श्रीलंका में 36 घंटे तक जारी रहे ब्लैकआउट ने पूरे देश को अंधेरे में डुबो दिया। इस घटना के पीछे की वजह जानकर हर कोई हैरान है। सरकार का दावा है कि यह पावर कट एक बंदर की वजह से हुआ, जिससे लोगों को त्रेतायुग में भगवान हनुमान द्वारा लंका दहन की कहानी याद आ गई। लेकिन क्या सच में ऐसा हुआ या यह प्रशासनिक नाकामी थी?
कैसे डूबा श्रीलंका अंधेरे में?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 9 फरवरी को सुबह 11 बजे अचानक श्रीलंका में बिजली गुल हो गई। पहले इसे एक सामान्य पावर कट माना गया, लेकिन बाद में पता चला कि यह ब्लैकआउट पूरे देश में फैला हुआ है। कोलंबो समेत कई बड़े शहरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
सरकार का दावा: बंदर बना बिजली संकट की वजह!
श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री कुमार जयकोडी ने इस अजीबोगरीब घटना पर बयान देते हुए कहा कि एक बंदर ग्रिड ट्रांसफार्मर के संपर्क में आ गया था, जिससे पूरे सिस्टम में असंतुलन पैदा हो गया। यह घटना दक्षिण कोलंबो के एक उपनगर में हुई, जिससे पूरे देश की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
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हनुमान की याद आई, लेकिन क्या यह सच है?
सरकार के इस दावे के बाद लोगों ने त्रेतायुग की उस घटना को याद किया, जब भगवान हनुमान ने लंका को जलाया था। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने व्यंग्यात्मक अंदाज में इसे “कलयुग का लंका दहन” तक कह डाला।
सरकार के दावे पर सवाल
हालांकि, श्रीलंकाई सरकार के इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के इंजीनियर कई सालों से सरकार को पावर ग्रिड को अपग्रेड करने की सलाह दे रहे थे। उनका कहना था कि अगर बिजली आपूर्ति तंत्र को अपग्रेड नहीं किया गया, तो बार-बार इस तरह के ब्लैकआउट झेलने पड़ सकते हैं।
लोकल अखबार डेली मिरर ने सरकार के दावे को गलत ठहराते हुए कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो सकता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सच में एक बंदर इतने बड़े स्तर पर ब्लैकआउट का कारण बन सकता है या यह श्रीलंकाई सरकार की अपनी विफलताओं को छिपाने की एक और कोशिश है?
क्या ब्लैकआउट का असली कारण छिपा रही है सरकार?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आधुनिक पावर ग्रिड सिस्टम में इस तरह की घटना से पूरे देश की बिजली आपूर्ति ठप नहीं होनी चाहिए। यह तकनीकी खामी का मामला हो सकता है, जिसे सरकार ने हल्के में लिया और अब बंदर को दोषी ठहराया जा रहा है।
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