नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 वर्ष का कारावास, किन्नौर अदालत ने सुनाया फैसला
नाबालिग से दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में रामपुर स्थित किन्नौर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी को 20 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया।
रामपुर बुशहर
अदालत ने सुनाया निर्णय
रामपुर स्थित किन्नौर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 22 वर्षीय सचिन कुमार, निवासी जिला किन्नौर, को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले में सरकार की ओर से जिला उपन्यायवादी कमल चंदेल ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत ने निर्णय सुनाया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ा मामला
अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार आरोपी और पीड़िता एक ही पिता की संतान हैं, जबकि दोनों की माताएं अलग-अलग हैं। कई वर्ष पूर्व आरोपी अपनी मां के साथ पिता से अलग रहने लगा था। बाद में वह अपने पिता के पास वापस आया, जहां उसे संपत्ति का हिस्सा दिया गया और वह अलग मकान में रहने लगा। परिवार के भीतर रहने की यह व्यवस्था बाद में मामले की पृष्ठभूमि का हिस्सा बनी।
वर्ष 2024 में दर्ज हुई शिकायत
अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2024 में पीड़िता, जो उस समय 10वीं कक्षा की छात्रा थी, ने आरोपी पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के आरोप लगाए। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी ने उसे किसी को जानकारी न देने के लिए धमकियां दी थीं। मामले की सूचना परिवार के माध्यम से पुलिस तक पहुंची, जिसके बाद औपचारिक जांच शुरू की गई और संबंधित बयान दर्ज किए गए।
पुलिस जांच और न्यायालय में साक्ष्य
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान, 22 गवाहों की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर रखा। अदालत ने इन सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की।
साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। इसके उपरांत अदालत ने उसे 20 वर्ष के कारावास तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।