हटली स्कूल में मानसिक स्वास्थ्य सेमिनार, विद्यार्थियों को परीक्षा तनाव से निपटने के उपाय बताए
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हटली में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा के तनाव, डिप्रेशन और नशे के दुष्प्रभावों पर जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। मनोचिकित्सक डॉ. शीतल वर्मा ने विद्यार्थियों को तनाव से निपटने, मानसिक रूप से स्वस्थ रहने और सकारात्मक सोच अपनाने के उपाय बताए। उन्होंने पढ़ाई और पारिवारिक परिस्थितियों से उत्पन्न तनाव को समझकर उसका उचित समाधान तलाशने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि पढ़ाई, परीक्षा और भविष्य को लेकर विद्यार्थियों में तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे स्वयं पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं और मन की बात अभिभावकों, शिक्षकों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ साझा करने की सलाह दी। इसके साथ ही पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या, संतुलित खानपान तथा खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल भी शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही आवश्यक है।
सेमिनार में विद्यार्थियों को डिप्रेशन के लक्षणों के प्रति सजग रहने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया। डॉ. वर्मा ने नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए कहा कि यह व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ उसके भविष्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और अपनी ऊर्जा पढ़ाई, खेलकूद तथा सकारात्मक गतिविधियों में लगाने का आह्वान किया।
संवादात्मक तरीके से आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञ के सामने अपनी समस्याएं और जिज्ञासाएं रखीं। डॉ. शीतल वर्मा ने उनका मार्गदर्शन करते हुए सवालों के समाधान बताए। विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, कठिन परिस्थितियों में अपनी बात साझा करने और आवश्यकता महसूस होने पर सहायता लेने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को तनाव का बेहतर ढंग से सामना करने और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सतीश शर्मा ने डॉ. शीतल वर्मा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। उनके अनुसार ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को तनाव से निपटने, सकारात्मक सोच विकसित करने और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।