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  • Maha Kumbh / अगला स्नान कब होगा? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और महत्व

    Maha Kumbh / अगला स्नान कब होगा? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और महत्व

    महाकुंभ का अंतिम अमृत स्नान समाप्त

    महाकुंभ 2025 का तीसरा और अंतिम अमृत स्नान (शाही स्नान) शांतिपूर्वक संपन्न हो रहा है। आज के स्नान के बाद नागा साधु अपने-अपने धाम की ओर लौटने लगेंगे।

    📌 स्नान का आंकड़ा: सुबह 8 बजे तक 62.37 लाख श्रद्धालु बसंत पंचमी के अवसर पर संगम में डुबकी लगा चुके थे।
    📌 संभावित कुल संख्या: शाम तक यह आंकड़ा 1 करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद है।

    अब श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि महाकुंभ का अगला बड़ा स्नान कब होगा? आइए जानते हैं…


    अगला बड़ा स्नान कब होगा?

    महाकुंभ 2025 का अगला महत्वपूर्ण स्नान “माघ पूर्णिमा” के दिन होगा।

    📅 तिथि: 12 फरवरी 2025
    📜 पंचांग के अनुसार:

    • माघ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 11 फरवरी की शाम 6:55 बजे से होगी।
    • यह 12 फरवरी की शाम 7:22 बजे तक रहेगी।
    • सनातन धर्म में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए माघ पूर्णिमा स्नान 12 फरवरी को होगा।

    माघ पूर्णिमा स्नान का शुभ मुहूर्त

    📌 ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:19 बजे से 06:10 बजे तक
    📌 गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:07 बजे से 06:32 बजे तक
    📌 अमृत काल: शाम 05:55 बजे से रात 07:35 बजे तक
    📌 अभिजीत मुहूर्त: उपलब्ध नहीं है


    माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम कर रहे थे, तभी नारद जी उनसे मिलने आए। नारद जी ने भगवान विष्णु से ऐसा उपाय पूछा जिससे लोगों का कल्याण हो सके।

    भगवान विष्णु ने बताया कि जो व्यक्ति सांसारिक सुखों को भोगने के बाद मोक्ष प्राप्त करना चाहता है, उसे पूर्णिमा तिथि पर सत्यनारायण व्रत करना चाहिए।

    कैसे करें सत्यनारायण व्रत?

    दिनभर उपवास रखें।
    शाम को भगवान सत्यनारायण की कथा का पाठ करें।
    पूजन के बाद भोग अर्पित करें।

    इस व्रत से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जातक को सुख, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करते हैं।


    निष्कर्ष

    महाकुंभ का अगला बड़ा स्नान 12 फरवरी 2025 (माघ पूर्णिमा) को होगा। इस दिन संगम में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व है। यदि आप महाकुंभ में स्नान करने की योजना बना रहे हैं, तो इस शुभ अवसर का लाभ उठाएं और पुण्य अर्जित करें।

  • महाकुंभ में भगदड़ के बाद हालात काबू में, सरकार ने कहा- स्नान शांतिपूर्वक जारी

    महाकुंभ में भगदड़ के बाद हालात काबू में, सरकार ने कहा- स्नान शांतिपूर्वक जारी

    प्रयागराज: महाकुंभ 2025 के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के मौके पर भारी भीड़ उमड़ने के कारण भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। प्रशासन ने हालात पर काबू पा लिया है और अब कुंभ क्षेत्र में स्नान सुचारू रूप से जारी है।


    प्रशासन ने किया हालात पर काबू, स्नान जारी

    उत्तर प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कहा है कि स्नान शांतिपूर्वक जारी है। संगम तट पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, ताकि आगे किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

    भगदड़ से मची अफरा-तफरी, कई श्रद्धालु घायल

    आज 29 जनवरी 2025 को मौनी अमावस्या के दूसरे अमृत स्नान के लिए 10 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के संगम तट पर स्नान करने की संभावना थी। इसी बीच, अचानक अफवाह फैलने के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हो गए

    प्रशासन के अनुसार, भगदड़ का कारण भीड़ का अत्यधिक दबाव और कुछ महिलाओं का दम घुटना था, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई और कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।


    घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया

    घटना के बाद घायलों को तत्काल महाकुंभ नगर के केंद्रीय अस्पताल और प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत दल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया।

    प्रशासन का बयान:
    प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, और श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के संगम में स्नान कर रहे हैं। अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की गई है।


    महत्वपूर्ण अपडेट्स के लिए जुड़े रहें!

