हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEB) के कर्मचारी, अभियंता और पेंशनर सरकार की युक्तिकरण नीति और वित्तीय कुप्रबंधन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। हमीरपुर में आयोजित महापंचायत में कर्मचारियों और पेंशनरों ने पिछले दो वर्षों से लंबित वित्तीय लाभ और सरकार द्वारा बिजली बोर्ड को दिए जाने वाले फंड की कमी को लेकर विरोध जताया।
प्रमुख मांगें और आरोप
⚡ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लंबित लाभ मिलें – पिछले दो वर्षों से लीव एनकैशमेंट और अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिले।
⚡ बिजली सब्सिडी का भुगतान हो – सरकार ने फ्री बिजली की सब्सिडी के पैसे बोर्ड को नहीं दिए, जिससे आर्थिक संकट बढ़ा।
⚡ सरकारी विभागों पर 178 करोड़ बकाया – सरकारी दफ्तरों और अन्य विभागों ने बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया।
HPSEB अध्यक्ष कुलदीप खरवा का बयान
“सरकार वित्तीय बोझ का हवाला देकर कर्मचारियों और पेंशनरों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है। लेकिन बोर्ड की मौजूदा आर्थिक स्थिति पूरी तरह कुप्रबंधन का नतीजा है।”
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HPSEB के वित्तीय संकट की स्थिति
📉 442 करोड़ रुपये का कुल लंबित राजस्व
📉 148 करोड़ रुपये सरकारी विभागों पर बकाया
📉 148 करोड़ रुपये IPH विभाग पर बकाया
📉 6 महीने की देरी से सरकार की ओर से फंड जारी हो रहे हैं
कर्मचारियों ने मांग की है कि जल्द ही सरकार और बोर्ड प्रबंधन समिति की बैठक कर समाधान निकाला जाए, अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।
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