हिमाचल हाईकोर्ट का निर्देश, हिमकेयर योजना में निजी अस्पतालों के बिल दो सप्ताह में सत्यापित कर भुगतान करें
Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमकेयर योजना के तहत निजी अस्पतालों के लंबित बिलों के सत्यापन और भुगतान को लेकर निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी कर सही पाए गए बिलों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा है।
शिमला
दो सप्ताह में सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि हिमकेयर योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों के लंबित बिलों का सत्यापन निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। अदालत ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन बिलों को सही पाया जाए, उनका भुगतान बिना अनावश्यक देरी के किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा, स्वास्थ्य सेवा निदेशक जितेंद्र सांजटा और विशेष सचिव (स्वास्थ्य) एवं सीईओ अश्विनी कुमार शर्मा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने लंबित बिलों, उपलब्ध बजट तथा भुगतान की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
एसआईटी जांच से स्वतंत्र रहेगी भुगतान प्रक्रिया
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिलों के सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच से स्वतंत्र रूप से संचालित की जाएगी। अदालत को यह भी बताया गया कि वर्तमान में लगभग 17 करोड़ रुपये की राशि लंबित बिलों के भुगतान के लिए उपलब्ध है, जिसे सत्यापन के बाद चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। इस संबंध में अधिकारियों और अदालत के बीच चर्चा के बाद लंबित भुगतानों के निपटान को लेकर एक सहमति बनी है।
आयुष्मान भारत समझौता ज्ञापन प्रस्तुत करने के निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को आयुष्मान भारत योजना के कार्यान्वयन से संबंधित समझौता ज्ञापन रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि योजना के क्रियान्वयन से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके। साथ ही प्रतिवादी केंद्र सरकार को भी पूर्व आदेशों के अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है।
डायलिसिस सेवाओं से जुड़े बिलों पर प्राथमिकता
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सितंबर 2024 से निजी अस्पतालों में हिमकेयर योजना का सामान्य संचालन बंद होने के बावजूद डायलिसिस सेवाएं जारी हैं। ऐसे में डायलिसिस से संबंधित सभी लंबित बिलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाए और पात्र पाए जाने पर उनका भुगतान शीघ्र किया जाए, ताकि सेवा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की बाधा न हो।
अगली सुनवाई 18 मई को निर्धारित
मामले की अगली सुनवाई 18 मई 2026 को निर्धारित की गई है। अदालत ने निर्देशों के अनुपालन की स्थिति अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी हो रही हैं।