POCSO / रामपुर की अदालत ने दो मामलों में दोषियों को सुनाई 20-20 वर्ष की कैद
POCSO / रामपुर की विशेष अदालत ने नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े दो अलग मामलों में दोषियों को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। पहले मामले में दोषी पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया, जबकि सगी बेटी के शोषण से जुड़े दूसरे मामले में अदालत ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। दूसरे मामले में पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखने के लिए दोषी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रामपुर बुशहर
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट रामपुर ने पहले मामले में राम बहादुर पुत्र पूर्ण बहादुर, निवासी खलंगा, जिला जुमला, नेपाल को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे बीएनएस और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 20 वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। उपजिला न्यायवादी किन्नौर स्थित रामपुर बुशहर कमल चंदेल के अनुसार, बाल पीड़िता और उसकी माता घटना से कुछ दिन पहले नेपाल से रिकांगपिओ आए थे। पीड़िता के हृदय में छेद था और उसकी माता भारत में उसका उपचार करवाना चाहती थी।
छह नवंबर 2024 को पीड़िता की माता काम की तलाश में बाहर गई थी। इसी दौरान पानी भरने के लिए आरोपी के क्वार्टर के पास पहुंची बाल पीड़िता को आरोपी जबरन अपने कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने आरोपी के फोन से अपनी माता को घटना की जानकारी दी। माता के कहने पर वहां पहुंचे एक नेपाली व्यक्ति को कमरे के भीतर से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। दरवाजा खोलने पर आरोपी अर्धनग्न अवस्था में मिला और पीड़िता के कपड़े भी उतरे हुए थे।
घटना के बाद पीड़िता की माता ने थाना रिकांगपिओ में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद जांच शुरू की और प्रक्रिया पूरी होने पर अदालत में चालान पेश किया। मामले की जांच एसआई भारत सिंह ने की। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 20 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास तथा पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सगी बेटी के शोषण मामले में भी 20 वर्ष की सजा
इसी अदालत ने एक अन्य पॉक्सो मामले में भी दोषी को 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। उस पर अपनी सगी बेटी का करीब दो से तीन वर्ष तक शारीरिक शोषण करने का आरोप था, जो अदालत में सिद्ध हुआ। दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। बाल पीड़िता की पहचान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में दोषी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।