति से प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त हुई थी, जिसमें पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर और 36 वर्षीय मरीज के बीच झड़प की पुष्टि हुई। इस घटना को लेकर मरीज के परिजनों की ओर से एफआईआर भी दर्ज करवाई गई, जो पुलिस जांच के अधीन है।

    वीडियो और रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई

    प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और सामने आए वीडियो क्लिप के आधार पर संबंधित सीनियर रेजिडेंट को 22 दिसंबर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। इसके बाद सरकार ने पूरे मामले की गहन जांच के लिए जांच समिति का गठन किया, जिसे सभी पहलुओं की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।

    जांच समिति की रिपोर्ट में क्या निकला निष्कर्ष

    जांच समिति की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकला कि घटना के लिए मरीज और डॉक्टर दोनों जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट में इसे अनुशासनहीनता, दुर्व्यवहार और रेजिडेंट डॉक्टर पॉलिसी 2025 के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है।

    सेवाएं समाप्त करने के आदेश

    जांच रिपोर्ट के अवलोकन के बाद चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की सेवाएं रेजिडेंट डॉक्टर पॉलिसी 2025 की धारा-9 के तहत तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

  • काम पर गया फल विक्रेता, पीछे से टूटा कमरे का ताला; शिमला सदर में 22 हजार की नकदी चोरी

    काम पर गया फल विक्रेता, पीछे से टूटा कमरे का ताला; शिमला सदर में 22 हजार की नकदी चोरी

    शिमला शहर के सदर थाना क्षेत्र में किराए के कमरे से नकदी चोरी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शिमला

    पुलिस के अनुसार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के चिलकाना तहसील निवासी अरमान पुत्र एहसान वर्तमान में शिमला के कृष्णानगर क्षेत्र में किराए पर रहते हैं और फल बेचने का काम करते हैं। घटना के समय वह काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। शाम करीब साढ़े छह बजे उनके चाचा ने फोन कर सूचना दी कि कमरे का ताला टूटा हुआ है।

    सूचना मिलते ही अरमान मौके पर पहुंचे तो कमरे का ताला टूटा मिला और अंदर सामान बिखरा हुआ था। जांच करने पर पता चला कि एलसीडी के पास रखी गई 22 हजार रुपये की नकदी गायब है।

    पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 331(3) और 305(ए) के तहत मामला दर्ज किया है। आसपास के क्षेत्रों की पड़ताल की जा रही है और संदिग्धों से जुड़ी जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और अधिकारी जाएंगे कैम्ब्रिज

    हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और अधिकारी जाएंगे कैम्ब्रिज

    हिमाचल प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत करने की दिशा में प्रदेश सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है। इस पहल से शिक्षकों के प्रशिक्षण और विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    शिमला

    कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दौरे की तैयारियां तेज
    हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कुछ विधायक इंग्लैंड स्थित विश्वविख्यात कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दौरे पर जाएंगे। इस प्रस्तावित दौरे को लेकर इन दिनों तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।

    शिक्षा सुधार की दिशा में अंतरराष्ट्रीय पहल
    प्रदेश सरकार की यह पहल हिमाचल को देश के अग्रणी शैक्षणिक राज्यों की श्रेणी में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से शिक्षकों की पेशेवर दक्षता को नई मजबूती मिलेगी, जिसका सीधा लाभ छात्रों के सीखने के परिणामों में सुधार के रूप में सामने आएगा।

    शिक्षा निदेशालय में चयन प्रक्रिया जारी
    कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की ओर से कंवेजीनियस को तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया है, जिससे प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सका। शिक्षा निदेशालय में विदेश जाने वाले शिक्षकों की चयन प्रक्रिया चल रही है, ताकि प्रशिक्षण का लाभ सही ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

    एमओयू के बाद बढ़ा अंतरराष्ट्रीय सहयोग
    प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर कंवेजीनियस के साथ समझौता किया है, जिसमें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय शैक्षणिक साझेदार के रूप में शामिल है। इसी कड़ी में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को लंदन स्थित परिसर के भ्रमण के लिए आमंत्रित किया है।

    विशेषज्ञों के साथ होगी रणनीतिक चर्चा
    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जाने वाला प्रतिनिधिमंडल प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रगति, गुणवत्ता और भविष्य की रणनीति को लेकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा करेगा, ताकि हिमाचल की शिक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।

    33 हजार से अधिक शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण
    इस परियोजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों के 33,300 शिक्षकों को आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों और नवीन शिक्षण कौशल पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने चार प्रमुख मॉड्यूल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया, जिसमें मूल्यांकन के उद्देश्य, विद्यार्थियों की सीखने की खामियों की पहचान, प्रश्नों का डिज़ाइन और समावेशी मूल्यांकन प्रथाएं शामिल रहीं। प्रशिक्षण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित किया गया, ताकि अधिकतम शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

  • विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, समावेशी और संतुलित विकास का संकल्प : राज्यपाल

    विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, समावेशी और संतुलित विकास का संकल्प : राज्यपाल

    विकसित भारत का दृष्टिकोण आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों के संतुलन पर आधारित होना चाहिए। राज्यपाल ने नीति निर्माण में अर्थशास्त्रियों की भूमिका को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताया।

