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हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की तैयारी, सरकार ने मांगा प्रस्ताव

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने संबंधित विभागों से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है, जिसके बाद कार्मिक विभाग स्तर पर प्रारंभिक समीक्षा और कर्मचारियों से संबंधित डाटा एकत्र करने की तैयारी शुरू हो गई है।

शिमला

सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर शुरू की प्रक्रिया

हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाए जाने को लेकर सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है, ताकि प्रदेश में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति, सेवा शर्तों और वर्तमान व्यवस्थाओं का व्यापक अध्ययन किया जा सके। जानकारी के अनुसार सरकार इस दिशा में विभागवार आंकड़े एकत्र करने, कर्मचारियों की संख्या, कार्य अवधि और वेतन संबंधी व्यवस्थाओं का आकलन करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद सरकार नीति निर्माण को लेकर आगे की रूपरेखा तैयार करेगी।

बिजली बोर्ड आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने उठाए कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे

यह मामला उस समय प्रमुखता से सामने आया जब हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा। संघ ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से विभिन्न विभागों में लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज भी केवल 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्य करना पड़ रहा है। संघ के अनुसार कई कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभा रहे हैं और कुछ कर्मचारी कार्य के दौरान दुर्घटनाओं का भी शिकार हुए हैं। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भविष्य सुरक्षा, सेवा स्थायित्व और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी स्पष्ट व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।

कार्मिक विभाग करेगा सेवा शर्तों और डाटा की समीक्षा

मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर पर मामले को आगे बढ़ाते हुए इसे सचिव (कार्मिक) को भेजा गया है। इसके बाद कार्मिक विभाग स्तर पर नीति निर्माण को लेकर प्रारंभिक कसरत शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार विभिन्न विभागों से आउटसोर्स कर्मचारियों का पूरा डाटा जुटाने, उनकी नियुक्ति की प्रकृति, कार्य अवधि, वेतनमान और वर्तमान अनुबंध व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विभिन्न विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों को किस प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं और किन क्षेत्रों में एक समान नीति लागू करने की आवश्यकता है। सरकार इस प्रक्रिया के माध्यम से भविष्य में सेवा संबंधी विवादों और असमानताओं को कम करने की दिशा में भी काम कर सकती है।

संघ ने नौकरी सुरक्षा और न्यूनतम वेतन सहित कई मांगें रखीं

आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें भी रखी हैं। इनमें सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना, न्यूनतम वेतन लागू करना, सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को सहायता और रोजगार उपलब्ध करवाना तथा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट सेवा नीति तैयार करना शामिल है। संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा और सह संयोजक सोहनलाल तुलिया ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर विचार करेगी। फिलहाल सरकार विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों और आंकड़ों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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