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छतराड़ी जात्र मेले में केवल सिंह पठानिया ने डंडारस लोकनृत्य में लिया भाग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 2 Hours Ago • 1 Min Read

राज्य स्तरीय छतराड़ी जात्र मेले में उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने मां शिव-शक्ति की पूजा-अर्चना की। उन्होंने पारंपरिक गद्दी वेशभूषा चोला-डोरा पहनकर स्थानीय लोगों के साथ डंडारस लोकनृत्य में भी भाग लिया और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।

चंबा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने छतराड़ी स्थित ऐतिहासिक मां शिव-शक्ति मंदिर परिसर में आयोजित मेले में शिरकत की। शहनाई और ढोल-नगाड़ों की स्वर लहरियों के बीच उन्होंने लोक परंपरा के अनुसार स्थानीय लोगों के साथ नृत्य किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लोक कला और संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और समृद्ध लोक परंपराएं पीढ़ियों से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं।

केवल सिंह पठानिया ने कहा कि चंबा जिले की सांस्कृतिक विरासत, यहां के लोगों और पारंपरिक वेशभूषा के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्होंने छतराड़ी जात्र मेले को राज्य स्तरीय दर्जा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार इस निर्णय से मेले की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को व्यापक पहचान मिली है। इस दौरान उन्होंने मेले में भाग लेने वाले लोकनाट्य दलों के प्रतिभागियों को सेलो ग्लास वेयर भी वितरित किए।

उप मुख्य सचेतक ने कार्यक्रम के दौरान जिले में क्षय रोग के उन्मूलन के लिए लोगों से निक्षय मित्र बनने का आग्रह किया। इस अवसर पर राज्य पथ परिवहन निगम के निदेशक मंडल के सदस्य एवं जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुरजीत भरमौरी, हज कमेटी अध्यक्ष दिलदार अली वट्ट, प्रदेश कांग्रेस कमेटी महासचिव अमित भरमौरी, ग्राम पंचायत छतराड़ी के प्रधान रिंकू भारद्वाज और उपमंडल दंडाधिकारी नागरिक चिराग शर्मा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में एचपीटीसीएल के अधिशासी अभियंता राज सिंह, विद्युत बोर्ड से हंसराज, जिला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा, खंड विकास अधिकारी डॉ. बशीर खान, जिला कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य डॉ. हरित पुरी, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. राकेश कुमार और उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।

मंदिर और मेले की प्राचीन परंपरा

जिला मुख्यालय से 48 किलोमीटर दूर स्थित मां शिव-शक्ति मंदिर क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता के अनुसार एक स्तंभ पर घूमने की स्थापत्य विशेषता वाले इस मंदिर का निर्माण लगभग 780 ईस्वी पूर्व हुआ था। मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराएं स्थानीय लोक संस्कृति और आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। राधाष्टमी के दूसरे दिन से यहां चार दिवसीय जात्र मेले का आयोजन किया जाता है। श्री मणिमहेश डल झील से पवित्र जल लाकर मां की मूर्ति को स्नान करवाने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।

माता शिव-शक्ति को समर्पित यह ऐतिहासिक मेला क्षेत्र की लोक-सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का परिचायक है। खप्पर बुढ़ा नृत्य, जिसे मुखौटा नृत्य भी कहा जाता है, और पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुत डंडारस लोकनृत्य मेले के प्रमुख आकर्षण हैं। पारंपरिक चोला-डोरा, लंबी टोपी और कलगी धारण कर प्रतिभागी प्रस्तुतियां देते हैं, जिन्हें देखने के लिए सैकड़ों लोग छतराड़ी पहुंचते हैं।