हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में पानी की आपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। जल शक्ति विभाग पर आरोप है कि टैंकरों के बजाय मोटरसाइकिल, कारों और यहां तक कि एक अधिकारी की सरकारी गाड़ी के नंबर का उपयोग कर भुगतान लिया गया। इस चौंकाने वाले घोटाले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टैंकरों के नाम पर गड़बड़ी का खेल
आरटीआई में हुआ खुलासा
पिछले साल गर्मियों में ठियोग उपमंडल में सूखे के दौरान टैंकरों से पानी की आपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपये का गबन किया गया। आरटीआई में जानकारी मिली कि पानी सप्लाई के लिए जिन टैंकरों के नंबर दिए गए, उनमें कई नंबर मोटरसाइकिल, लग्जरी कारों और एक सरकारी गाड़ी के थे।
गांवों में दिखाया गया फर्जी सप्लाई रिकॉर्ड
दो ऐसे गांव, नागोधार और करयाली, जहां सड़कें तक नहीं हैं, वहां टैंकरों से पानी सप्लाई दिखाई गई। संधु पंचायत के बिशड़ी गांव में भी पानी की आपूर्ति नहीं हुई, लेकिन आरटीआई के मुताबिक एक लाख लीटर से अधिक पानी की सप्लाई का दावा किया गया।
चौंकाने वाले तथ्य
एक दिन में 819 किलोमीटर का रिकॉर्ड
घोटाले की गंभीरता तब सामने आई जब पता चला कि एक पिकअप ट्रक, जिसे टैंकर के रूप में दिखाया गया था, ने एक दिन में 819 किलोमीटर की सप्लाई की। अगले दिन वही वाहन 614 किलोमीटर की पानी सप्लाई करता हुआ दिखाया गया।
अफसर की गाड़ी के नंबर पर भी भुगतान
शिकायतकर्ताओं ने पाया कि विभाग ने एक अधिकारी की सरकारी गाड़ी के नंबर पर भी टैंकर के नाम से भुगतान किया।
सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग
ठियोग के पूर्व विधायक की शिकायत
पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को शिकायत दी। उन्होंने मुख्य सचिव से रिकॉर्ड सीज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच के आदेश
शिमला के अतिरिक्त उपायुक्त को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। ठियोग के एसडीएम मुकेश शर्मा ने कहा कि जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
यह घोटाला न केवल जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को भी उजागर करता है। ठियोग और शिमला के लोगों को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष और कठोर जांच जरूरी है। इस घटना ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार की समस्या को फिर से चर्चा में ला दिया है।