  • महाकुंभ में भगदड़: पीएम मोदी ने सीएम योगी से ली जानकारी, 15 से अधिक हताहत

    महाकुंभ में भगदड़: पीएम मोदी ने सीएम योगी से ली जानकारी, 15 से अधिक हताहत

    प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला आज मौनी अमावस्या के दिन एक दुखद घटना का शिकार हो गया, जब संगम तट पर भगदड़ मच गई। इस हादसे में 15 से अधिक श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए और कुछ बेहोश भी हो गए। हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया है और स्थिति को काबू में कर लिया गया है।

    हादसे के बाद निरंजनी अखाड़े ने स्नान जुलूस को रोक दिया है और अमृत स्नान स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जानकारी ली और स्थिति का जायजा लिया।

    घटना के बारे में बताया जा रहा है कि भगदड़ मेला क्षेत्र में देर रात लगभग 2 बजे मची। एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, जैसे ही भगदड़ मची, लोग भागने लगे और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। कई महिलाएं और बच्चे भी इस हादसे में घायल हुए हैं।

    इस बीच, घायल लोगों को 50 से अधिक एंबुलेंसों के माध्यम से अस्पताल भेजा गया है। कुछ घायलों को मोटरसाइकिलों से भी अस्पताल पहुंचाया गया है। राहत कार्य में सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने भी मोर्चा संभाल लिया है।

    महानिर्वाणी और निरंजनी अखाड़ों ने भारी भीड़ के कारण अमृत स्नान स्थगित कर दिया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि यदि स्थिति सामान्य होती है तो स्नान कार्यक्रम फिर से शुरू किया जाएगा, अन्यथा इसे निरस्त कर दिया जाएगा।

    इस हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है और स्थिति पर नजर रखे हुए है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे संयम बनाए रखें और बिना किसी अफवाह पर विश्वास किए, शांतिपूर्ण तरीके से आयोजन में भाग लें।

  • मौनी अमावस्या पर महाकुंभ का ऐतिहासिक संगम: 10 करोड़ श्रद्धालु संगम में होंगे, जानें सुरक्षा और सुविधा के बारे में जरूरी बातें!

    मौनी अमावस्या पर महाकुंभ का ऐतिहासिक संगम: 10 करोड़ श्रद्धालु संगम में होंगे, जानें सुरक्षा और सुविधा के बारे में जरूरी बातें!


    मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर आज 29 जनवरी को प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान करीब 10 करोड़ श्रद्धालु संगम में अमृत स्नान करने के लिए एकत्र होंगे। अनुमान है कि यह संख्या दुनिया के कई छोटे देशों की आबादी से भी अधिक होगी। इस दिन का महाकुंभ स्नान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, और इसे लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की हैं।

    प्रयागराज में भारी भीड़, विशेष इंतजाम

    महाकुंभ का यह अवसर भारत और दुनिया भर के सनातन धर्मियों के लिए गर्व का विषय है। प्रयागराज के रेलवे स्टेशन, बस अड्डे से लेकर मेला क्षेत्र तक भारी भीड़ जमा है, और हर कोई संगम में डुबकी लगाने की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहा है। मेला प्रशासन के अनुसार, आज के स्नान के लिए 10 करोड़ से ज्यादा लोग संगम पहुंचेंगे।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस बड़े आयोजन की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं, और राज्य प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तैयारी की है।

    एडवाइजरी जारी, श्रद्धालुओं के लिए खास दिशा-निर्देश

    महाकुंभ में मौनी अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजेश द्विवेदी ने बताया कि श्रद्धालुओं को अफवाहों से बचने और सतर्क रहने के लिए कहा गया है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में मेला पुलिस, यातायात पुलिस और विशेष डॉक्टरों की टीम 24 घंटे तैनात रहेंगी।

