रविवार को नाहन में निकलेगी भगवान श्री जगन्नाथ की 18वीं भव्य रथ यात्रा
12 क्विंटल देसी घी से तैयार हो रहा छप्पन भोग, संक्रांति पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का होगा समापन
नाहन
देश की दूसरी सिद्धपीठ एवं उत्तर भारत के प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर, नाहन से रविवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की 18वीं भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। रथ यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार भगवान के लिए 12 क्विंटल देसी घी से तैयार किया जा रहा छप्पन भोग विशेष आकर्षण रहेगा।
रथ यात्रा मंडल के अध्यक्ष प्रकाश बंसल ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि करीब 1.25 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहे छप्पन भोग को 56 टोकरियों में सजाकर पहले मंदिर परिसर और बाद में चौगान मैदान में भगवान को अर्पित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में 10 जुलाई से चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन गुरुवार को संक्रांति के दिन पूर्णाहुति के साथ होगा।
उन्होंने बताया कि 17 और 18 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा का विशेष पूजन एवं श्रृंगार किया जाएगा। 19 जुलाई को पूर्णाहुति के बाद तीनों विग्रहों को पालकियों में विराजमान कर बड़ा चौक स्थित मंदिर से शोभायात्रा निकलेगी। यात्रा हिंदू आश्रम, काली स्थान मंदिर और नया बाजार होते हुए चौगान मैदान पहुंचेगी, जहां भगवान को रथ पर विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना, वस्त्र परिवर्तन और छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा।
इसके बाद मुख्य अतिथि भगवान के मार्ग में पारंपरिक रूप से झाड़ू लगाकर तथा रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। रथ यात्रा चौगान मैदान से मालरोड, गुन्नूघाट, पक्का टैंक, रानीताल और कच्चा टैंक होते हुए श्री रघुनाथ मंदिर पहुंचेगी, जिसे भगवान श्री जगन्नाथ की मासी का घर माना जाता है। वहां एक घंटे के विश्राम के बाद पालकियों के साथ वापसी यात्रा बस स्टैंड घाटी और छोटा चौक से होते हुए पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रथ यात्रा का समापन होगा।
रथ यात्रा के दौरान चंडीगढ़ के गोटिया मठ की कीर्तन मंडली भजन-कीर्तन प्रस्तुत करेगी। पत्रकार वार्ता में रथ यात्रा मंडल के महासचिव भुवन चंद्र जोशी, प्रधान पुजारी जगदीश शास्त्री तथा मीडिया प्रभारी गुरमुख सिंह भी मौजूद रहे।