Juvenile Board / हिमाचल में हर जिले में बनेगा किशोर न्याय बोर्ड, सरकार ने 2026 के नए नियम किए लागू
Himachalnow / शिमला
Juvenile Board : हिमाचल प्रदेश सरकार ने किशोर न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए 2026 के नए नियम अधिसूचित किए हैं। इन नियमों के तहत प्रत्येक जिले में किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया जाएगा और बच्चों के अनुकूल प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।
शिमला
हर जिले में होगा किशोर न्याय बोर्ड का गठन
हिमाचल प्रदेश सरकार ने किशोर न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार अब राज्य के प्रत्येक जिले में एक या अधिक किशोर न्याय बोर्ड स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक बोर्ड में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के साथ दो सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य होंगे, जिनमें कम से कम एक महिला सदस्य की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बच्चों से जुड़े क्षेत्रों में न्यूनतम सात वर्षों का अनुभव निर्धारित किया गया है, ताकि मामलों का उचित तरीके से निपटारा हो सके।
बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश
नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि बोर्ड की कार्यवाही किसी भी स्थिति में अदालत या जेल परिसर में नहीं की जाएगी। इसके स्थान पर ऐसे स्थानों का चयन किया जाएगा जहां बच्चे सहज महसूस कर सकें। सुनवाई के दौरान वातावरण को सामान्य और सहज बनाए रखने के लिए बोर्ड के सदस्यों को बच्चों के प्रति अनुकूल व्यवहार अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक बाल देखरेख संस्था और बोर्ड परिसर में शिकायत पेटिका स्थापित करने का प्रावधान भी किया गया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई का प्रावधान
तकनीकी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नियमों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था भी शामिल की गई है। विशेष परिस्थितियों में इस माध्यम का उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही, यदि किसी बच्चे को चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता होती है, तो उसकी उपस्थिति और सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुनर्वास और शिक्षा पर दिया गया जोर
नियमों के तहत बच्चों के समग्र विकास के लिए व्यक्तिगत देखरेख योजना तैयार करने का प्रावधान किया गया है। इस योजना में स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक स्थिति, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा, ताकि बच्चों को मुख्यधारा में वापस लाने में सहायता मिल सके।
मानदेय और प्रशिक्षण की व्यवस्था
बोर्ड में नियुक्त सामाजिक कार्यकर्ता सदस्यों को प्रत्येक बैठक के लिए मानदेय प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा नियुक्ति के 60 दिनों के भीतर उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे मामलों को पेशेवर और व्यवस्थित तरीके से संभाल सकें।