    श्रद्धालुओं को क्या करना चाहिए:

    • संगम घाट पर जाने के लिए: श्रद्धालु अपनी निर्धारित लेन में ही जाएं और गंगा स्नान के लिए निर्धारित मार्ग का पालन करें।
    • स्नान के बाद: स्नान और दर्शन के बाद, श्रद्धालु सीधे पार्किंग स्थल की ओर जाएं। यदि वे मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं, तो अपनी लेन में बने रहें।
    • स्वास्थ्य समस्या: किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं।
    • धैर्य रखें: बैरिकेडिंग और पांटून पुलों पर धैर्य बनाए रखें और बिना धक्का-मुक्की के स्नान करें।

    सुरक्षा इंतजाम:

    महाकुंभ के दौरान सुरक्षा कड़ी की गई है। मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन की मदद से लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा, मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है, ताकि भारी भीड़ के बीच यातायात की समस्या न हो।

    विशेष व्यवस्था:

    • ट्रेन यात्रा: 29 जनवरी को विशेष तौर पर 400 ट्रेनें चल रही हैं, जिनमें 170 विशेष ट्रेनें शामिल हैं। कुल मिलाकर, 1,060 ट्रेनें महाकुंभ के दौरान चार दिनों में चलेंगी।
    • यात्री आश्रय स्थल: 1,30,000 यात्री एक साथ आठ स्टेशन के यात्री आश्रय स्थलों में रुक सकेंगे।
    • सफाई कर्मी: 1,000 अतिरिक्त सफाईकर्मी स्टेशन पर और 2,000 सफाईकर्मी ट्रेनों की सफाई में तैनात होंगे।

    महाकुंभ की एक झलक:

    मौनी अमावस्या का अवसर हर सनातनी के लिए गर्व का विषय है। प्रयागराज में आज से ही मेला क्षेत्र में हर तरफ श्रद्धालुओं का हुजूम है, जो संगम में डुबकी लगाने के लिए तैयार हैं। यह आयोजन न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा।

    अंत में, इस पवित्र अवसर पर सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे व्यवस्थाओं का पालन करें, अफवाहों से बचें, और इस ऐतिहासिक महाकुंभ में पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ शामिल हों।

  • Mahakumbh 2025 / महाकुंभ में धार्मिक स्थल के अलावा जरूर देखिए ये ऐतिहासिक स्थल

    Mahakumbh 2025 / महाकुंभ में धार्मिक स्थल के अलावा जरूर देखिए ये ऐतिहासिक स्थल

    महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में होता है, और यहां की धार्मिक महत्ता से कोई अजनबी नहीं है। संगम तट से लेकर अक्षय वट तक, प्रयागराज में अनगिनत धार्मिक और पौराणिक स्थल हैं। इसके अलावा, इस शहर में ऐतिहासिक महत्व के कई स्थल भी स्थित हैं, जो इस शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को और भी खास बनाते हैं। यदि आप महाकुंभ के दौरान धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं, तो इन ऐतिहासिक स्थलों को देखना न भूलें।


    संगम तट के पास प्रमुख ऐतिहासिक स्थल

    प्रयागराज के संगम तट के पास कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जिन्हें आपको अपनी यात्रा के दौरान जरूर देखना चाहिए। यहां कुछ प्रमुख स्थल हैं:

    खुसरो बाग

    खुसरो बाग एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां मुग़ल सम्राट जहांगीर के बेटे खुसरो और उनकी पत्नी सुल्तान बेगम के मकबरे स्थित हैं। इन मकबरों का निर्माण बलुई पत्थर से किया गया है, और ये मुगल वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरण माने जाते हैं। इस बाग का डिजाइन आका रजा ने किया था, जो जहांगीर के दरबार में एक कलाकार थे।