    शिमला

    अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को किया संबोधित
    राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भारतीय अर्थशास्त्र संघ के 108वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन नीति संवाद और राष्ट्र निर्माण के लिए एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों पर होने वाली चर्चाएं देश की नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    विकसित भारत 2047 की व्यापक परिकल्पना
    राज्यपाल ने सम्मेलन की थीम ‘इंडियाज पर्स्पेक्टिव: विकसित भारत 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है। इसमें समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और मानवीय मूल्यों का संवर्धन भी समान रूप से शामिल है।

    डिजिटल अवसंरचना और नवाचार में भारत की अग्रणी भूमिका
    उन्होंने कहा कि भारत आज आर्थिक मजबूती के साथ-साथ डिजिटल अवसंरचना, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी अग्रणी बनकर उभर रहा है। विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण आंकड़ों से आगे बढ़कर हर नागरिक के लिए सम्मान, अवसर और संतुलित विकास सुनिश्चित करने की सोच पर आधारित है।

    अर्थशास्त्रियों से समाजोन्मुख नीति निर्माण का आह्वान
    राज्यपाल ने अर्थशास्त्रियों से आह्वान किया कि वे अपने विचारों और शोध का उपयोग समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करने वाली नीतियों के निर्माण में करें, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

  • सीनियर रेजिडेंसी के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग शुरू करने के निर्देश, आईजीएमसी मामले के बाद सरकार की सख्ती

    सीनियर रेजिडेंसी के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग शुरू करने के निर्देश, आईजीएमसी मामले के बाद सरकार की सख्ती

    प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा में अनुशासन, पेशेवर व्यवहार और बेहतर कार्यसंस्कृति को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। आईजीएमसी शिमला में हुई हालिया घटना को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध जांच और आवश्यक सुधारों पर जोर दिया गया है।

    शिमला

    आईजीएमसी की घटना पर विस्तृत समीक्षा
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग, इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। बैठक में 22 दिसंबर को आईजीएमसी में हुई घटना से संबंधित सभी तथ्यों की विस्तृत जानकारी ली गई।

    समयबद्ध जांच और अनुशासन पर जोर
    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उक्त घटना की जांच शीघ्र पूर्ण कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान में पेशेवरों का व्यवहार सौम्य और संतुलित होना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल व्यक्ति बल्कि संस्थान की छवि भी प्रभावित होती है।

    सीनियर रेजिडेंसी के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग अनिवार्य
    मुख्यमंत्री ने निदेशालय चिकित्सा शिक्षा को निर्देश दिए कि सीनियर रेजिडेंसी करने के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों में आने वाले चिकित्सकों के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग आरंभ की जाए। उन्होंने सीनियर रेजिडेंसी प्रक्रिया की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

    चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना में बड़े निवेश
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्त्वाकांक्षी पहल की हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विश्व-स्तरीय मानकों को अपनाया जा रहा है।

    तीन हजार करोड़ से अधिक का निवेश
    उन्होंने बताया कि राज्य में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और अधोसंरचना के विकास के लिए तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा रही है। स्वास्थ्य संस्थानों में लंबे समय से उपयोग हो रहे पुराने उपकरणों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से बदला जा रहा है।

    वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल सहित चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए।

  • ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा हिमाचल, 2026 तक 90 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य

    ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा हिमाचल, 2026 तक 90 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य

    प्रदेश सरकार ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ग्रीन एनर्जी स्टेट बनने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। सौर ऊर्जा सहित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से हिमाचल को देश के अग्रणी हरित राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

    शिमला

    नवीकरणीय ऊर्जा से 90 प्रतिशत जरूरतें पूरी करने का लक्ष्य
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 तक राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताओं को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की वार्षिक ऊर्जा खपत लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट है।

    दो वर्षों में 500 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित करने की योजना
    मुख्यमंत्री ने बताया कि हरित पहलों के तहत अगले दो वर्षों में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। ‘ग्रीन पंचायत कार्यक्रम’ के अंतर्गत राज्य की पंचायतों में ग्राउंड-माउंटेड सौर परियोजनाएं लगाई जा रही हैं, जिससे कुल 150 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

    सौर परियोजनाओं से सामाजिक कल्याण को भी मिलेगा लाभ
    इन सौर परियोजनाओं से अर्जित राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा ग्राम पंचायतों के अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण पर खर्च किया जाएगा। इससे ऊर्जा उत्पादन के साथ सामाजिक सरोकारों को भी मजबूती मिलेगी।

    ऊना जिले की परियोजनाओं से हुआ उल्लेखनीय उत्पादन
    मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊना जिले की पेखूबेला, अघलौर और भंजाल सौर परियोजनाओं से अब तक बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन हुआ है, जिससे करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। ये परियोजनाएं राज्य की हरित ऊर्जा यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    नई परियोजनाएं और निवेशकों को प्रोत्साहन
    प्रदेश में कई सौर परियोजनाएं निष्पादन और निविदा चरण में हैं। इसके साथ ही कांगड़ा जिले के डमटाल क्षेत्र में 200 मेगावाट क्षमता का सौर संयंत्र स्थापित किया जाएगा। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति के तहत बड़ी संख्या में निवेशकों को सौर परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं।

    वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों में भी तेजी से काम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रीन हाइड्रोजन, कंप्रेस्ड बायोगैस और भू-तापीय ऊर्जा जैसे वैकल्पिक क्षेत्रों में भी योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। इन प्रयासों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2026 तक देश का अग्रणी ग्रीन एनर्जी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रगति हो रही है।