हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से जुड़े एफआईआर मामले को रद किया, अधिकारियों को राहत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े सेमिनार प्रकरण में दर्ज एफआईआर और संबंधित आदेश को रद कर दिया है। अदालत ने मामले में तत्कालीन बीईईओ और बीआरसीसी के खिलाफ दर्ज कार्रवाई को न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना।
हमीरपुर
समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े मामले में हाईकोर्ट का फैसला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित सेमिनारों से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए थाना बड़सर में दर्ज एफआईआर और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बड़सर द्वारा पारित आदेश को रद कर दिया है। अदालत के इस फैसले से तत्कालीन बीईईओ और बीआरसीसी को राहत मिली है। मामला वर्ष 2018 में आयोजित सेमिनारों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सामने आए विवाद से संबंधित था।
आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर उठे थे सवाल
मामले में शिकायतकर्ता अधिवक्ता ऋषि कुमार ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उपस्थिति रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान संबंधित शिक्षकों ने सेमिनार में अपनी उपस्थिति और हस्ताक्षरों की पुष्टि की। इसके अतिरिक्त प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक हमीरपुर और डाइट हमीरपुर की ओर से की गई जांच में भी अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी।
पुलिस ने दाखिल की थी क्लोजर रिपोर्ट
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की थी। इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से दोबारा नई शिकायत दायर की गई, जिस पर मजिस्ट्रेट अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए। मामले के दौरान हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच भी करवाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया गया।
दूसरी शिकायत स्वीकार करने पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जब एक शिकायत पहले से न्यायालय में लंबित थी, तब उसी विषय से संबंधित दूसरी शिकायत स्वीकार नहीं की जा सकती थी। अदालत ने यह भी कहा कि पर्याप्त कानूनी संतुष्टि के बिना पारित आदेश न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जा सकता। फैसले में अदालत ने धारीवाल टोबैको प्रोडक्ट्स लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए अदालत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग कर सकती है।
एफआईआर और संबंधित आदेश रद
अदालत ने अंततः एफआईआर और उससे संबंधित आदेश को रद करते हुए अधिकारियों को आरोपों से मुक्त कर दिया। मामले की पैरवी अधिवक्ता अवनीश भारद्वाज द्वारा की गई। निर्णय में न्यायिक प्रक्रिया के उचित उपयोग और कानूनी प्रक्रिया के पालन पर भी बल दिया गया।