    इलाहाबाद किला

    इलाहाबाद किला मुग़ल सम्राट अकबर ने 1583 में बनवाया था। यह किला यमुना के तट पर, गंगा के संगम के पास स्थित है। अकबर ने इस किले का नाम ‘इलाहाबास’ रखा था, जिसका अर्थ है ‘अल्लाह द्वारा आशीर्वादित’, जो बाद में इलाहाबाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह किला अकबर द्वारा बनवाया गया सबसे बड़ा किला है और इसके निर्माण से जुड़ी कई रोचक किवदंतियां भी हैं। कहा जाता है कि अकबर को किले की नींव बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा था, और इसके बाद एक ब्राह्मण ने अपनी बलि दी थी, जिससे किले का निर्माण संभव हुआ।


    अन्य ऐतिहासिक स्थल

    प्रयागराज में धार्मिक स्थलों के अलावा कुछ और ऐतिहासिक स्थल भी हैं, जो शहर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं। इन स्थलों की यात्रा से आपको शहर के ऐतिहासिक महत्व को और गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।

    आनंद भवन

    आनंद भवन नेहरू परिवार का पुराना निवास था, जिसे अब संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। इसका निर्माण मोतीलाल नेहरू ने करवाया था, और बाद में इसे कांग्रेस के कार्यों के लिए मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया। यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है।

    भारद्वाज आश्रम

    भारद्वाज आश्रम वह स्थान है, जहां पौराणिक ऋषि भारद्वाज ने पुष्पक विमान का निर्माण किया था, जैसा कि पुरानी कथाओं में वर्णित है। यह स्थान न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

    चंद्रशेखर पार्क

    चंद्रशेखर पार्क भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी, चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा हुआ है। इसी पार्क में 1931 में अंग्रेजों की गोलीबारी में चंद्रशेखर आजाद शहीद हुए थे। उस समय उनकी उम्र केवल 24 वर्ष थी। यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान वीरता की याद दिलाता है।


    निष्कर्ष

    प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान धार्मिक स्थलों के साथ-साथ ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी एक अद्वितीय अनुभव हो सकता है। इन स्थलों की यात्रा से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान बढ़ता है, बल्कि आप इस शहर की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर से भी परिचित हो सकते हैं। अगर आप महाकुंभ यात्रा पर हैं, तो इन ऐतिहासिक स्थलों को भी अपनी सूची में जरूर शामिल करें।

  • महाकुंभ 2025 / चंडीगढ़ से प्रयागराज के लिए स्पेशल फ्लाइट और ट्रेन, जानें यात्रा के आसान तरीके

    महाकुंभ 2025 / चंडीगढ़ से प्रयागराज के लिए स्पेशल फ्लाइट और ट्रेन, जानें यात्रा के आसान तरीके

    महाकुंभ का आयोजन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू हो चुका है और 26 फरवरी तक चलेगा। इस भव्य धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से श्रद्धालु त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती) में स्नान करने के लिए पहुंच रहे हैं। अगर आप चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्र में रहते हैं और महाकुंभ में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो आपको अब यात्रा के लिए खास सुविधाएं उपलब्ध हैं। चंडीगढ़ से प्रयागराज के लिए स्पेशल फ्लाइट और ट्रेन सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जो इस यात्रा को और भी आसान और सुविधाजनक बना देंगी।


    चंडीगढ़ से प्रयागराज के लिए डायरेक्ट फ्लाइट

    महाकुंभ के दौरान, चंडीगढ़ से प्रयागराज के लिए डायरेक्ट फ्लाइट्स की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह फ्लाइट हर सोमवार को चंडीगढ़ से रवाना होगी और बुधवार को वापसी करेगी, जिससे श्रद्धालु महाकुंभ के आयोजन में समय पर पहुंच सकते हैं।

    फ्लाइट का समय और किराया

    • चंडीगढ़ से प्रयागराज फ्लाइट: हर सोमवार को शाम 4.30 बजे चंडीगढ़ से रवाना होगी और शाम 6.44 बजे प्रयागराज पहुंचेगी।
    • वापसी फ्लाइट: हर बुधवार को शाम 5.15 बजे प्रयागराज से रवाना होगी और शाम 7.25 बजे चंडीगढ़ पहुंचेगी।
    • किराया: इस फ्लाइट का किराया 8000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच रहेगा, जो फ्लेक्सी किराया कैटेगरी के अंतर्गत आता है। फ्लाइट 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगी, जिसमें आखिरी फ्लाइट 26 फरवरी को होगी।

    रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेन सेवा

    उत्तर रेलवे ने महाकुंभ यात्रियों के लिए एक स्पेशल ट्रेन सेवा शुरू की है, जो चंडीगढ़ से प्रयागराज (इलाहाबाद) को जोड़ती है। यह ट्रेन खासतौर पर महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं के लिए चलाई जा रही है।

    स्पेशल ट्रेन की जानकारी

    • ट्रेन की समय सारणी: ट्रेन 17, 20, 25 जनवरी और 9, 15, 23 फरवरी को चंडीगढ़ से रवाना होगी, और वापसी ट्रेन 18, 21, 26 जनवरी तथा 10, 16, 24 फरवरी को होगी।
    • ट्रेन की मार्ग: ट्रेन अंब अंदौरा से चलकर चंडीगढ़ होते हुए प्रयागराज (इलाहाबाद) के फाफामऊ जंक्शन तक जाएगी। रास्ते में यह ऊना, नंगल, आनंदपुर साहिब, रोपड़, मोरिंडा, अंबाला, यमुनानगर, सहारनपुर, रुड़की, नजीबाबाद, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, लखनऊ और रायबरेली जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी।
    • ट्रेन की सुविधा: इस ट्रेन में 16 कोच होंगे, जिनमें 6 एसी कोच, 8 स्लीपर क्लास कोच और 2 जनरल कोच शामिल हैं।

    यात्रा का अंतिम दिन और वापसी

    महाकुंभ का आयोजन 26 फरवरी तक चलेगा, और इसके बाद यात्रा के लिए भी खास व्यवस्था की गई है। यदि आप महाकुंभ के अंतिम दिन यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो चंडीगढ़ लौटने के लिए यह ट्रेन और फ्लाइट सेवा आपकी सुविधानुसार उपलब्ध रहेगी।


    निष्कर्ष

    महाकुंभ 2025 के आयोजन को ध्यान में रखते हुए, चंडीगढ़ से प्रयागराज जाने के लिए डायरेक्ट फ्लाइट और ट्रेन सेवाएं एक बेहतरीन विकल्प प्रदान कर रही हैं। इन सुविधाओं के जरिए आप आसानी से महाकुंभ में स्नान करने के लिए पहुंच सकते हैं और अपने धार्मिक यात्रा को सुविधाजनक बना सकते हैं।

  • Mahakumbh 2025 / त्रिवेणी संगम में स्नान से पहले किस देवता की पूजा करनी चाहिए?

    Mahakumbh 2025 / त्रिवेणी संगम में स्नान से पहले किस देवता की पूजा करनी चाहिए?

    महाकुंभ 2025 का आयोजन प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू हो चुका है, और इसका समापन 26 फरवरी, 2025 को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होगा। करोड़ों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान, दान, जप और तप करने के लिए यहां आ रहे हैं। महाकुंभ को धर्म और आस्था का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है, जो अनगिनत तीर्थ यात्राओं के समान पुण्य देता है।


    त्रिवेणी संगम का महत्व

    त्रिवेणी संगम हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थल है। यह वह स्थान है, जहां तीन पवित्र नदियां—गंगा, यमुना और सरस्वती—आपस में मिलती हैं।

    • गंगा: मोक्ष देने वाली नदी।
    • यमुना: पवित्रता और प्रेम की प्रतीक।
    • सरस्वती: ज्ञान और विद्या की देवी की नदी।
      यह संगम स्थल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण है कि यहां स्नान को विशेष पुण्यकारी माना गया है।

    स्नान से पहले वरुण देव की पूजा

    त्रिवेणी संगम में स्नान करने से पहले वरुण देव की पूजा करना अत्यंत आवश्यक है।

    • वरुण देव का महत्व:
      वरुण देव को जल और समुद्र का देवता माना जाता है। वेदों और पुराणों में उनकी महिमा का वर्णन मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि उनकी आराधना के बिना जल में स्नान का आध्यात्मिक महत्व पूरा नहीं होता।
    • पूजा की विधि:
      त्रिवेणी संगम में प्रवेश करने से पहले वरुण देव का ध्यान करें और उन्हें जल अर्पित करें। इससे स्नान का पुण्य और बढ़ जाता है।

