पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, शिमला में पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर के करीब
हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 10 दिनों के भीतर तीसरी बार ईंधन दरों में संशोधन किया गया है, जिसके तहत पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। नई दरों के बाद राजधानी शिमला में सामान्य पेट्रोल की कीमत 99.96 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि प्रीमियम पेट्रोल 109.18 रुपए प्रति लीटर और डीजल 91.86 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
शिमला
10 दिनों में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम
हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। तेल कंपनियों की ओर से शनिवार को जारी नई दरों के अनुसार पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। पिछले 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब ईंधन दरों में संशोधन किया गया है।ताजा बढ़ोतरी के बाद हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सामान्य पेट्रोल की कीमत 99.96 रुपए प्रति लीटर दर्ज की गई है, जो 100 रुपए प्रति लीटर के आंकड़े के करीब पहुंच गई है। वहीं प्रीमियम या पावर पेट्रोल के दाम बढ़कर 109.18 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। इसके अलावा डीजल की कीमत 91.86 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
परिवहन और माल ढुलाई लागत पर पड़ सकता है असर
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा डीजल आधारित वाहनों पर निर्भर है। ऐसे में डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ सकती है।परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि ईंधन दरों में वृद्धि होने से ट्रकों, बसों और अन्य व्यावसायिक वाहनों के संचालन खर्च में इजाफा होता है। इसके परिणामस्वरूप बाजार तक पहुंचने वाली वस्तुओं की ढुलाई लागत भी बढ़ जाती है। इसका प्रभाव खाद्य सामग्री, सब्जियों, राशन और अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर देखा जा सकता है।
कृषि और बागवानी क्षेत्र पर भी प्रभाव की संभावना
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि और बागवानी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के सेब उत्पादक क्षेत्रों में फलों की ढुलाई मुख्य रूप से ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों के माध्यम से की जाती है। डीजल महंगा होने से बागवानों और किसानों की परिवहन लागत बढ़ सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार सेब और अन्य बागवानी उत्पादों को बागानों से मंडियों तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च आने की संभावना है। इससे उत्पादकों के खर्च में वृद्धि हो सकती है और बाजार में उपभोक्ताओं को भी बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का असर
तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति से जुड़ी परिस्थितियों का असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा प्रभाव देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों पर दिखाई देता है। तेल कंपनियां वैश्विक बाजार, आयात लागत और टैक्स संरचना के आधार पर समय-समय पर ईंधन दरों में संशोधन करती हैं।
