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नूडल्स खाने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ी, कांगड़ा उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार को मुआवजा देने के निर्देश दिए

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 55 Mins Ago • 1 Min Read

कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने के मामले में एक दुकानदार को उपभोक्ता को मुआवजा और मुकदमेबाजी का खर्च देने का निर्देश दिया है। आयोग ने आदेश में खाद्य उत्पादों की बिक्री में विक्रेता की जिम्मेदारी पर भी स्पष्ट टिप्पणी की है।

कांगड़ा

एक्सपायर्ड उत्पाद बेचने का मामला

मामला कांगड़ा जिले के भवर्णा क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता जुगल किशोर ने आयोग को बताया कि उन्होंने 26 फरवरी 2026 को एक स्थानीय दुकान से स्पाइसी कोरियन इंस्टेंट नूडल्स का पैकेट खरीदा था। उनके अनुसार पैकेट पर अंकित एक्सपायरी तिथि नवंबर 2025 थी, यानी उत्पाद निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद बिक्री के लिए उपलब्ध था। शिकायत में कहा गया कि घर पर नूडल्स तैयार कर बेटी को खिलाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे चिकित्सकीय सहायता के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। शिकायतकर्ता ने इसे उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए आयोग से कार्रवाई की मांग की।

आयोग ने सुनाया आदेश

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 6 जुलाई 2026 को मामले में फैसला सुनाते हुए दुकानदार को नूडल्स की पूरी कीमत लौटाने के साथ 15 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने का निर्देश दिया। आयोग ने आदेश दिया कि कुल देय राशि 30 दिनों के भीतर अदा की जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों की बिक्री में उपभोक्ता को केवल उत्पाद खरीदने तक सीमित जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती, बल्कि विक्रेता को यह सुनिश्चित करना होता है कि बिक्री के लिए रखा गया सामान वैध और उपयोग योग्य हो।

विक्रेता की जिम्मेदारी पर टिप्पणी

आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर शामिल थे, ने कहा कि खाद्य उत्पादों के मामलों में विक्रेता की यह जिम्मेदारी है कि वह एक्सपायर्ड सामान बिक्री के लिए उपलब्ध न रखे। आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सामान्य खरीदारी के दौरान प्रत्येक उपभोक्ता से हर पैकेट की एक्सपायरी तिथि जांचने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। पीठ ने टिप्पणी की कि खाद्य सामग्री की बिक्री में सावधानी बरतना विक्रेता का दायित्व है और स्टॉक की नियमित जांच तथा समय पर हटाना आवश्यक है।

दलीलों पर आयोग का विचार

सुनवाई के दौरान दुकानदार ने अपने पक्ष में विभिन्न दलीलें प्रस्तुत कीं, जिनमें शिकायत और चिकित्सकीय दस्तावेजों को लेकर आपत्ति भी शामिल थी। आयोग ने उपलब्ध रिकॉर्ड, शिकायतकर्ता के बयान और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर मामले का निस्तारण किया। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित मामला माना और कहा कि खाद्य उत्पाद की बिक्री में निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि उपभोक्ता को सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध कराना विक्रेता की प्राथमिक जिम्मेदारी है।