    भगवान विष्णु की आराधना

    त्रिवेणी संगम में स्नान से पहले भगवान विष्णु की पूजा भी महत्वपूर्ण है।

    • विष्णु भगवान का महत्व:
      भगवान विष्णु को पुण्डरीकाक्ष यानी कमल के समान नेत्र वाले कहा जाता है। वे जगत के पालनकर्ता हैं, और उनकी पूजा से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
    • पूजा की विधि:
      भगवान विष्णु के चरणों में पुष्प और जल अर्पित करें और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

    महाकुंभ में स्नान का आध्यात्मिक लाभ

    महाकुंभ का हर स्नान करोड़ों तीर्थ यात्राओं के बराबर माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति की कामना करते हैं।

    • स्नान का महत्व: धर्मशास्त्रों के अनुसार, महाकुंभ में स्नान करने से न केवल वर्तमान बल्कि पूर्वजों के पाप भी धुल जाते हैं।
    • दान और जप: स्नान के बाद दान और जप करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

    विशेष निर्देश

    यदि आप महाकुंभ 2025 में भाग लेने जा रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

    1. स्नान से पहले वरुण देव और भगवान विष्णु की पूजा करें।
    2. पवित्रता और श्रद्धा बनाए रखें।
    3. स्नान के बाद दान और पूजा को न भूलें।

    महाकुंभ में श्रद्धा और आस्था के साथ हिस्सा लें और पुण्य लाभ अर्जित करें।

  • Mahakumbh 2025 / महाकुंभ में जाने से पहले जानें ये 7 महत्वपूर्ण कार्य, दोगुना पुण्य पाएंगे

    Mahakumbh 2025 / महाकुंभ में जाने से पहले जानें ये 7 महत्वपूर्ण कार्य, दोगुना पुण्य पाएंगे

    महाकुंभ का आयोजन एक ऐतिहासिक और धार्मिक अवसर है, जिसे लाखों श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से मानते हैं। प्रयागराज में हो रहे इस महाकुंभ में अब तक 8 करोड़ से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं। अगर आप भी इस महाकुंभ में भाग लेने जा रहे हैं, तो कुछ खास कार्यों को जानकर पुण्य कमा सकते हैं। आइए जानते हैं महाकुंभ में जाने से पहले कौन से 7 कार्य बेहद महत्वपूर्ण हैं:


    1. प्रभु और गंगा की भक्ति में लीन रहें

    महाकुंभ के समय तीर्थयात्रियों को सिर्फ प्रभु और मां गंगा की भक्ति में लीन रहना चाहिए। यह समय सांसारिक विचारों से ऊपर उठने का है, इसलिए घर-परिवार और अन्य चिंताओं को मन में न लाएं। इस समय एकाग्र मन से ध्यान, भक्ति और पूजा करने पर आपको गहरा मानसिक शांति और पुण्य प्राप्त होगा।


    2. धार्मिक कर्मों का पालन करें

    महाकुंभ में पूजा-पाठ, जप, तप, दान, ध्यान, उपवास और पूजा के विशिष्ट नियम होते हैं। अपनी इच्छानुसार किसी भी कार्य को करने से बचें, क्योंकि धार्मिक क्रियाएं विशेष विधि और निर्देशों के अनुसार करनी चाहिए। यदि आपको कोई संकोच हो या शंका हो, तो वहां के पंडितों, साधु-संतों से मार्गदर्शन लें ताकि आप सही कर्म कर सकें।


    3. पिंडदान करते समय सावधानी रखें

    महाकुंभ में पिंडदान का महत्व भी है, खासकर यदि आप अपने पितरों के लिए यह कार्य कराना चाहते हैं। ध्यान रखें कि इस संस्कार को सिर मुंडवाए बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह धार्मिक नियमों के अनुसार आवश्यक है। पिंडदान करने से पितृ दोष दूर होता है और परिवार को सुख-शांति मिलती है।


