हिमाचल प्रदेश में फोरलेन के 100 मीटर दायरे में आने वाले क्षेत्रों को अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) के अंतर्गत शामिल कर दिया गया है। इससे इन इलाकों में नए घरेलू या व्यावसायिक भवनों के निर्माण या पुनर्निर्माण के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अनिवार्य कर दिया गया है।
किन लोगों को लेनी होगी अनुमति?
- फोरलेन निर्माण से प्रभावित भवन मालिक, जिन्हें पुनर्निर्माण करना है।
- जो लोग नया व्यावसायिक भवन या घरेलू भवन बनाना चाहते हैं।
- जो लोग मौजूदा भवन में अतिरिक्त निर्माण कर रहे हैं।
किन्हें नहीं लेनी होगी अनुमति?
- जो केवल अपने भवन की मरम्मत कर रहे हैं।
- जिनका घर फोरलेन निर्माण के कारण आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है और वे केवल इसकी मरम्मत करवाना चाहते हैं।
फोरलेन किनारे निर्माण को लेकर नए नियम क्यों लागू हुए?
सरकार चाहती है कि सभी निर्माण उचित प्लानिंग और सुरक्षा मानकों के अनुसार हों। पठानकोट से मंडी और कांगड़ा से शिमला तक दो नए फोरलेन बन रहे हैं, जिनकी वजह से कई लोगों के घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं। नए निर्माण को फोरलेन से उचित दूरी पर बनाए जाने के लिए यह नियम लागू किया गया है।
एनओसी कैसे प्राप्त करें?
- ऑनलाइन आवेदन करें।
- TCP विभाग द्वारा मात्र दो दिनों में एनओसी जारी कर दी जाएगी।
- री-कंस्ट्रक्शन करने वालों को भी विभाग को सूचित करना होगा, ताकि उन्हें नियमों की जानकारी दी जा सके।
TCP विभाग की प्रतिक्रिया
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिकारी रशिक शर्मा के अनुसार, फोरलेन के दोनों तरफ 100-100 मीटर का क्षेत्र TCP के तहत आएगा। ऐसे में कोई भी नया निर्माण करने से पहले एनओसी लेना अनिवार्य होगा।
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नए नियमों का उद्देश्य
- फोरलेन किनारे अनियोजित और अवैध निर्माण को रोकना।
- सुरक्षा मानकों के अनुसार निर्माण सुनिश्चित करना।
- फोरलेन से उचित दूरी बनाए रखने के लिए जागरूकता बढ़ाना।
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