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चीड की पत्तियां बन रही हादसों का कारण, विभागीय लापरवाही पर सवाल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल

हिमाचल प्रदेश में चीड की पत्तियां सड़कों पर फिसलन का कारण बनकर हादसों को बढ़ा रही हैं। इस समस्या को लेकर विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने सफाई और सुरक्षा उपायों की मांग की है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

ऊना

हिमाचल प्रदेश के हरे-भरे जंगलों में चीड के पेड़ों की चिपचिपी पत्तियां (चलार) अब सड़कों पर हादसों का सबब बन रही हैं। राज्य में सबसे ज्यादा चील के पेड़ होने से प्रभावित क्षेत्रों में फिसलन से ब्रेक फेल हो रहे हैं। हमीरपुर जिले में ही बीते दिनों दो लोगों की दर्दनाक मौत ने लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं।

हिमाचल के 68 प्रतिशत जंगली क्षेत्र चील के पेड़ों से भरे पड़े हैं, खासकर हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर में। इन पत्तियों की तेलीय प्रकृति गीली सड़कों पर फिसलन पैदा करती है। हमीरपुर जिले के अंतर्गत दबड़ियाना पंचायत के मार्ग पर एक कार का अनियंत्रित होकर खाई में गिरने से कार सवार दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग के प्रति रोष व्यक्त किया। लोगों ने कहा कि चलार से जाने जा रही है और विभाग सोया हुआ!”स्थानीय निवासी जितेंद्र कुमार ने कहा, “विभाग ने कभी सफाई नहीं कराई, न चेतावनी लगाई। जंगल विभाग से समन्वय की जरूरत है।”

लोक निर्माण विभाग अधिकारियों ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए तर्क दिया कि यह जंगल वन विभाग का मामला है,लोगों ने कुछ मुख्य मांगें उठाई जिसमें सड़कों पर तत्काल पत्ती-हटाओ अभियान, फिसलन स्पॉट्स पर चेतावनी बोर्ड लगाना, विभागों के बीच समन्वय समिति,लोगो ने कहा है कि मुद्दा अब विधानसभा तक पहुंच सकता है और जागरूकता अभियान चलाकर हादसों रोके जाएं।