    4. ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पूजा करें

    महाकुंभ में बिताए जाने वाले हर एक दिन का महत्व होता है। कोशिश करें कि ब्रह्ममुहूर्त में उठकर मां गंगा और तीर्थराज का नमन करें। यह समय विशेष रूप से मंत्रोच्चारण और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है। इसके साथ ही, शाम को भी गंगा के तट पर जाकर वंदन करना पुण्य के लिए शुभ माना जाता है।


    5. साधु-संतों के प्रवचन सुनें

    महाकुंभ में कई साधु-संतों के प्रवचन होते हैं, जिन्हें सुनने का अवसर मिलना एक विशेष सौभाग्य की बात है। इन प्रवचनों से आप जीवन के महत्वपूर्ण पाठ सीख सकते हैं और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए, प्रवचन सुनने का अवसर छोड़ें नहीं और ज्ञान प्राप्त करें।


    6. कल्पवास करें, भले ही एक दिन के लिए

    कल्पवास का महत्व महाकुंभ के दौरान विशेष रूप से देखा जाता है। यदि संभव हो, तो एक दिन के लिए कल्पवास करें। यह एक प्रकार का तप होता है जिसमें आप अपनी दिनचर्या को सरल बनाकर ध्यान और साधना में लीन होते हैं। कल्पवास से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है।


    7. गंगा में 5 डुबकी लगाएं और गंगा मंत्र का जाप करें

    हर दिन गंगा में पांच डुबकी लगाना और गंगा मंत्र का जाप करना बहुत फायदेमंद होता है। यह न केवल शरीर की सफाई करता है, बल्कि आत्मा को भी शुद्ध करता है। गंगा की पवित्र धारा में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।


    निष्कर्ष

    महाकुंभ के दौरान इन 7 कार्यों का पालन करने से आप न केवल पुण्य कमा सकते हैं, बल्कि आत्मिक शांति और मानसिक शुद्धता भी पा सकते हैं। प्रयागराज का यह तीर्थ स्थल, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, आपको धार्मिक उन्नति के पथ पर मार्गदर्शन करेगा। इसलिए महाकुंभ में भाग लेने से पहले इन महत्वपूर्ण कार्यों को जानकर अपने धार्मिक अनुभव को और भी सार्थक बनाएं।

  • Mahakumbh 2025 /पहला अमृत स्नान, जानिए कब कौन सा अखाड़ा करेगा स्नान

    Mahakumbh 2025 /पहला अमृत स्नान, जानिए कब कौन सा अखाड़ा करेगा स्नान

    महाकुंभ 2025 का पावन पर्व प्रयागराज में शुरू हो चुका है। 14 जनवरी को पहला अमृत स्नान (शाही स्नान) होगा, जिसमें नागा साधुओं के अखाड़े प्रमुख रूप से स्नान करेंगे। आइए जानते हैं कि किस अखाड़े का स्नान कब होगा और उनका क्रम क्या है।

    महानिर्वाणी अखाड़ा करेगा पहला अमृत स्नान

    महाकुंभ 2025 के पहले शाही स्नान में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी सबसे पहले स्नान करेगा। इसके साथ ही श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा भी स्नान करेगा। महानिर्वाणी अखाड़ा सुबह 5:15 बजे शिविर से प्रस्थान करेगा और 6:15 बजे घाट पर पहुंचेगा। स्नान के लिए इसे 40 मिनट का समय दिया जाएगा। स्नान के बाद, यह अखाड़ा 6:55 बजे घाट से रवाना होकर 7:55 बजे शिविर वापस लौटेगा।

    दूसरे स्थान पर इन अखाड़ों का स्नान होगा

    दूसरे स्थान पर श्री तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा और श्री पंचायती अखाड़ा आनंद स्नान करेंगे। ये अखाड़े सुबह 6:05 बजे शिविर से निकलकर 7:05 बजे घाट पर पहुंचेंगे। इन्हें भी स्नान के लिए 40 मिनट का समय मिलेगा। स्नान के बाद, ये 7:45 बजे घाट से रवाना होकर 8:45 बजे शिविर वापस लौटेंगे।

