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हिमाचल में सीएसआर फंड में कमी पर हाईकोर्ट सख्त, कंपनियों से तीन साल का विस्तृत ब्योरा तलब

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 2 Hours Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीएसआर फंड में करीब 100 करोड़ रुपये की कमी और इसके उपयोग में अनियमितताओं पर संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने कंपनियों के पिछले तीन वर्षों के खर्च, बकाया राशि और अनुपालन स्थिति का पूरा विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

शिमला

सीएसआर फंड पर हाईकोर्ट का संज्ञान

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड के आवंटन और उपयोग में सामने आई अनियमितताओं पर संज्ञान लिया है। उद्योग विभाग के विशेष सचिव द्वारा दायर हलफनामे में यह सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कंपनियों के अनिवार्य सीएसआर खर्च में लगभग 100 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है। इस स्थिति के आधार पर अदालत ने संबंधित एजेंसियों को फंड के उपयोग और अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

कंपनियों के अनुपालन और रिपोर्टिंग के निर्देश

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई से पहले उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए, जिन्होंने निर्धारित सीएसआर दायित्वों का पालन नहीं किया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें पिछले तीन वर्षों में सीएसआर के अंतर्गत आने वाली कंपनियों की सूची, उनका वास्तविक खर्च और शेष राशि का विवरण शामिल हो।

आपदा प्रबंधन कार्यों और परियोजनाओं का विवरण

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं, अस्पतालों और स्कूलों जैसे कार्यों में सीएसआर फंड के उपयोग की जिला स्तर पर जानकारी प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या आपदा के बाद पुनर्वास के लिए कोई समान नीति या दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि 2023 से 2025 के बीच आपदाओं के बावजूद कंपनियों के अनुपालन से संबंधित सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

केंद्र और सार्वजनिक उपक्रमों को निर्देश

केंद्र सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वह राज्य में कार्यरत प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों जैसे एनटीपीसी, एनएचपीसी, एसजेवीएन, पावर ग्रिड और टीएचडीसी द्वारा किए गए कार्यों और अप्रयुक्त सीएसआर फंड की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत करे। इसके साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि 2025 की आपदा के बाद इन संस्थानों द्वारा राज्य में कौन-कौन से कार्य किए गए हैं।

भर्ती एवं सेवा शर्त विधेयक पर सुनवाई

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्त विधेयक 2024 से संबंधित याचिकाओं पर भी निर्णय प्रक्रिया जारी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर 5 जनवरी को निर्णय सुरक्षित रखा था। याचिकाओं में अधिनियम को चुनौती देते हुए इसे संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत बताया गया है, जबकि सरकार का पक्ष है कि यह विधेयक नियमित और अनुबंध कर्मचारियों के बीच स्पष्ट वर्गीकरण के उद्देश्य से लाया गया है।