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हिमाचल हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति मामले में सरकार की अपील खारिज कर समीक्षा कमेटी गठित की

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 2 Hours Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति से जुड़े मामले में राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने गृह सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

शिमला

पुलिस कांस्टेबल पदोन्नति मामले में हाईकोर्ट का निर्णय

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति से जुड़े मामले में एकल न्यायाधीश के आदेश को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस कर्मियों की सेवा स्थितियों में सुधार और समयबद्ध पदोन्नति व्यवस्था आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान व्यवस्था में कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित हैं, विशेष रूप से जनरल ड्यूटी कांस्टेबलों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है।

उच्च स्तरीय कमेटी के गठन के निर्देश

खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखते हुए गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में कुल 11 सदस्य शामिल होंगे, जिनमें से 9 सदस्य पुलिस विभाग के विशेषज्ञ होंगे। कमेटी को कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा करने का जिम्मा सौंपा गया है और इसे 8 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट व सिफारिशें सरकार को प्रस्तुत करनी होंगी।

सेवा शर्तों और लाभों पर अदालत की टिप्पणी

अदालत ने यह भी कहा कि 20 साल की सेवा के बाद कांस्टेबलों को केवल मानद हेड कांस्टेबल का पद देना और मामूली वित्तीय लाभ प्रदान करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पुलिस कर्मियों को समयबद्ध पदोन्नति, ओवरटाइम भत्ता, साप्ताहिक अवकाश, आवासीय सुविधा और उच्च शिक्षा के अवसर मिलने चाहिए।

सेवानिवृत्ति लाभ मामले पर अलग निर्णय

हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद लंबे समय तक जांच के नाम पर लाभों को रोका नहीं जा सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा कि यदि अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबे समय तक शुरू नहीं होती है तो सेवानिवृत्ति लाभ रोकना उचित नहीं है।अदालत ने विभाग को आदेश दिए कि याचिकाकर्ता के सभी सेवानिवृत्ति लाभ जैसे पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य देय राशि 6 सप्ताह के भीतर जारी की जाए।