    तीसरे स्थान पर ये अखाड़े करेंगे स्नान

    तीसरे स्थान पर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, और श्री पंचाग्नि अखाड़ा स्नान करेंगे। इन अखाड़ों का शिविर से प्रस्थान सुबह 7 बजे होगा और 8 बजे घाट पर पहुंचेंगे। इनको भी 40 मिनट का स्नान समय मिलेगा, और 8:40 बजे घाट से रवाना होकर 9:40 बजे शिविर वापस पहुंचेंगे।

    बैरागी अखाड़ों का स्नान समय

    बैरागी अखाड़ों के स्नान का समय भी तय किया गया है:

    1. अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा – यह अखाड़ा सुबह 9:40 बजे शिविर से निकलेगा और 10:40 बजे घाट पहुंचेगा। स्नान के बाद, 11:10 बजे घाट से रवाना होकर 12:10 बजे शिविर वापस लौटेगा।
    2. अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा – यह अखाड़ा 10:20 बजे शिविर से प्रस्थान करेगा और 11:20 बजे घाट पहुंचेगा। स्नान के बाद, 12:10 बजे घाट से रवाना होकर 1:10 बजे शिविर वापस पहुंचेगा।
    3. अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा – यह अखाड़ा 11:20 बजे शिविर से चलेगा और 12:20 बजे घाट पहुंचेगा। स्नान के बाद, 12:50 बजे घाट से रवाना होकर 1:50 बजे शिविर वापस लौटेगा।

    महाकुंभ 2025 में इन अखाड़ों का शाही स्नान एक ऐतिहासिक और पवित्र अवसर होगा, जिसमें हजारों साधु-संत और श्रद्धालु हिस्सा लेंगे।

  • Mahakumbh 2025 / भारत को जानने का शानदार अवसर महाकुंभ – CM योगी

    Mahakumbh 2025 / भारत को जानने का शानदार अवसर महाकुंभ – CM योगी


    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ 2025 के आयोजन को लेकर कहा कि यह आयोजन खास है क्योंकि यह 144 वर्षों के बाद एक विशेष शुभ मुहूर्त पर हो रहा है। उन्होंने महाकुंभ को भारत और दुनिया के लोगों के लिए एक शानदार अवसर बताते हुए कहा कि इस आयोजन के जरिए श्रद्धालुओं को भारत की आध्यात्मिक विरासत को जानने और समझने का अद्वितीय अनुभव मिलेगा, खासकर संतों के मार्गदर्शन से।

    40 करोड़ श्रद्धालुओं की भागीदारी का अनुमान
    सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ‘गोरखपुर महोत्सव 2025’ के समापन समारोह में यह बयान दिया। उन्होंने बताया कि महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक 45 दिन चलेगा, और इस आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। सीएम योगी ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का हिस्सा बनना किसी अन्य देश के लिए संभव नहीं है, और यह केवल भारत और चीन जैसे विशाल आबादी वाले देशों में ही हो सकता है।

    महाकुंभ में विशेष कारीगरी का आगाज
    योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों के बारे में भी जानकारी दी। इस बार श्रद्धालु अक्षय वट कॉरिडोर, मां सरस्वती मंदिर, बड़े हनुमान मंदिर, महर्षि व्यास और भगवान राम तथा निषादराज कॉरिडोर का निर्माण देख सकेंगे। इसके अलावा, श्रद्धालु नाग वासुकी, द्वादश ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा भी कर सकेंगे।

    महाकुंभ का आयोजन 10 हजार एकड़ क्षेत्र में
    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस बार महाकुंभ का आयोजन 10 हजार एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है। आयोजन की शुरुआत से पहले ही 35 लाख श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच चुके थे। उन्होंने श्रद्धालुओं से मकर संक्रांति के दिन बाबा गोरखनाथ में खिचड़ी चढ़ाने की अपील की और फिर महाकुंभ जाने के लिए प्रेरित किया।

    महाकुंभ 2025, न केवल एक आध्यात्मिक यात्रा है, बल्कि यह भारत की धार्मिक धरोहर और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने पेश करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।