हाई कोर्ट सख्त: अवैध खनन पर सरकार से मांगी रिपोर्ट, 4 हफ्ते में बकाया देने के आदेश
Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अवैध खनन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने प्रवक्ताओं के एरियर भुगतान को लेकर भी 4 सप्ताह के भीतर बकाया राशि जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कर्मचारियों के डेपुटेशन पीरियड को सर्विस बुक में दर्ज करने का निर्णय भी सामने आया है।
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अवैध खनन के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि ब्यास नदी के किनारे कांगड़ा और मंडी जिलों में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया जाए।मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि कानून संबंधित अधिकारियों को अवैध खनन रोकने के लिए पर्याप्त अधिकार देता है, बावजूद इसके यह गतिविधियां लगातार जारी हैं। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और वाहनों को जब्त करने के स्पष्ट प्रावधान हैं, जिनका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जयसिंहपुर के एसडीएम द्वारा दाखिल हलफनामे में जिला स्तरीय बल के गठन का सुझाव दिया गया है, क्योंकि ब्यास नदी के किनारे अलग-अलग जिलों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। जानकारी के अनुसार अब तक 15 वाहनों का चालान किया गया है और 6681 मीट्रिक टन खनिज जब्त कर करीब एक करोड़ रुपये में नीलाम किया गया है। हालांकि, किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने पर भी सवाल उठे हैं।वहीं एक अन्य मामले में हाई कोर्ट ने स्कूल प्रवक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने आदेश दिया है कि प्रवक्ताओं को पिछली तारीख से नियमित करने के बाद उनकी बकाया राशि का भुगतान 4 सप्ताह के भीतर किया जाए। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि आदेश की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारियों पर कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अक्टूबर 2024 में दिए गए आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाना अनिवार्य है। याचिकाकर्ताओं को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से सभी लाभ देने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक बकाया राशि जारी नहीं की गई है।इसी दौरान सरकार ने हाई कोर्ट को एक और महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि अब कर्मचारियों के डेपुटेशन पीरियड को उनकी सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा। मुख्य सचिव की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भविष्य में तबादलों और पोस्टिंग से जुड़े लाभ तय करने में इस अवधि को भी शामिल किया जा सके।
कोर्ट ने इस व्यवस्था को जरूरी बताते हुए कहा कि कई मामलों में कर्मचारी डेपुटेशन के जरिए दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती से बचने का प्रयास करते हैं। ऐसे में सर्विस रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाना बेहद आवश्यक है।कुल मिलाकर हाई कोर्ट ने एक साथ कई अहम मामलों में सख्त रुख दिखाते हुए सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।