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बच्चों के बदलते व्यवहार को गंभीरता से लें, डीजीपी अशोक तिवारी ने नशे से बचाव के लिए बताए जरूरी कदम

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने अभिभावकों से बच्चों की खामोशी, चिंताओं और व्यवहार में आने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को चिट्टे और अन्य नशों से बचाने के लिए परिवार, विद्यालय, पुलिस और समाज को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी करने की अपील भी की गई।

शिमला

कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल चेल्सी के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डीजीपी अशोक तिवारी ने कहा कि ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ केवल नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना और नशामुक्त हिमाचल के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आंदोलन का संदेश अपने मित्रों और परिवारों तक पहुंचाने तथा नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

घर और विद्यालय से शुरू हो नशे की रोकथाम

डीजीपी ने अभिभावकों से बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताने और उनकी बातों व चिंताओं को ध्यान से सुनने को कहा। उन्होंने कहा कि घर में ऐसा विश्वासपूर्ण वातावरण होना चाहिए, जहां बच्चे बिना झिझक अपनी समस्याएं माता-पिता के साथ साझा कर सकें। पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन, साथियों के बीच स्वीकार्यता और सामाजिक अपेक्षाओं को पूरा करने जैसे दबाव बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में माता-पिता की समझ, संवेदनशीलता और भावनात्मक सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अशोक तिवारी ने कहा कि घर बच्चे की पहली पाठशाला और माता-पिता उसके पहले शिक्षक होते हैं। परिवार से मिले संस्कार, आत्मविश्वास और साहस भविष्य में बच्चों के फैसलों को दिशा देते हैं। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार में दिखाई देने वाले शुरुआती संकेतों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उनके अनुसार जागरूकता, खुला संवाद, समय पर संकेतों की पहचान और उचित कदम उठाने से नशे की रोकथाम में प्रभावी सहायता मिल सकती है।

नकारात्मक दबाव से बचने का संदेश

वार्षिक समारोह की थीम ‘ओशन ओडैसी’ का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, साहस और दयालुता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों या ऊंचे पदों से नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि व्यक्ति के चरित्र का भी महत्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से सही बात के पक्ष में साहस से खड़े होने, साथियों के नकारात्मक दबाव से बचने और अस्थायी असफलताओं को भविष्य पर हावी नहीं होने देने का आह्वान किया।

डीजीपी ने विद्यार्थियों के ड्रिल एवं बैंड प्रदर्शन, कराटे, स्केटिंग और अन्य प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, चिट्टे के खिलाफ स्थायी सफलता के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने समारोह में उपस्थित लोगों से आंदोलन का संदेश विद्यालय परिसर से बाहर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की अपील की।

ERSS-112 सेवा की राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार

जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश पुलिस ने विद्यालय परिसर में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली ERSS-112 को लेकर जागरूकता शिविर भी लगाया। विद्यार्थियों और अभिभावकों को आपातकालीन हेल्पलाइन, ‘ट्रैक मी’ सुविधा और जरूरत के समय समयबद्ध सहायता प्राप्त करने के महत्व की जानकारी दी गई। इस दौरान बताया गया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया समय की राष्ट्रीय रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश की ERSS-112 सेवा ने 34वें स्थान से पहले स्थान तक का सफर तय किया है।

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