Mahakumbh 2025 / महाकुंभ में धार्मिक स्थल के अलावा जरूर देखिए ये ऐतिहासिक स्थल

महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में होता है, और यहां की धार्मिक महत्ता से कोई अजनबी नहीं है। संगम तट से लेकर अक्षय वट तक, प्रयागराज में अनगिनत धार्मिक और पौराणिक स्थल हैं। इसके अलावा, इस शहर में ऐतिहासिक महत्व के कई स्थल भी स्थित हैं, जो इस शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को और भी खास बनाते हैं। यदि आप महाकुंभ के दौरान धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं, तो इन ऐतिहासिक स्थलों को देखना न भूलें।


संगम तट के पास प्रमुख ऐतिहासिक स्थल

प्रयागराज के संगम तट के पास कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जिन्हें आपको अपनी यात्रा के दौरान जरूर देखना चाहिए। यहां कुछ प्रमुख स्थल हैं:

खुसरो बाग

खुसरो बाग एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां मुग़ल सम्राट जहांगीर के बेटे खुसरो और उनकी पत्नी सुल्तान बेगम के मकबरे स्थित हैं। इन मकबरों का निर्माण बलुई पत्थर से किया गया है, और ये मुगल वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरण माने जाते हैं। इस बाग का डिजाइन आका रजा ने किया था, जो जहांगीर के दरबार में एक कलाकार थे।

इलाहाबाद किला

इलाहाबाद किला मुग़ल सम्राट अकबर ने 1583 में बनवाया था। यह किला यमुना के तट पर, गंगा के संगम के पास स्थित है। अकबर ने इस किले का नाम ‘इलाहाबास’ रखा था, जिसका अर्थ है ‘अल्लाह द्वारा आशीर्वादित’, जो बाद में इलाहाबाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह किला अकबर द्वारा बनवाया गया सबसे बड़ा किला है और इसके निर्माण से जुड़ी कई रोचक किवदंतियां भी हैं। कहा जाता है कि अकबर को किले की नींव बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा था, और इसके बाद एक ब्राह्मण ने अपनी बलि दी थी, जिससे किले का निर्माण संभव हुआ।


अन्य ऐतिहासिक स्थल

प्रयागराज में धार्मिक स्थलों के अलावा कुछ और ऐतिहासिक स्थल भी हैं, जो शहर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं। इन स्थलों की यात्रा से आपको शहर के ऐतिहासिक महत्व को और गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।

आनंद भवन

आनंद भवन नेहरू परिवार का पुराना निवास था, जिसे अब संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। इसका निर्माण मोतीलाल नेहरू ने करवाया था, और बाद में इसे कांग्रेस के कार्यों के लिए मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया। यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है।

भारद्वाज आश्रम

भारद्वाज आश्रम वह स्थान है, जहां पौराणिक ऋषि भारद्वाज ने पुष्पक विमान का निर्माण किया था, जैसा कि पुरानी कथाओं में वर्णित है। यह स्थान न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

चंद्रशेखर पार्क

चंद्रशेखर पार्क भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी, चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा हुआ है। इसी पार्क में 1931 में अंग्रेजों की गोलीबारी में चंद्रशेखर आजाद शहीद हुए थे। उस समय उनकी उम्र केवल 24 वर्ष थी। यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान वीरता की याद दिलाता है।


निष्कर्ष

प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान धार्मिक स्थलों के साथ-साथ ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी एक अद्वितीय अनुभव हो सकता है। इन स्थलों की यात्रा से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान बढ़ता है, बल्कि आप इस शहर की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर से भी परिचित हो सकते हैं। अगर आप महाकुंभ यात्रा पर हैं, तो इन ऐतिहासिक स्थलों को भी अपनी सूची में जरूर शामिल करें।