श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 : 4 सितंबर को मनेगा पर्व, जानें लड्डू गोपाल के पूजन का मुहूर्त
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 देश के कई हिस्सों में शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे करीब 15 साल बाद बनने वाला योग माना जा रहा है। जन्माष्टमी की निशीथ पूजा 4 सितंबर की रात 11 बजकर 56 मिनट से मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 41 मिनट तक की जाएगी। इसी अवधि में लड्डू गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार और आरती होगी।
मथुरा-वृंदावन
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को रात 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि और धार्मिक परंपराओं को देखते हुए मथुरा-वृंदावन सहित देश के कई हिस्सों में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। मंदिरों और घरों में लड्डू गोपाल के श्रृंगार, झांकियों और मध्यरात्रि के जन्मोत्सव की तैयारियां की जाएंगी।
अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग
साल 2026 की जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय हुआ था। कई वर्षों में जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि तो रहती है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का मेल नहीं बनता। इसी कारण इस बार बन रहे संयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है और इसे करीब 15 साल बाद बनने वाला योग माना गया है।
निशीथ पूजा का समय
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में होने की धार्मिक मान्यता के कारण जन्माष्टमी पर निशीथ काल की पूजा महत्वपूर्ण मानी जाती है। पंचांग के मुताबिक, 4 सितंबर की रात करीब 11 बजकर 56 मिनट से 5 सितंबर की मध्यरात्रि 12 बजकर 41 मिनट तक निशीथ पूजा का समय रहेगा। इस दौरान मंदिरों और घरों में लड्डू गोपाल का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर श्रृंगार किया जाएगा और आरती के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
जन्माष्टमी की पूजा विधि
जन्माष्टमी के दिन भक्त सुबह से व्रत और पूजा की तैयारियां शुरू करते हैं। घर के मंदिर को सजाने के साथ लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है। रात में पंचामृत से अभिषेक करने के बाद भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म के बाद शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच आरती की जाती है। इसके बाद भगवान को माखन-मिश्री, पंचामृत, फल और अन्य सात्विक भोग अर्पित किए जाते हैं।
