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रूल-7ए फिर लागू: हिमाचल में वेतन निर्धारण पर सरकार का बड़ा फैसला

PRIYANKA THAKUR • 8 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने 15 ट्रेडों के डिप्लोमा कोर्स के लिए विभिन्न बहुतकनीकी संस्थानों में आवेदन आमंत्रित किए हैं। अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथियों के भीतर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा, जिसकी विस्तृत जानकारी प्रोस्पेक्टस में उपलब्ध है। इन कोर्सों में इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग दोनों प्रकार के पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं।

शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के वेतन निर्धारण से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर बड़ा फैसला लेते हुए हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा संशोधित वेतन नियम, 2022 के तहत रूल-7ए को फिर से लागू कर दिया है।वित्त विभाग के पे-रिवीजन विंग द्वारा जारी नई अधिसूचना के बाद अब राज्य के हजारों कर्मचारियों के वेतन फिक्सेशन, उच्च वेतन स्तर और एरियर से जुड़े मामलों में नई स्पष्टता आ गई है।सरकार ने तीसरे संशोधन के जरिए रूल-7ए को बहाल करते हुए साफ कर दिया है कि 6 सितंबर 2022 की स्थिति को ही प्रभावी माना जाएगा।यानी अब वही व्यवस्था फिर से लागू होगी, जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को उच्च वेतन स्तर का लाभ मिल सकता है।

बताया जा रहा है कि 2025 में इस प्रावधान को हटाने या स्थगित करने के बाद कई विभागों में वेतन निर्धारण को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसे अब सरकार ने समाप्त करने की कोशिश की है।सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने यह लाभ सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों तक सीमित कर दिया है, जिनकी नियुक्ति 3 जनवरी 2022 या उससे पहले हुई थी।यानी 3 जनवरी 2022 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को रूल-7ए के तहत उच्च वेतन स्तर का लाभ नहीं मिलेगा।इससे साफ है कि नई भर्ती या बाद में नियमित हुए कर्मचारियों की बड़ी संख्या इस लाभ से बाहर रह सकती है।

सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट से नियमित हुए कर्मचारियों के मामले में भी स्पष्ट लाइन खींच दी है।निर्देशों के अनुसार, जो कर्मचारी 3 जनवरी 2022 से पहले कांट्रैक्ट पर नियुक्त हुए थे, उन्हें यह लाभ तभी मिलेगा जब वे नियमित सेवा में दो वर्ष पूरे कर लेंगे।यानी सिर्फ पुरानी नियुक्ति होना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नियमित सेवा की शर्त पूरी करना भी जरूरी होगा।सरकार ने विभागों को यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि किसी कर्मचारी को दो वर्ष की नियमित सेवा पूरी किए बिना रूल-7ए का लाभ दे दिया गया है, तो उसका वेतन दोबारा निर्धारित किया जाए।साथ ही, अतिरिक्त भुगतान की वसूली भी की जाएगी।यह निर्देश खास तौर पर उन विभागों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पहले से इस लाभ के आधार पर वेतन फिक्सेशन या भुगतान किया जा चुका है।

वित्त विभाग ने न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी विभागों को स्पष्ट रणनीति दी है।सरकार ने कहा है कि 3 जनवरी 2022 के बाद नियुक्त कर्मचारी यदि रूल-7ए का लाभ मांगते हैं, तो संबंधित विभाग अदालत में यह स्पष्ट जवाब दें कि यह नियम उन पर लागू नहीं होता।इसके अलावा, यदि किसी अदालत ने ऐसे मामलों में लाभ दे भी दिया है, तो संबंधित विभागों को समय सीमा के भीतर उस आदेश को चुनौती देने के निर्देश दिए गए ।इस पूरे फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इसे पूर्व प्रभाव से लागू किया है।अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था 6 सितंबर 2022 से प्रभावी मानी जाएगी।इसका मतलब यह हुआ कि अब कई मामलों में पुराने वेतन निर्धारण, भुगतान, एरियर और रिकवरी से जुड़े प्रश्न फिर से खड़े हो सकते हैं।

सरकारी हलकों में इस फैसले को वेतन विवादों पर नियंत्रण की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।एक ओर इससे 3 जनवरी 2022 तक नियुक्त कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर बाद में भर्ती कर्मचारियों और कई संवर्गों में नई बहस भी छिड़ सकती है।आने वाले दिनों में इस आदेश का असर शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा, राजस्व और अन्य विभागों के वेतन मामलों पर साफ दिखाई दे सकता है।