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हिमाचल में तबादलों पर पूरी रोक, चुनाव तक अफसर-कर्मचारी नहीं होंगे शिफ्ट

PRIYANKA THAKUR • 8 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को देखते हुए तबादलों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब सामान्य परिस्थितियों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा और प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने पर जोर रहेगा। इस फैसले से चुनावी प्रक्रिया के दौरान व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

शिमला

पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मुख्य सचिव की ओर से जारी सख्त निर्देशों के बाद अब सामान्य परिस्थितियों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले को चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को स्थिर और सक्रिय बनाए रखने के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

जारी आदेशों के अनुसार पंचायत राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी इस अवधि में राज्य निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में रहेंगे। ऐसे में किसी भी प्रकार का तबादला चुनावी कार्यों को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों और बोर्ड-निगमों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सूचना तक तबादलों पर रोक का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

सरकार ने इस आदेश में टीचिंग काडर को राहत दी है। शिक्षा विभाग और तकनीकी शिक्षा विभाग के अध्यापक इस प्रतिबंध से बाहर रखे गए हैं। यानी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में अध्यापकों के तबादलों पर यह रोक लागू नहीं होगी। इसके अलावा बाकी सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी इस आदेश के दायरे में आएंगे।आदेशों में यह भी साफ किया गया है कि अब केवल विशेष और अपरिहार्य परिस्थितियों में ही तबादले की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए संबंधित विभाग को प्रमाणित करना होगा कि संबंधित कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में तैनात नहीं है या फिर तबादला स्वास्थ्य कारणों, अनुशासनात्मक कार्रवाई अथवा न्यायालय के आदेश जैसे ठोस आधार पर जरूरी है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी तबादला आदेश में राज्य निर्वाचन आयोग की मंजूरी का स्पष्ट उल्लेख नहीं होगा, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी कार्यभार नहीं छोड़ेगा। साथ ही कार्यालय प्रमुखों की जिम्मेदारी भी तय की गई है कि बिना सक्षम स्वीकृति किसी भी कर्मचारी को कार्यमुक्त न किया जाए। यदि ऐसा पाया गया तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।प्रदेश सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी तरह की लापरवाही या उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक स्थिरता बनी रहेगी और पंचायत व शहरी निकाय चुनावों के संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी।